खबर
जीवन”_ नेहा दुग्गल l
“जीवन”
जीवन की भागम भाग में कुछ मिला,
तो बहुत कुछ छूट गया।
कुछ तो जोड़ा, तो बहुत कुछ टूट गया।
कुछ को मनाया, तो बहुत कुछ रूठ गया।
यही तो जीवन धारा, यहाँ कुछ भी नहीं हमारा है।
बस चलते जाना है, यही तो जीने का बहाना है।
लेखिका – नेहा दुग्गल