अब सड़कों पर निराश्रित गोवंश नहीं छोड़ सकेंगे पशु, प्रशासन सख्त; आदेश उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई*
*अब सड़कों पर निराश्रित गोवंश नहीं छोड़ सकेंगे पशु, प्रशासन सख्त; आदेश उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई*
एंकर:
पन्ना जिले में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और गौवंश सहित अन्य पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। पन्ना कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करते हुए जिलेभर में सड़कों पर पशु एवं गौवंश को खुले में छोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 15 जुलाई 2026 से आगामी दो माह तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी
जारी आदेश के अनुसार जिले के सभी नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे, प्रमुख जिला मार्ग, ग्रामीण सड़कें तथा नगरीय क्षेत्रों की सड़कों पर अब कोई भी पशुपालक अपने पशुओं को खुले में नहीं छोड़ सकेगा। दुग्ध उत्पादन अथवा अन्य उद्देश्य से पशुपालन करने वाले व्यक्तियों को भी अपने पशुओं को निजी परिसर, बाड़े या सुरक्षित स्थान पर रखना अनिवार्य होगा, ताकि वे सार्वजनिक मार्गों पर न पहुंचें और किसी दुर्घटना का कारण न बनें जिला प्रशासन ने सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, नगरीय निकायों के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों, ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सड़कों पर घूम रहे निराश्रित पशुओं की पहचान कर उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर नजदीकी गौशालाओं में सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर लगातार निगरानी रखने के भी निर्देश दिए गए हैं पशुपालन विभाग को भी विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभागीय अधिकारियों को जिले की सभी गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करने, पशुओं की टैगिंग सुनिश्चित करने, उनके स्वास्थ्य की निगरानी रखने तथा रिकॉर्ड संधारित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रत्येक पशु का पूरा विवरण सुरक्षित रहे और किसी प्रकार की लापरवाही न हो
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई पशुपालक गौशाला से अपना पशु वापस लेता है तो उसे शासन द्वारा निर्धारित खुराक शुल्क के साथ अर्थदंड भी जमा करना होगा। बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए किसी भी पशु को गौशाला से नहीं छोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य पशुपालकों को अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराना और सड़कों पर पशु छोड़ने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है
आदेश का उल्लंघन करने वाले पशुपालकों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, यदि किसी क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतते पाए गए, तो उनके विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी
गौरतलब है कि जिले में सड़कों पर घूमते एवं बैठे निराश्रित पशुओं के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रही हैं। कई मामलों में लोगों की जान तक चली गई है, जबकि बड़ी संख्या में गौवंश भी दुर्घटनाओं का शिकार होता है। विशेष रूप से रात्रि के समय हाईवे और प्रमुख मार्गों पर बैठे पशु वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन जाते हैं। इसी स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने यह सख्त निर्णय लिया है
प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि यदि उनके क्षेत्र में कोई निराश्रित पशु सड़कों पर घूमता दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय, पशुपालन विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें, ताकि समय रहते उसे सुरक्षित गौशाला पहुंचाया जा सके। साथ ही सभी पशुपालकों से अपील की गई है कि वे अपने पशुओं की उचित देखभाल करें और उन्हें सार्वजनिक मार्गों पर न छोड़ें
जिला प्रशासन का मानना है कि इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और यातायात व्यवस्था भी अधिक सुरक्षित एवं सुचारु बन सकेगी। आदेश के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सभी संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि प्रत्येक पशुपालक तक इसकी जानकारी पहुंच सके और जिले में इस अभियान को सफल बनाया जा सके।