आत्म शुद्धि, संयम के जैन धर्म के महान पर्युषण पर्व का जैन मंदिरों में हुआ शुभारंभ।
आत्म शुद्धि, संयम के जैन धर्म के महान पर्युषण पर्व का जैन मंदिरों में हुआ शुभारंभ।


क्षमा धारण कर अपने हृदयस्थ क्रोध का दमन करें, ,,डॉ. संजय शाह,,
क्रोध का त्याग, सभी जीवो के प्रति क्षमा भाव ही उत्तम क्षमा है, ,,आयुषी दीदी,,
पर्व के चलते नवकार नगर जैन मंदिर परिसर में आकर्षक शिखर जी की रचना के साथ कलात्मक सजाया गया मांडना।
खंडवा। आत्म शुद्धि, शांति, संयम और आत्म कल्याण के महान पर्यूषण पर्व का धार्मिक विधि विधान से उत्तम क्षमा धर्म की पूजा के साथ शुभारंभ हुआ। 16 सितंबर से 25 सितंबर तक आयोजित जैन धर्म के पर्युषण पर्व का बुधवार से शुभारंभ हुआ। 10 दिनों तक तक चलने वाले इस दस दिवसीय पर्व के दौरान खंडवा शहर के समस्त दिगंबर जैन मंदिरों में प्रतिदिन भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजा, दसलक्षण धर्म की पूजा के साथ प्रत्येक धर्म पर विद्वान पंडित डॉ. संजय शाह एवं सांगानेर से पधारी आयुषी, वारिधी दिदीयो के द्वारा प्रवचन होंगे। पर्व के प्रथम दिवस सर्राफा स्थित जैन धर्मशाला में उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन देते हुए डॉक्टर संजय शाह ने कहा कि क्षमा आत्मा का गुण है जो क्रोध और कषाय के कारण विकृत हो जाता है। जिस प्रकार जल का स्वभाव शीतलता है, परंतु अग्नि का संयोग पाकर उष्ण हो जाता है। उष्णता जल का स्वभाव नहीं है, अपितु यह उसका विभाव है। अग्नि का सम्पर्क हटते ही वही जल अपने स्वाभाविक रूप याने शीतलता को प्राप्त हो जाता है। उसी जल में शीतलता के लिए अन्य साधन की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि उसका वह स्वाभाविक गुण है। इसी प्रकार क्षमा गुण युक्त अवस्था आत्मा का स्थायी गुण है, इसके लिए किसी भी प्रकार की सामग्री की आवश्यकता नहीं होती है। बजरंग चौक स्थित महावीर जैन मंदिर में पर्व के प्रथम दिन सांगानेर से पधारी आयुषी वैरायटी दीदी ने संगीतमय मंडल विधान की पूजा करवाई, इस अवसर पर आयुषी दीदी ने कहा की क्रोध भाव आत्मा का स्वभाव नहीं है, किन्तु परपदार्थ के संयोग से उत्पन्न हुआ विभाव भाव है। अत: यह आत्मा का अहितकारक है। अत: क्रोध का त्याग करके क्षमा भाव को धारण करना चाहिए। जिस उत्तम फल की प्राप्ति क्षमावान को होती है, क्रोधी मानव को नहीं हो सकती है। क्रोधी मनुष्य कितना भी जप, तप, तीर्थाटन, दान, पूजा आदि कर ले उसके सारे उत्तम कार्य भी व्यर्थ हो जाते हैं। क्रोध बैर बढ़ाता है, मित्रता को दूर कर देता है,
क्रोध के समान कोई अन्य शत्रु नहीं है। यही क्रोध एक मानसिक उद्वेग है। दीदी ने कहा कि क्रोध का त्याग करके सभी जीवो के प्रति समता का भाव यह उत्तम क्षमा है, समाज के सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि त्याग, तप, संयम और साधना के पर्युषण पर्व का शुभारंभ बुधवार से प्रारंभ हुआ। खंडवा के समस्त दिगंबर जैन मंदिरों सराफा स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर, बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर,नवकार नगर मुनिसूव्रत जैन मंदिर, मोधट रोड आदिनाथ जैन मंदिर, इंदौर रोड कहान आदिनाथ जैन मंदिर,सेठी नगर चंद्रप्रभु जैन मंदिर में 16 सितंबर से 25 सितंबर सितंबर तक पर्युषण पर्व धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि इस वर्ष नवकार नगर जैन मंदिर प्रांगण मे आकर्षक एवं सुंदर तीर्थराज सम्मेद शिखर जी की रचना स्थापित की गई है, जो आकर्षक का केंद्र है वही सुंदर कलात्मक नंदीश्वर दीप मंडल विधान का मांडना नीता लोहड़िया, संस्कृति लोहाडिया, कामिनी जैन व अन्य मातृशक्ति के द्वारा बनाया गया हें। समाज के अध्यक्ष वीरेंद्र जैन, दिलीप पहाड़िया, पंकज छाबड़ा, विजय सेठी ने सभी सामाजिक बंधुओ से पर्यूषण पर्व पर मंदिरों में आयोजित पूजा,प्रवचनों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उपस्थित होकर का पुण्य लाभ लेने का अनुरोध किया है।
