आस्था के केंद्र पर अतिक्रमण का ग्रहण: मंदिर समिति के फैसले के बाद अब बड़े एक्शन की दरकार*
*आस्था के केंद्र पर अतिक्रमण का ग्रहण: मंदिर समिति के फैसले के बाद अब बड़े एक्शन की दरकार*

विशेष संवाददाता: श्री निवास मिश्रा, मैहर
दिनांक: 11 जून 2026, गुरुवार
धार्मिक नगरी में स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर समिति द्वारा हाल ही में लिया गया सख्त निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में अनियंत्रित यातायात, अव्यवस्थित पार्किंग और बढ़ते अतिक्रमण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से समिति ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ₹500 का अर्थदंड लगाने का निर्णय लिया है।
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं का मानना है कि यह कदम अनुशासन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लंबे समय से दुकानों के सामने तथा मार्गों पर बेतरतीब ढंग से खड़े वाहनों के कारण आवाजाही बाधित हो रही थी, जिससे दर्शनार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
*जुर्माने के साथ पार्किंग व्यवस्था भी बने प्राथमिकता*
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। यदि श्रद्धालुओं के लिए समुचित और व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था विकसित नहीं की गई, तो समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं हो पाएगा। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधाजनक पार्किंग उपलब्ध कराना प्रशासन और मंदिर समिति दोनों की जिम्मेदारी है।
*रोपवे क्षेत्र में बढ़ती अव्यवस्था बनी चिंता का विषय*
सबसे गंभीर स्थिति रोपवे क्षेत्र और उसके आसपास देखने को मिल रही है, जहां वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार रोपवे, स्वस्तिक बिल्डिंग और जेपी अन्नकूट से लगे क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है। आगामी मेला और त्योहारों के दौरान यही स्थिति किसी बड़ी अव्यवस्था या दुर्घटना का कारण बन सकती है।
*अतिक्रमण के पीछे स्थानीय स्तर की अनियमितताओं के आरोप*
स्थानीय सूत्रों के अनुसार कुछ आवंटी अपनी दुकानों का संचालन स्वयं करने के बजाय उन्हें आगे किराए या सिक्मी पर देकर बाहरी हिस्सों तक व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं। आरोप है कि इस कारण सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण बढ़ा है और पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन दावों की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
*प्रशासन से अपेक्षित ठोस कदम*
स्थिति को देखते हुए नागरिकों और सामाजिक संगठनों का सुझाव है कि संबंधित विभाग निम्न बिंदुओं पर प्राथमिकता से कार्रवाई करें—
नियमों का उल्लंघन करने वाले अतिक्रमणकारियों की पहचान कर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
रोपवे एवं जेपी अन्नकूट मार्ग सहित प्रमुख रास्तों को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वैज्ञानिक और पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था विकसित की जाए।
त्योहारों और मेलों से पूर्व यातायात प्रबंधन की विशेष कार्ययोजना लागू की जाए।
नियमित निगरानी और प्रवर्तन के माध्यम से भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न होने दिया जाए।
*श्रद्धा और व्यवस्था का संतुलन आवश्यक*
धार्मिक स्थलों की गरिमा केवल भव्यता से नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित प्रबंधन और श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं से भी तय होती है। मंदिर समिति का हालिया निर्णय व्यवस्था सुधार की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत माना जा सकता है, किंतु इसके साथ प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शी कार्रवाई और दीर्घकालिक समाधान भी उतने ही आवश्यक हैं।
यदि समय रहते अतिक्रमण, अव्यवस्थित पार्किंग और यातायात संबंधी समस्याओं पर ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो न केवल श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी बल्कि धार्मिक नगरी की प्रतिष्ठा और सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।