यूपी के सरकारी स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का तरीका, कक्षा 1 से 12 तक डिजिटल लर्निंग पर जोर
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्रों को एनिमेटेड वीडियो, शॉर्ट्स और रील्स के जरिए पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी. कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल लर्निंग प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है.

# यूपी के सरकारी स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का तरीका, कक्षा 1 से 12 तक डिजिटल लर्निंग पर जोर
**लखनऊ:** उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का अंदाज पूरी तरह बदलने जा रहा है। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत आने वाले कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को पढ़ाई की सामग्री अब डिजिटल माध्यम से भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए एनिमेटेड वीडियो, शॉर्ट्स और रील्स जैसे आसान और आकर्षक फॉर्मेट का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस डिजिटल लर्निंग प्रोजेक्ट का उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई से जोड़ना और कठिन विषयों को सरल एवं रोचक तरीके से समझाना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि डिजिटल कंटेंट के जरिए विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री आसानी से समझने और दोहराने में मदद मिलेगी।
## डिजिटल लर्निंग प्रोजेक्ट की शुरुआत
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की पहल पर यह डिजिटल लर्निंग प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित डिजिटल स्टडी मैटेरियल तैयार किया जाएगा।
इसमें विषयों को समझाने के लिए एनिमेटेड वीडियो और छोटे वीडियो बनाए जाएंगे। खासतौर पर ऐसे विषयों पर ध्यान दिया जाएगा जिन्हें छात्रों के लिए सामान्य कक्षा में समझना मुश्किल होता है।
डिजिटल सामग्री को इस तरह तैयार करने की कोशिश की जाएगी कि विद्यार्थी उसे स्कूल के अलावा घर पर भी देख सकें और अपनी सुविधा के अनुसार किसी पाठ को दोबारा समझ सकें।
## YouTube और Facebook पर मिलेगी स्टडी सामग्री
छात्रों तक डिजिटल स्टडी सामग्री आसानी से पहुंचाने के लिए स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी यानी **SIET** अपना नया YouTube चैनल और Facebook पेज शुरू करने जा रहा है।
इन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छात्रों के लिए पाठ्यक्रम से संबंधित वीडियो सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। छोटे वीडियो और एनिमेटेड कंटेंट के जरिए विद्यार्थियों को विषयों की जानकारी सरल भाषा में देने का प्रयास होगा।
इस पहल से उन छात्रों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है, जो किसी विषय को पहली बार में पूरी तरह नहीं समझ पाते हैं। वे उपलब्ध वीडियो को अपनी सुविधा के अनुसार दोबारा देख सकेंगे।
## कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों पर फोकस
डिजिटल लर्निंग प्रोजेक्ट का दायरा प्राथमिक स्तर से लेकर माध्यमिक स्तर तक रखा गया है। यानी कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सकेगा।
छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए एनिमेशन और विजुअल कंटेंट का इस्तेमाल अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है, जबकि बड़ी कक्षाओं के छात्रों के लिए विषयवार और परीक्षा उपयोगी सामग्री तैयार की जाएगी।
इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल संसाधनों से जोड़ना और पढ़ाई को अधिक इंटरैक्टिव बनाना है।
## पढ़ाई को आसान और रोचक बनाने की कोशिश
शिक्षा विभाग का फोकस केवल वीडियो उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। डिजिटल कंटेंट के जरिए पढ़ाई को ज्यादा आसान, रोचक और समझने योग्य बनाने की कोशिश की जा रही है।
कई बार छात्रों को किताबों में दिए गए किसी विषय को समझने में परेशानी होती है। ऐसे में एनिमेशन, चित्र और छोटे वीडियो उस विषय को व्यावहारिक तरीके से समझाने में मदद कर सकते हैं।
शॉर्ट वीडियो फॉर्मेट का इस्तेमाल इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बच्चे मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छोटे वीडियो देखने के आदी हैं। इसी माध्यम को शिक्षा के लिए उपयोगी बनाने की कोशिश की जा रही है।
## शिक्षकों के लिए भी उपयोगी हो सकती है पहल
डिजिटल स्टडी सामग्री का इस्तेमाल केवल छात्र ही नहीं, बल्कि शिक्षक भी कर सकते हैं। शिक्षक कक्षा में किसी कठिन विषय को समझाने के लिए संबंधित डिजिटल सामग्री का सहारा ले सकते हैं।
इससे पारंपरिक पढ़ाई के साथ डिजिटल संसाधनों को जोड़ने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में डिजिटल सामग्री का दायरा बढ़ने पर अलग-अलग कक्षाओं और विषयों के लिए ज्यादा कंटेंट उपलब्ध कराया जा सकता है।
## सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा
उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका मकसद छात्रों को तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना है।
YouTube और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए स्टडी कंटेंट उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को स्कूल के बाहर भी पढ़ाई जारी रखने का विकल्प मिलेगा। खासकर ऐसे छात्र जो किसी पाठ को दोहराकर समझना चाहते हैं, उनके लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है।
डिजिटल लर्निंग प्रोजेक्ट के विस्तार के साथ सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का तरीका और अधिक तकनीक आधारित होने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किस तरह की सामग्री उपलब्ध कराई जाती है और छात्र उसका कितना लाभ उठा पाते हैं।


