पांच दिवसीय नानी बाई का मायरा 18 मई सोमवार से*
*पांच दिवसीय नानी बाई का मायरा 18 मई सोमवार से* 


*ज्यो ज्यो संकट आवे भक्त पर,त्यों त्यों श्याम सहाई*
खण्डवा। पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक मंच द्वारा 18 मई सोमवार से 22 मई गुरुवार तक प्रतिदिन 3 बजे से 6 बजे तक गणेश गौशाला में होगा। व्रन्दावन से पधारी कथा वाचक देवी कृष्ण प्रियाजी अपने मुखारविंद से कथा का रसास्वादन कराएगी।नारायण बाहेती व सुनील जैन ने बताया कि समिति संयोजक आशीष चटकेले के नेतृत्व में आयोजित बैठक में कार्यक्रम की तैयारी पर समीक्षा कर कार्य विभाजन किया गया। आशीष चटकेले व रामचन्द्र मौर्य ने कहाकि पुरुषोत्तम मास में इस धार्मिक आयोजन का अत्यधिक महत्व है।
“नानी बाई रो मायरो” राजस्थान और गुजरात में अत्यंत प्रसिद्ध भक्तिमयी कथा है। यह कथा भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त नरसी मेहता की भक्ति, विश्वास और भगवान की कृपा को दर्शाती है।
कथा का मुख्य प्रसंग
नरसी मेहता अत्यंत गरीब थे, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा थी। उनकी पुत्री नानी बाई का विवाह हो चुका था। विवाह के बाद बेटी के ससुराल में “मायरा” (भात/उपहार देने की परंपरा) का अवसर आया। परंपरा अनुसार मायरा में पिता को वस्त्र, आभूषण, मिठाई और अनेक उपहार देने होते हैं।
गरीबी के कारण नरसी मेहता बहुत चिंतित हुए, क्योंकि उनके पास मायरा भरने के लिए कुछ भी नहीं था। समाज और रिश्तेदार उनका उपहास करने लगे। लेकिन नरसी मेहता ने सब कुछ भगवान श्रीकृष्ण पर छोड़ दिया और भक्ति में लीन रहे।
भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्त की लाज बचाने स्वयं धनवान सेठ के रूप में मायरा लेकर नानी बाई के ससुराल पहुंचे। उन्होंने इतना वैभवशाली मायरा भरा कि सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। बाद में सभी को ज्ञात हुआ कि यह स्वयं श्रीकृष्ण की लीला थी।कथा का संदेश
सच्ची भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती।
भगवान अपने भक्त की हर परिस्थिति में रक्षा करते हैं।
अहंकार और धन से बड़ा विश्वास और प्रेम होता है।
बेटी का सम्मान और परिवार की मर्यादा भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण भाग है।
विशेष महत्व
समाजसेवी व समिति सदस्य सुनील जैन ने बताया कि यह कथा विशेष रूप से राजस्थान, मालवा और गुजरात क्षेत्र में अत्यंत श्रद्धा से सुनी जाती है। कथा के दौरान भजन, मायरे के प्रसंग और श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया जाता है।
प्रसिद्ध पंक्ति:
> “ज्यो ज्यो संकट आवे भक्त पर, त्यों त्यों श्याम सहाई।”
पांच दिवसीय आयोजन में प्रतिदिन कथा से सम्बंधित सजीव चित्रण भी किया जाएगा। समिति ने सभी धर्मप्रेमी जनों से कथा में पधारने की अपील की।तैयारी बैठक में आशीष चटकेले, भूपेन्द्र सिंह चौहान, मदन भाऊ ठाकरे, रामचंद्र मौर्य,सुनील जैन, राकेश थापक, मंगलेश तोमर, वरुण अग्रवाल, शिव तिवारी, पंकज अग्रवाल, जितेंद्र मौर्य, संजय दुबे, मंगलेश शर्मा, डॉ अजय लाड़, संदेश गुप्ता, श्याम शर्मा, राकेश मालवीया, कमल नागपाल, नारायण बाहेती, अभिषेक अग्रवाल, अरुण बाहेती, पंकज शाह, कैलाश पटेल, मांगीलाल पटेल, रितेश चौहान, आनंद अग्रवाल, राजेश यादव, अभिषेक अग्रवाल, अमित पालीवाल,पंडित अमित दाधीच, पंडित चंद्रशेखर शर्मा, सर्वेश राठौर ने उपस्थित रहकर विचार रखे व कार्यो का दायित्व ग्रहण किया।बैठक का संचालन भूपेन्द्र सिंह चौहान ने किया व मंगलेश तोमर ने सभी का आभार माना।