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सेवा एवं सुमिरन से मानव का कल्याण होता है*- स्वामी गोपालानन्द सरस्वती

आदित्य उपाध्याय की रिपोर्ट
*गो अभयारण्य को विश्व का पर्यटक स्थल बनाएंगे*- डॉ.विक्रम सिंह ,प्रबंध न्यासी
सुसनेर/28 अप्रैल,जनपद सुसनेर में मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य जो विगत 01 जनवरी 2023 से विश्व के लोक प्रसिद्द गो सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के संस्थापक एवं संरक्षक गो ऋषि परम श्रद्धेय पूज्य स्वामी दत्त शरणानंद जी महाराज के पावन सानिध्य एवं 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा के प्रणेता एवं श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के राष्ट्रीय संयोजक ग्वाल संत पूज्य स्वामी गोपालानन्द जी सरस्वती के मार्गदर्शन में संचालित हो रहन है और जब से गो अभयारण्य श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के माध्यम से संचालित हो रहा है तब से इस गो अभयारण्य के आस पास के क्षेत्र में निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु हर माह की अमावस्या अथवा पूर्णिमा को मासिक सत्संग एवं अभ्यारण्य व्यवस्थित रूप से संचालित हो इसके लिए संचालन मंडल की मासिक बैठक का आयोजन होता आया है ,लेकिन विगत भारतीय नूतन वर्ष विक्रम संवत् 2081 से मध्यप्रदेश शासन द्वारा सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में मनाएं गए गोवंश रक्षा वर्ष के तहत गो अभयारण्य में *एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव* के अंतर्गत *एक वर्षीय गो कृपा कथा* पूज्य स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती के मुखारविंद से हुई है,जिसका विक्रम संवत् 2082, 12 अप्रेल 2025 को विश्राम हो गया है, इसलिए पूर्व की भांति हर माह होने वाला मासिक सत्संग एवं संचालन मंडल की मासिक बैठक हर माह की अमावस्या को नियत की गई है,उसी के तहत वैशाख अमावस्या,रविवार 27 अप्रैल को गो अभयारण्य में मासिक सत्संग एवं संचालन मंडल की बैठक विकास सन्त पूज्य स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती के सानिध्य में सम्पन्न हुई ।

मासिक सत्संग को संबोधित करते पूज्य स्वामी गोपालानंद जी ने बताया कि भारत कृषि प्रधान देश रहा है और प्राचीन समय से यहां अमावस्या को कृषि एवं अन्य कार्य के लिए अवकाश रहता था और उस दिन केवल हरि भजन एवं सत्संग के आयोजन ही होते थे जिसे कुहू सत्संग के नाम से जाना जाता था लेकिन जब से भारत में मशीनरी युग आया और बेलो से खेती बंद हुई तब से अमावस्या पर निषेध कार्य भी होने लगे और धीरे धीरे कुहू सत्संग बन्द हो गए , कुहू सत्संग को पुनर्जीवित करने के लिए ही अभयारण्य में हर अमावस्या को मासिक सत्संग प्रारंभ हुआ है ।
स्वामीजी ने भगवान का नाम एवं सुमिरन के बारे में बताते हुए कहां कि जिस प्रकार शरीर संचालन के भोजन जरूरी है , उसी प्रकार सुख पूर्वक जीवन जीने के लिए सेवा एवं सुमिरन जरूरी है यानि हम भी सुखी रहें और दूसरों को भी सुखी रखें उसके लिए सेवा एवं सुमिरन जरूरी है क्योंकि सेवा से बल मिलता है और बल एवं शक्ति जहां होती है तो फिर सत्संग सहज हो जाता है और इनसे मनुष्य में। श्रेष्ठ भाव बनता है अर्थात सेवा एवं सुमिरन से भगवान पाप से बचाता है और अंत में सेवा एवं सुमिरन से ही मानव का कल्याण होता ।
स्वामीजी ने गो अभयारण्य में क्षेत्र के गरीब एवं होनहार बालकों के लिए प्रारंभ हुए श्री कामधेनु गुरुकुलम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री महोदय ने अपने जन्मदिवस पर गो अभ्यारण्य में शुभारंभ किए श्री कामधेनु गुरुकुलम का शुभारंभ कर गो अभयारण्य में कार्य करने वाले ग्वालों एवं आस पास के क्षेत्र के होनहार बालकों में संस्कार प्रदत्त शिक्षा हो इसके लिए इस वर्ष कक्षा प्रथम से पांचवीं कक्षा तक अनिवासीय एवं कक्षा छठी से आठवीं तक आवासीय विद्यालय के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारम्भ हो गई है जिसके लिए सभी गो प्रेमियों से स्वामीजी ने आह्वान किया कि अपने क्षेत्र के मेधावी बालकों को यहां प्रवेश दिलवाने में सहयोग करवाएं ।
गो अभयारण्य संचालन मंडल की मासिक बैठक में गो अभयारण्य के प्रबन्ध न्यासी डॉक्टर विक्रम सिंह जमुनिया ने गो अभयारण्य को गो पर्यटक स्थल बनाने का प्रस्ताव रखते हुए बताया कि विश्व के प्रथम गो अभयारण्य एक विश्व स्तरीय पर्यटक स्थल बने इसके लिए समाज एवं शासन के संयुक्त सहयोग से हमें प्रयास करना होगा साथ ही गो अभयारण्य में जन्मदिवस, विवाह वर्षगांठ , विवाह एवं पुण्यतिथि आदि कार्यक्रमों गो माताओं के मध्य हो इसके लिए हम सब को प्रयत्न करना चाहिए ताकि लोगों में गौमाताओं के प्रति श्रद्धा एवं विश्वास के साथ साथ लोगों में अपने परिवार में गो सेवा का भाव जगे और अंत में गोपाल परिवार संघ के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी गई

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