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रायबरेली में आदित्य हत्याकांड पर कोर्ट का बड़ा फैसला, सपा नेता समेत 14 को उम्रकैद

Raebareli District Court has sentenced 14 convicts, including former Samajwadi Party district president RP Yadav, to life imprisonment in the high-profile Aditya Pratap Singh murder case, while two accused were acquitted due to lack of sufficient evidence.

# रायबरेली आदित्य हत्याकांड: सपा नेता आरपी यादव समेत 14 को उम्रकैद, दो आरोपी बरी enter sub title here

रायबरेली के बहुचर्चित आदित्य प्रताप सिंह हत्याकांड में जिला अदालत ने करीब सात साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित पाल सिंह की अदालत ने समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी राम प्रताप यादव उर्फ आरपी यादव तथा सोमू ढाबा के संचालक सुरेश यादव समेत 14 आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सभी दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दो आरोपियों राम कृष्ण यादव उर्फ आरके और अभितेज सिंह को दोषमुक्त कर दिया गया।

## ढाबे पर विवाद के बाद हुई थी आदित्य की हत्या

मामला 9 अक्टूबर 2019 का है। महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के सिकंदरपुर निवासी डी-फार्मा छात्र आदित्य प्रताप सिंह अपने दोस्तों के साथ रायबरेली के रतापुर स्थित सोमू ढाबे पर खाना खाने पहुंचे थे। वहां बिल के भुगतान को लेकर आदित्य का ढाबा संचालक सुरेश यादव से विवाद हुआ। आरोप है कि विवाद के बाद सुरेश यादव और उसके साथियों ने आदित्य तथा उसके दोस्तों के साथ मारपीट की।

इसके बाद आदित्य बाइक से घर की ओर निकल गए। आरोप है कि हरदासपुर के पास लग्जरी वाहनों से आए हमलावरों ने उनकी बाइक को ओवरटेक किया और उनके साथ मारपीट की। गंभीर चोटों के कारण आदित्य की मौत हो गई। उनका शव अगले दिन 10 अक्टूबर को हरचंदपुर के गढ़ी खास गांव के पास सड़क किनारे मिला था। इसके बाद आदित्य के पिता प्रदीप कुमार सिंह ने हरचंदपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

## जांच में सामने आए कई नाम

पुलिस जांच के दौरान इस हत्याकांड में कई लोगों के नाम सामने आए। पुलिस ने मुख्य आरोपी सुरेश यादव समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में जांच आगे बढ़ने पर सपा के तत्कालीन पूर्व जिलाध्यक्ष राम प्रताप यादव उर्फ आरपी सिंह यादव समेत अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया।

पुलिस ने मामले में आरोपपत्र दाखिल किया और लंबे समय तक अदालत में सुनवाई चली। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह पेश किए गए। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मामले की सुनवाई जिला जज की अदालत में प्रतिदिन की गई, जिससे मुकदमे की कार्यवाही में तेजी आई।

## 14 दोषियों को उम्रकैद

अदालत ने सुरेश यादव, राम प्रताप यादव, रमेश यादव, अंकित यादव, हर्षित वर्मा, लवकुश कुमार, गयाबक्श सिंह, मानू कुमार बारी, विनोद कुमार, सुमेर उर्फ राम सुमेर, झुरहा उर्फ जयचंद, सौरभ शर्मा, अतुल तिवारी और सचिन कुमार सोनी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सभी दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।

वहीं, राम कृष्ण यादव उर्फ आरके और अभितेज सिंह को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। फैसले के बाद सभी 14 दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला जेल भेज दिया गया।

## फैसले के बाद सियासी हलचल

आदित्य प्रताप सिंह हत्याकांड का मामला शुरू से ही राजनीतिक रूप से भी चर्चित रहा है। दोषियों में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आरपी यादव का नाम होने के कारण फैसले के बाद रायबरेली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फैसला सुनाए जाने के बाद आरपी यादव के समर्थक जेल के बाहर जुटे और नारेबाजी की। आरपी यादव ने कहा कि वह फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख करेंगे।

## बहन ने कहा- लंबी लड़ाई के बाद मिला न्याय

आदित्य की बहन रुचि सिंह ने अपने भाई को न्याय मिलने पर संतोष जताया। हालांकि, दो आरोपियों के बरी होने पर उन्होंने इसे अधूरा न्याय बताया। उनके मुताबिक, मामले में 14 दोषियों को सजा मिलना परिवार के लंबे संघर्ष के बाद न्याय की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि इस मामले की सुनवाई के दौरान 13 गवाह अदालत में पेश हुए और परिवार ने लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष किया।

## आदित्य हत्याकांड की टाइमलाइन

* **9 अक्टूबर 2019:** सोमू ढाबे पर विवाद के बाद आदित्य प्रताप सिंह की हत्या।
* **10 अक्टूबर 2019:** गढ़ी खास गांव के पास आदित्य का शव बरामद।
* **25 दिसंबर 2019:** पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
* **20 जनवरी 2020:** जिला जज की अदालत में मामले की पहली सुनवाई।
* **18 अगस्त 2026:** अदालत ने 14 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और दो को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

रायबरेली के इस चर्चित हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद करीब सात साल से चल रही कानूनी लड़ाई के एक महत्वपूर्ण चरण का अंत हुआ है। हालांकि, दोषी ठहराए गए आरोपियों की ओर से उच्च अदालत में अपील की संभावना बनी हुई है।

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