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लद्दाख में भीषण झड़पों के बाद कर्फ्यू लागू; कस्बों में भारी सुरक्षा, 50 हिरासत में

लद्दाख में भीषण झड़पों के बाद कर्फ्यू लागू; कस्बों में भारी सुरक्षा, 50 हिरासत मे

संजीव कुमार

जम्मू, 25 सितम्बर (संजीव): बुधवार को भड़की व्यापक हिंसा में चार लोगों की मौत और 80 से अधिक घायल होने के बाद गुरुवार को हिंसा प्रभावित लेह में पुलिस व अर्धसैनिक बलों ने कर्फ्यू का सख्ती से पालन करवाया। इस दौरान कम से कम 50 लोगों को हिरासत में लिया गया।

लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर लेह एपेक्स बॉडी (LAB) द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान बुधवार को हिंसा, आगजनी और सड़क झड़पें शुरू हो गई थीं।

कड़ी निषेधाज्ञा के तहत पांच या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध अन्य प्रमुख कस्बों में भी लगाया गया है, जिनमें कारगिल भी शामिल है। यहां कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में बंद का आह्वान किया था, जो भूख हड़ताल पर बैठे थे।

लेह में हिंसक झड़पें शुरू होने के बाद वांगचुक ने अपनी पखवाड़े लंबी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी कार्यालय और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया तथा हिल काउंसिल मुख्यालय में तोड़फोड़ की, जिसके चलते शहर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू करना पड़ा।

पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “कर्फ्यू-प्रभावित इलाकों की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है।” उन्होंने बताया कि हिंसा में शामिल 50 लोगों को रातभर में हिरासत में लिया गया।

अधिकारी ने कहा कि घायलों में तीन नेपाल के नागरिक हैं और पुलिस यह जांच कर रही है कि हिंसा में कहीं विदेशी हाथ तो नहीं है।

LAB और KDA पिछले चार साल से राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। उन्होंने कई दौर की वार्ताएं केंद्र सरकार के साथ की हैं। अगला दौर 6 अक्तूबर को निर्धारित है।

अधिकारियों ने बताया कि कारगिल, जंस्कार, नुब्रा, पडम, चांगथंग, द्रास और लामायुरू में दंगारोधी साजो-सामान से लैस पुलिस व अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है।

कारगिल जिला मजिस्ट्रेट राकेश कुमार ने जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर पांच या अधिक लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस निकालने या प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।

आदेश के अनुसार, बिना अनुमति के लाउडस्पीकर, ध्वनि विस्तारक यंत्र या वाहन-माउंटेड सार्वजनिक संबोधन प्रणाली का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। साथ ही कोई भी व्यक्ति ऐसा सार्वजनिक बयान, भाषण या घोषणा नहीं करेगा जिससे शांति भंग हो, वैमनस्य फैले या कानून-व्यवस्था बिगड़े।

लेह में तनाव तब बढ़ा जब 10 सितम्बर से चल रही 35 दिन की भूख हड़ताल पर बैठे 15 में से दो लोगों को मंगलवार शाम हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद LAB की युवा शाखा ने विरोध का आह्वान किया।

केंद्र सरकार ने आरोप लगाया कि यह हिंसा कार्यकर्ता वांगचुक के “उकसाने वाले बयानों” से भड़की। उसने कहा कि कुछ “राजनीतिक उद्देश्यों वाले” लोग सरकार और लद्दाखी समूहों के बीच चल रही वार्ताओं की प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं।

गृह मंत्रालय ने बुधवार रात बयान में कहा, “सरकार लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

घटनाओं को दर्दनाक बताते हुए उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर किसी को शांतिपूर्वक बोलने का अधिकार है, लेकिन जो कुछ हुआ वह स्वतःस्फूर्त नहीं बल्कि षड्यंत्र का परिणाम था।

गुप्ता ने कहा, “कर्फ्यू एहतियाती कदम के तौर पर लगाया गया है ताकि और जनहानि न हो।”

एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक ने कहा कि त्सेरिंग आंगचुक (72) और ताशी डोलमा (60) को अस्पताल में भर्ती कराना शायद तत्काल प्रदर्शन का कारण बना।

स्थिति तेजी से बिगड़ते देख उन्होंने अपील की और घोषणा की कि वे उपवास तोड़ रहे हैं। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, “मैं लद्दाख के युवाओं से अनुरोध करता हूं कि हिंसा तुरंत बंद करें क्योंकि इससे हमारे मकसद को ही नुकसान होगा और हालात और बिगड़ेंगे। हम लद्दाख और देश में अस्थिरता नहीं चाहते।”

वांगचुक ने कहा, “यह लद्दाख और मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से सबसे दुखद दिन है क्योंकि पिछले पांच वर्षों से हम जिस राह पर चल रहे थे वह शांतिपूर्ण थी… हमने पांच बार भूख हड़ताल की, लेह से दिल्ली तक पदयात्रा की, लेकिन आज हम देख रहे हैं कि हमारा शांति का संदेश हिंसा और आगजनी की घटनाओं के कारण विफल हो रहा है।”

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