खबर
धन, सौंदर्य से हम सुंदर नहीं होते वर्ण सुंदर से भी हम सुंदर नहीं होते ,*

*आत्मस्वरूप के करीब पहुँचने पर हम सुंदर होते हैं । जितने हम भीतर के धन से खोखले या कंगाल होते हैं उतनी बाह्य पदार्थों की गुलामी करनी पड़ती है क्योंकि सुख इन्सान की जरूरत है । जब तक हमें आत्मिक आनंद नहीं मिलता, तब तक हम विषय-वासना में सुख ढूँढ़ते हैं किंतु दुःख, परेशानी के अलावा कुछ हाथ नहीं लगता । इसके विपरीत, जितने हम भीतर के धन से सम्पन्न होते हैं, आत्मसुख से तृप्त होते हैं उतना हम बाह्य भोग-पदार्थों की ओर से बेपरवाह होते हैं* ।
🚩 *मुनी श्री पंकज जी महाराज हिंदुस्तानी फक्कड*🚩