वाराणसी में 308 पहियों वाले ‘महाबली’ ट्रक का क्रेज, 164 टन का रिएक्टर देखने उमड़ी भीड़
वाराणसी में 308 पहियों वाला ‘बाहुबली’ ट्रेलर बना आकर्षण, बेल्जियम से 164 टन का रिएक्टर लेकर लखीमपुर जा रहा काफिला

# वाराणसी में 308 पहियों वाले ‘महाबली’ ट्रक का क्रेज, 164 टन का रिएक्टर लेकर जा रहा काफिला
वाराणसी में इन दिनों 308 पहियों वाला विशालकाय ट्रेलर लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बेल्जियम से एक भारी-भरकम रिएक्टर लेकर लखीमपुर खीरी जा रहे इस ‘महाबली’ ट्रक को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से भी लोग पहुंच रहे हैं। मंगलवार को एक महिला भी महज 5 रुपये का टोटो किराया देकर इस विशाल ट्रेलर को देखने पहुंची।
## कच्चे रास्ते में धंसा 308 पहियों वाला ट्रेलर
विशाल ट्रेलर मंगलवार शाम वाराणसी के लंका टोल प्लाजा के पास पहुंचा था। इसके आगे जाने के लिए डाफी टोल प्लाजा के आसपास वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया था। लेकिन भारी वाहन का वजन अधिक होने के कारण रास्ते का एक हिस्सा उसके दबाव में धंस गया।
ट्रेलर को बाहर निकालने के लिए तकनीकी टीमों को लगाया गया। पीछे की तरफ लोहे की चादरें बिछाकर रास्ता मजबूत करने और भारी मशीनों की मदद से वाहन को आगे बढ़ाने की तैयारी की गई। मौके पर दो ट्रेलर, क्रेन और अन्य मशीनें भी काफिले के साथ मौजूद हैं।
## चंदौली में भी कई दिन रुका था काफिला
यह विशाल काफिला ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश में दाखिल हुआ। 25 सितंबर को चंदौली पहुंचने के बाद ऊंचाई और चौड़ाई से जुड़ी बाधाओं के कारण ट्रेलर करीब चार दिनों तक वहीं रुका रहा।
रास्ते में वैकल्पिक मार्ग तैयार करने और संबंधित विभागों से अनुमति लेने के बाद इसे वाराणसी की ओर रवाना किया गया। वाहन के विशाल आकार के कारण इसकी रफ्तार सामान्य ट्रकों की तुलना में काफी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, चंदौली में चार दिनों में यह काफिला करीब 20 से 25 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाया था।
## रास्ते में हटाने पड़ रहे फुटब्रिज
308 पहियों वाले इस ट्रेलर की ऊंचाई और चौड़ाई के कारण वाराणसी में कई जगह रास्ता तैयार करना पड़ रहा है। इसके सुरक्षित आवागमन के लिए करीब छह फुटब्रिज हटाने की चुनौती सामने आई है।
जहां सड़क संकरी है, वहां वैकल्पिक रास्ते बनाए जा रहे हैं। बिजली के तार, खंभे और दूसरी ऊंचाई वाली संरचनाएं भी ट्रेलर के रास्ते में बाधा बन रही हैं। इस पूरे अभियान में ट्रैफिक पुलिस, प्रशासन, एनएचएआई और तकनीकी टीमों के बीच समन्वय किया जा रहा है।
## ट्रेलर देखने पहुंच रहे लोग
308 पहियों वाला इतना बड़ा ट्रेलर इलाके के लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। ट्रेलर जहां रुकता है, वहां लोगों की भीड़ जमा हो रही है। कई लोग इसके साथ सेल्फी ले रहे हैं और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।
Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला भी इसे देखने के लिए टोटो से पहुंची और इसके लिए सिर्फ 5 रुपये किराया दिया। विशाल वाहन को देखने के लिए लोगों में उत्सुकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दूर-दराज से भी लोग मौके पर पहुंच रहे हैं।
## रिएक्टर से बनेगा प्लास्टिक का विकल्प
इस पूरे सफर की खास वजह सिर्फ 308 पहियों वाला ट्रेलर नहीं है। इस पर लदा विशाल रिएक्टर लखीमपुर खीरी की कुम्भी स्थित बलरामपुर चीनी मिल में प्रस्तावित पॉलीलैक्टिक एसिड यानी PLA परियोजना के लिए लाया जा रहा है।
इस परियोजना में चीनी के दानों से PLA तैयार करने की योजना है। PLA को प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे बायोडिग्रेडेबल सामग्री के रूप में जाना जाता है। परियोजना के लिए बेल्जियम से मंगाया गया यह भारी उपकरण समुद्री और सड़क मार्ग से लंबा सफर तय करके उत्तर प्रदेश पहुंचा है।
## लखीमपुर तक पहुंचने में लग सकता है समय
विशाल वाहन को उसके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए पूरे रूट पर लगातार तैयारियां की जा रही हैं। लॉजिस्टिक्स टीम को सड़क की चौड़ाई, पुलों, फुटब्रिज और अन्य संरचनाओं को लेकर अलग-अलग जगहों पर व्यवस्था करनी पड़ रही है।
काफिले को वाराणसी से आगे गाजीपुर, गोरखपुर और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के रास्ते लखीमपुर खीरी की ओर ले जाने की योजना बताई गई है। लॉजिस्टिक्स टीम के अनुसार, परिस्थितियों के आधार पर इसे गंतव्य तक पहुंचने में दो से तीन सप्ताह और लग सकते हैं।
फिलहाल वाराणसी में 308 पहियों वाला यह ‘महाबली’ ट्रेलर अपने आकार और इसके साथ चल रहे भारी-भरकम उपकरणों की वजह से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, इसे सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाना प्रशासन और तकनीकी टीमों के लिए बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती बना हुआ है।
