उत्तर प्रदेश

UP Panchayat Election 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, तीन महीने में कराने होंगे पंचायत चुनाव

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यूपी पंचायत चुनाव पर बड़ा फैसला, राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश, OBC आरक्षण की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल।

# UP Panchayat Election 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, तीन महीने में कराने होंगे पंचायत चुनाव

**लखनऊ/प्रयागराज:** उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर हलचल तेज हो गई है। कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।

यह मामला पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने और निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय किया जाए, ताकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार चुनाव कराए जा सकें।

## तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश

न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने पंचायत चुनाव से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव की पूरी समय-सारिणी तैयार करने और उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की अपेक्षा जताई है।

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव होते हैं। इन चुनावों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय प्रतिनिधियों का चयन किया जाता है।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, चुनाव कराने की प्रक्रिया को अब निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़ाना होगा। इससे पंचायत चुनाव की तारीखों, आरक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर सरकार तथा निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

## OBC आरक्षण बना चुनाव में देरी की बड़ी वजह

पंचायत चुनाव में देरी का एक प्रमुख कारण अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण निर्धारित करने की प्रक्रिया है। राज्य सरकार ने OBC आयोग का गठन किया था, जिसका उद्देश्य पिछड़े वर्गों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति से संबंधित आंकड़ों का अध्ययन करना और आरक्षण के लिए जरूरी आधार तैयार करना है।

आरक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण पंचायत की सीटों का आरक्षण तय करने में देरी हुई है। इसी मुद्दे पर अदालत ने आयोग के सर्वे और आंकड़ों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि OBC आयोग अपना काम जारी रख सकता है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया को आयोग के काम के अनिश्चितकाल तक लंबित रहने के आधार पर नहीं रोका जा सकता। अदालत के निर्देशों के मुताबिक, मौजूदा नियमों और OBC आरक्षण के 27 प्रतिशत प्रावधान को ध्यान में रखते हुए चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।
## निवर्तमान ग्राम प्रधान बने रहेंगे प्रशासक

ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत में याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि चुनाव होने तक मौजूदा ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे। यानी चुनाव संपन्न होने तक गांवों में प्रशासनिक व्यवस्था इसी तरह जारी रहेगी।

इस व्यवस्था को लेकर याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि पंचायतों का कार्यकाल संवैधानिक रूप से निर्धारित है और समय पर चुनाव कराना जरूरी है।
## संविधान के अनुच्छेद 243E का दिया गया हवाला

याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 243E का हवाला देते हुए कहा कि पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक की तारीख से पांच साल का होता है। संवैधानिक व्यवस्था के तहत पंचायतों के चुनाव समय पर कराना आवश्यक है, ताकि स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था बाधित न हो।

याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव कराने के लिए विस्तृत और समयबद्ध कार्यक्रम पेश करने की मांग की गई थी। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर समयसीमा तय करते हुए इस मांग पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

## अब सरकार और निर्वाचन आयोग के सामने क्या चुनौती?

हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के सामने आरक्षण प्रक्रिया, चुनाव कार्यक्रम और अन्य जरूरी तैयारियों को निर्धारित समय में पूरा करने की चुनौती है। मतदाता सूची, सीटों का आरक्षण, चुनाव कार्यक्रम और मतदान की व्यवस्थाएं चुनाव प्रक्रिया के अहम हिस्से हैं।

इस मामले में राज्य सरकार के सामने अदालत के आदेश के अनुसार आगे बढ़ने का विकल्प है। वहीं, कानूनी चुनौती देने का निर्णय लेने पर उसे संबंधित न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेना होगा। हालांकि, आगे की रणनीति और चुनाव की सटीक तारीखों को लेकर आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार करना होगा।

फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश ने उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर समयसीमा स्पष्ट कर दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम कब जारी करता है और OBC आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया को किस तरह पूरा किया जाता है।

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