दिनभर बैंक की जिम्मेदारियां… और शाम को फिटनेस के लिए पूरा समर्पण।
लोकेशन खालवा
आदित्य उपाध्याय
दिनभर बैंक की जिम्मेदारियां… और शाम को फिटनेस के लिए पूरा समर्पण।

ये कहानी है एक ऐसे बैंक ऑफिसर सौरभ सुमन की, जो सिर्फ अपने काम में ही नहीं बल्कि अपनी जिंदगी में भी अनुशासन की मिसाल बन चुका है।
सुबह से शाम तक ग्राहकों की सेवा, फाइलों का दबाव और जिम्मेदारियों के बीच भी इन्होंने अपने स्वास्थ्य को कभी नजरअंदाज नहीं किया।
ऑफिस खत्म होने के बाद जहां लोग थककर आराम चुनते हैं, वहीं ये सीधे जिम पहुंचते हैं।
इनका मानना है कि
‘मजबूत शरीर और मजबूत सोच, दोनों सफलता के लिए जरूरी हैं।’
आज के युवाओं के लिए ये एक प्रेरणा हैं कि व्यस्तता कभी बहाना नहीं होती।
अगर इरादे मजबूत हों, तो काम के साथ खुद को फिट और अनुशासित रखना पूरी तरह संभव है।
ऐसे युवा और कर्मचारी समाज को यह संदेश देते हैं कि
मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।”