राजस्थान के गांवों और हुनर की कहानी लेकर निकली Art Car, 20 दिन में तय किए 3,500 KM का सफर
राजस्थान के गांवों, लोककला और कारीगरों की अनकही कहानियां सामने लाने के लिए Art Car ने 20 दिनों में 3,500 किलोमीटर से ज्यादा का सफर किया

# राजस्थान के गांवों और हुनर की कहानी लेकर निकली Art Car, 20 दिन में तय किए 3,500 KM का सफर
**जयपुर:** राजस्थान का नाम आते ही आमतौर पर किले, महल, रेगिस्तान, ऊंट और रंग-बिरंगे परिधानों की तस्वीर सामने आती है। लेकिन राजस्थान की पहचान सिर्फ उसके मशहूर पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। राज्य के गांवों, कारीगरों, लोककलाओं और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं में भी इसकी एक अलग कहानी छिपी है। इसी अनदेखे राजस्थान को सामने लाने के लिए निकली **Art Car** ने करीब 20 दिनों में 3,500 किलोमीटर से ज्यादा का सफर पूरा किया।
यह यात्रा ‘कार्टिस्ट’ की **‘Stories of Indian Cities’** पहल के राजस्थान चैप्टर के तहत की गई। इसका मकसद राजस्थान को केवल किलों और महलों के जरिए नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों, उनके हुनर, पारंपरिक व्यवसाय, कला और रोजमर्रा की जिंदगी के जरिए समझना और दस्तावेजीकृत करना था।
## जयपुर से शुरू हुआ सफर
राजस्थान चैप्टर की शुरुआत 4 सितंबर को जयपुर से हुई थी। विशेष रूप से तैयार की गई Art Car के साथ टीम ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया। करीब 20 दिनों के दौरान टीम ने **45 से ज्यादा स्थानों** को कवर किया और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी कहानियों को कैमरे में दर्ज किया।
इस सफर में मंडावा, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, जवाई, रणकपुर, नाथद्वारा, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बूंदी, कोटा, भरतपुर, डीग और अलवर समेत कई इलाकों को शामिल किया गया।
## कहीं लोककला तो कहीं पीढ़ियों पुराना हुनर
Art Car की यात्रा के दौरान टीम ने स्थानीय समुदायों और कारीगरों के जीवन को करीब से समझने की कोशिश की। कहीं लोककला देखने को मिली तो कहीं हस्तशिल्प की ऐसी परंपराएं सामने आईं, जिन्हें परिवारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया जा रहा है।
बाड़मेर में पारंपरिक पैचवर्क और स्थानीय कढ़ाई जैसी कलाओं को भी दस्तावेजीकृत किया गया। इसके अलावा टीम ने पारंपरिक व्यवसायों, खान-पान की परंपराओं और ग्रामीण जीवन से जुड़े कई पहलुओं को भी रिकॉर्ड किया।
## राजघरानों से भी की बातचीत
राजस्थान का इतिहास राजघरानों के बिना पूरा नहीं माना जाता। इसी को ध्यान में रखते हुए अभियान के दौरान अलग-अलग राजघरानों के सदस्यों से भी बातचीत की गई। इसके साथ ही उन स्थानीय लोगों तक पहुंचने की कोशिश की गई, जिनकी रोजमर्रा की जिंदगी और पारंपरिक काम राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं।
इस यात्रा का फोकस केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर नहीं रहा, बल्कि उन जगहों और लोगों पर भी रहा, जो आमतौर पर पर्यटन की मुख्य तस्वीर में दिखाई नहीं देते।
## ‘सिर्फ 3,500 किलोमीटर की यात्रा नहीं थी’
कार्टिस्ट के संस्थापक **हिमांशु जांगिड़** के मुताबिक, राजस्थान का यह सफर केवल 3,500 किलोमीटर की दूरी तय करने का अभियान नहीं था। यह लोगों के बीच जाकर उनके जीवन और उनकी कहानियों को समझने की कोशिश थी।
उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान राजस्थान को अलग-अलग नजरियों से देखने और राज्य के विभिन्न हिस्सों के लोगों से संवाद करने का अवसर मिला। यात्रा के दौरान जुटाई गई सामग्री को तस्वीरों और वीडियो के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा।
## जयपुर में पूरा हुआ राजस्थान चैप्टर
करीब 20 दिनों के सफर के बाद राजस्थान चैप्टर 23 सितंबर को जयपुर में पूरा हुआ। यात्रा का समापन अल्बर्ट हॉल संग्रहालय के बाहर किया गया। इस दौरान टीम ने राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों से जुटाई गई कला, संस्कृति और लोकजीवन से जुड़ी कहानियों को एक व्यापक दस्तावेज का हिस्सा बनाया।
यह पहल राजस्थान को एक अलग नजरिए से देखने की कोशिश है—जहां किले और महल तो हैं ही, लेकिन उनके साथ गांवों का जीवन, कारीगरों का हुनर, लोककलाएं, पारंपरिक खान-पान और पीढ़ियों से चली आ रही जीवित परंपराएं भी राज्य की पहचान बनाती हैं।
## आगे दूसरे राज्यों का सफर
राजस्थान चैप्टर पूरा होने के बाद **‘Stories of Indian Cities’** पहल का सफर आगे दूसरे राज्यों और शहरों की ओर बढ़ेगा। अभियान का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय कहानियों, कला, संस्कृति और लोगों के जीवन को दस्तावेजीकृत करना है।



