ढाका-जकार्ता की आबादी 5 करोड़ पार, New Delhi की भी बड़ी छलांग
Our World in Data और European Commission के अनुमान में 2050 तक एशिया के शहरों का दबदबा, ढाका और जकार्ता की आबादी 5 करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान

# World Largest Cities 2050: ढाका-जकार्ता सबसे आगे, नई दिल्ली भी टॉप शहरों में
**डिजिटल डेस्क।** दुनियाभर में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण आने वाले दशकों में बड़े शहरों की तस्वीर बदलने वाला है। **Our World in Data** और यूरोपीय आयोग के संयुक्त शोध केंद्र (JRC) के आंकड़ों पर आधारित अनुमानों के मुताबिक 2050 तक दुनिया के सबसे बड़े शहरों में एशिया और अफ्रीका का दबदबा और बढ़ जाएगा।
इन अनुमानों के अनुसार **ढाका और जकार्ता** 2050 तक दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में शीर्ष पर पहुंच सकते हैं। दोनों शहरों की आबादी 5 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। इसके साथ ही भारत की **नई दिल्ली** भी दुनिया के सबसे बड़े शहरी क्षेत्रों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखेगी।
## 2050 तक एशिया के शहरों का दबदबा
रिपोर्ट में बताया गया है कि 1950 में दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों की सूची में यूरोप और अमेरिका के कई शहर शामिल थे। लेकिन आने वाले दशकों में आबादी का केंद्र तेजी से एशिया और अफ्रीका की ओर बढ़ रहा है।
2050 तक दुनिया के सबसे बड़े शहरों की सूची में एशिया और अफ्रीका के शहरों का दबदबा दिखाई देने की संभावना है। यह बदलाव तेजी से हो रहे शहरीकरण, रोजगार के अवसरों और ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर बढ़ते पलायन से जुड़ा है।
## ढाका और जकार्ता की आबादी 5 करोड़ के पार
अनुमान के मुताबिक 2050 में **ढाका** और **जकार्ता** दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले शहर हो सकते हैं। दोनों शहरों की आबादी 5 करोड़ से ज्यादा पहुंचने का अनुमान है।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका पहले से ही दुनिया के तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में शामिल है। वहीं इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता भी पिछले दशकों में तेजी से फैली है। Our World in Data के अनुसार शहरों की आबादी मापने में प्रशासनिक सीमाओं के बजाय एक समान **Degree of Urbanisation** पद्धति का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे आसपास के लगातार बसे घने शहरी क्षेत्रों को भी आंकड़ों में शामिल किया जाता है।
## नई दिल्ली की भी मजबूत स्थिति
भारत की राजधानी **नई दिल्ली** भी दुनिया के सबसे बड़े शहरी क्षेत्रों में बनी रहेगी। मौजूदा आंकड़ों में भी दिल्ली दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में शामिल है और 2050 तक भारत के बड़े शहरों की आबादी में और बढ़ोतरी की उम्मीद है।
भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले वर्षों में मुंबई, कोलकाता और दूसरे बड़े शहरों की आबादी में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार 2050 तक भारत में शहरी आबादी में करीब **41.6 करोड़** लोगों की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे देश के महानगरों पर आवास, परिवहन, पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं का दबाव और बढ़ सकता है।
## शहरों की बढ़ती आबादी से बढ़ेंगी चुनौतियां
बढ़ती शहरी आबादी आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा कर सकती है, लेकिन इसके साथ कई बड़ी चुनौतियां भी सामने आएंगी। शहरों को बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त आवास, सड़कें, सार्वजनिक परिवहन, पेयजल, सीवरेज और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।
तेजी से बढ़ते शहरों में प्रदूषण, ट्रैफिक, जल संकट और अनियोजित शहरी विस्तार जैसी समस्याएं भी गंभीर हो सकती हैं। ढाका जैसे शहरों में तेजी से हो रहा शहरी विस्तार इन चुनौतियों का उदाहरण है। हालिया शोध में ढाका क्षेत्र में 2019 से 2024 के बीच निर्मित शहरी क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है।
## बदल रहा है दुनिया के शहरों का नक्शा
2050 की तस्वीर यह संकेत देती है कि दुनिया के सबसे बड़े शहरों का केंद्र पारंपरिक पश्चिमी महानगरों से हटकर एशिया और अफ्रीका की ओर बढ़ रहा है। आबादी के इस बदलाव के साथ इन शहरों का वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास में महत्व भी बढ़ेगा।
हालांकि, किसी शहर की अनुमानित आबादी इस बात पर निर्भर करती है कि **’शहर’** की सीमा कैसे तय की जाती है। अलग-अलग संस्थाओं की परिभाषाओं और मॉडल के कारण आंकड़ों में अंतर हो सकता है। Our World in Data और यूरोपीय आयोग का डेटा शहरों को घनी आबादी वाले लगातार बसे क्षेत्रों के आधार पर मापता है।
इसलिए 2050 की रैंकिंग को निश्चित संख्या के बजाय **जनसंख्या वृद्धि की संभावित दिशा और शहरीकरण के बड़े ट्रेंड** के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा।
