ओंकारेश्वर में संभावित त्रासदी की चेतावनी / अधूरी योजना बनी खतरा, प्रशासन से समय रहते कार्रवाई की मांग.. *”शंकराचार्य की मूर्ति तो खड़ी हो गई, लेकिन नीचे खड़ाहै खतरा
ओंकारेश्वर में संभावित त्रासदी की चेतावनी /
अधूरी योजना बनी खतरा, प्रशासन से समय रहते कार्रवाई की मांग..
*”शंकराचार्य की मूर्ति तो खड़ी हो गई, लेकिन नीचे खड़ा
है खतरा!”*
ओंकारेश्वर – उत्तराखंड में हाल ही में हुई प्राकृतिक त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इसी संदर्भ में ओंकारेश्वर पर्वत पर आदिगुरु शंकराचार्य जी की भव्य प्रतिमा के नीचे वर्षों से अधूरी पड़ी निर्माण योजना अब संभावित खतरे का रूप लेती दिखाई दे रही है। क्षेत्रीय नागरिकों व श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम न उठाए गए, तो ओंकारेश्वर में भी गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ज्ञात हो कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में ओंकार पर्वत पर आदिगुरु शंकराचार्य जी की विशाल प्रतिमा की स्थापना की गई थी, जो वर्तमान में पूर्ण रूप से स्थापित होकर दर्शनीय है। किंतु प्रतिमा के आधार के समीप बड़ी मात्रा में खुदाई की गई थी, जिसका उद्देश्य एक भव्य सांस्कृतिक परिसर या संग्रहालय निर्मित करना बताया गया था। यह परियोजना कई वर्षों से अधर में लटकी हुई है और अब वह खुदाई का क्षेत्र एक गहरे गड्ढे के रूप में रह गया है, जिसमें वर्षा जल का भराव हो रहा है।
*परिक्रमा मार्ग के पास भू-स्खलन की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं,जिसका मुख्य कारण यही जलभराव बताया जा रहा है। यदि जल निकासी की समुचित व्यवस्था न की गई, तो कोई बड़ा हादसा कभी भी घटित हो सकता है।*
स्थानीय जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि जिस भाग में खुदाई कर पत्थर व मिट्टी के ढेर जमा कर दिए गए हैं, उन्हें पुनः भर दिया जाना चाहिए। ओंकार पर्वत की प्राकृतिक सुंदरता और भौगोलिक संरचना से छेड़छाड़ न की जाए।
उनका मानना है कि प्रतिमा अपने आप में पूर्ण, भव्य और दर्शनीय है, और वर्तमान स्वरूप ही श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अधूरी योजनाओं के कारण क्षेत्र की पवित्रता और सुरक्षा दोनों ही प्रभावित हो रही हैं।
इसके साथ ही, जो नया पुल संगम तक निर्मित किया जा रहा है, उसे पैदल पुल के रूप में सीमित रखने की भी मांग की जा रही है ताकि ओंकारेश्वर मंदिर और ओंकार पर्वत की मर्यादा तथा आध्यात्मिक गरिमा बनी रहे।
वर्तमान मुख्यमंत्री का प्रमुख ध्यान उज्जैन विकास पर केंद्रित होने और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के पद से हटने के बाद, यह योजना अब आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं दिख रही है। ऐसे में अधूरी परियोजना की जगह सुरक्षा और संरचना संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन समय रहते सजग होता है या फिर ओंकारेश्वर को भी किसी बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ेगा।
*क्या करना चाहिए प्रशासन को.?*
– गड्ढे को तत्काल भरवाया जाए
– पत्थर-मिट्टी के ढेर हटाकर प्राकृतिक संरचना को पुनः बहाल किया जाए
– संगम पर बन रहे पुल को पैदल पुल में बदला जाए
– पर्वत क्षेत्र की आध्यात्मिक मर्यादा की रक्षा हो
*मूर्ति ही पर्याप्त सुंदर और दर्शनीय है*
स्थानीय श्रद्धालु कहते हैं कि विशाल प्रतिमा अपने आप में एक भव्यता का प्रतीक है, और ओंकार पर्वत पर और किसी निर्माण की आवश्यकता नहीं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अब सत्ता में नहीं हैं, और वर्तमान शासन का पूरा फोकस उज्जैन पर है। ऐसे में यह परियोजना पूर्ण हो पाएगी, इसकी संभावना क्षीण है।
तो सवाल सीधा है –
क्या प्रशासन ओंकारेश्वर को बचाएगा या आने वाले खतरे को यूं ही नजरअंदाज करता रहेगा?