उत्तर प्रदेश

यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का सरप्राइज दांव, 3 उम्मीदवार उतारने का फैसला; समझें 37 वोट का गणित

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान, सपा दो सीटों के साथ तीसरे उम्मीदवार को भी मैदान में उतारने की तैयारी में जुटी है।

### यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का सरप्राइज दांव, 3 उम्मीदवार उतारने का फैसला; समझें 37 वोट का गणित

**लखनऊ:** उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। मंगलवार, 29 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई और पहले ही दिन भारतीय जनता पार्टी ने आठ, जबकि समाजवादी पार्टी ने तीन नामांकन पत्र खरीदे। राज्यसभा की इन 10 सीटों पर मतदान 16 अक्टूबर को होगा।

सपा के तीन नामांकन पत्र खरीदने से साफ है कि पार्टी दो सीटों से आगे बढ़कर तीसरी सीट के लिए भी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। हालांकि, सभी तीन प्रत्याशियों के नाम अभी एक साथ आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं। सपा की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव की उम्मीदवारी पर सहमति की बात सामने आई है, जबकि बाकी नामों को लेकर मंथन जारी है।

### 10 सीटों पर हो रहा है चुनाव

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। इनमें आठ सीटें बीजेपी, एक सीट समाजवादी पार्टी और एक सीट बहुजन समाज पार्टी के मौजूदा सदस्यों की है। बसपा के पास वर्तमान विधानसभा संख्या के हिसाब से अपनी सीट बरकरार रखने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं।

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर 16 अक्टूबर को मतदान होगा और उसी दिन मतगणना भी की जाएगी।

### 37 वोट का क्या है गणित?

उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों में इस समय छह सीटें खाली हैं, इसलिए प्रभावी विधानसभा संख्या 397 है। मौजूदा गणित के मुताबिक राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट जरूरी हैं।

इसी गणित के आधार पर बीजेपी नेतृत्व वाला गठबंधन सात सीटों की स्थिति में है, जबकि सपा अपने मौजूदा समर्थन के आधार पर दो सीटें जीतने की स्थिति में है। ऐसे में 10वीं सीट के लिए अतिरिक्त वोटों का इंतजाम सबसे अहम हो जाता है।

### सपा के सामने तीसरी सीट की चुनौती

सपा के लिए दो सीटें निकालना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है, लेकिन तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए पार्टी को अपने मौजूदा संख्या बल से बाहर समर्थन जुटाना होगा। हालिया रिपोर्टों में सपा के पास तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाने की रणनीति पर चर्चा का उल्लेख है।

सपा की विधायक दल की बैठक में तीसरा प्रत्याशी उतारने को लेकर फैसला होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद पार्टी ने तीन नामांकन पत्र खरीदे। सपा नेता शाहिद मंजूर के मुताबिक, एक फॉर्म रामगोपाल यादव के लिए लिया गया है, जबकि दो अन्य उम्मीदवारों के नाम जल्द सामने आने की बात कही गई है।

### किन नामों पर चर्चा?

रामगोपाल यादव के अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन तथा सलीम इकबाल शेरवानी के नाम चर्चा में बताए गए हैं। हालांकि, नामांकन दाखिल होने तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची को लेकर स्थिति बदल सकती है। इसलिए फिलहाल इन नामों को संभावित दावेदारों के रूप में ही देखा जा रहा है।

सपा के सामने एक तरफ पार्टी के मौजूदा विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने का सवाल है। पार्टी छोटे दलों और दूसरे विधायकों के समर्थन की संभावनाओं पर भी नजर रख सकती है।

### 2024 के राज्यसभा चुनाव की याद क्यों?

यूपी में राज्यसभा चुनाव के दौरान अतिरिक्त सीट को लेकर 2024 का चुनाव भी चर्चा में है। उस समय बीजेपी ने संजय सेठ को मैदान में उतारा था और क्रॉस वोटिंग के बाद उन्होंने सपा के उम्मीदवार आलोक रंजन को हरा दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक उस चुनाव में सपा के सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी।

इस बार सपा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारकर उसी तरह के मुकाबले की स्थिति बनने की संभावना तलाश रही है। हालांकि मौजूदा विधानसभा संख्या और राजनीतिक समीकरण 2024 से अलग हैं, इसलिए दोनों चुनावों के आंकड़ों को सीधे समान नहीं माना जा सकता।

### बीजेपी के सामने भी अतिरिक्त सीट का गणित

मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी नेतृत्व वाला गठबंधन सात सीटें जीतने की स्थिति में है। आठवीं सीट के लिए उसे भी अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। इस वजह से राज्यसभा की 10वीं सीट के साथ-साथ आठवीं सीट के लिए भी राजनीतिक संपर्क और समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो सकती है।

वहीं सपा के लिए तीसरी सीट हासिल करने की कोशिश का मतलब है कि उसे अपने मौजूदा वोटों के अलावा दूसरे विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। यही वजह है कि नामांकन शुरू होते ही राज्यसभा चुनाव का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

### 16 अक्टूबर को होगा फैसला

फिलहाल चुनावी तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद और साफ होगी। 6 अक्टूबर तक उम्मीदवार पर्चा दाखिल कर सकते हैं और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि कितने उम्मीदवार मैदान में हैं और क्या सभी 10 सीटों के लिए मतदान की नौबत आती है।

अगर सपा तीसरे उम्मीदवार के साथ चुनाव में बनी रहती है, तो उसके लिए सबसे बड़ा सवाल 37 वोट के आंकड़े तक पहुंचने का होगा। वहीं बीजेपी नेतृत्व वाला गठबंधन भी अपनी अतिरिक्त सीट के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश करेगा। 16 अक्टूबर का मतदान यूपी विधानसभा के मौजूदा संख्या बल और विभिन्न दलों के बीच समर्थन के समीकरणों की परीक्षा साबित होगा।

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