राज्य

मालदीव का थिलाफुशी पोर्ट प्रोजेक्ट चीन को, भारत से रिश्ते मजबूत करने के बीच बीजिंग पर भी भरोसा

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भारत समर्थित थिलामाले ब्रिज को दोनों देशों की दोस्ती का प्रतीक बता रहे हैं, लेकिन थिलाफुशी पोर्ट का ठेका चीनी कंपनी CHEC को मिलने से साफ है कि माले भारत के साथ संबंधों के साथ चीन से भी करीबी बनाए हुए है।

# भारत से रिश्ते मजबूत, फिर भी चीन के करीब मालदीव! थिलाफुशी पोर्ट का चीनी कंपनी को ठेका

**नई दिल्ली:** मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत समर्थित थिलामाले ब्रिज को भारत और मालदीव के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों और सहयोग का प्रतीक बताया है। हालांकि, इसी बीच मालदीव के थिलाफुशी पोर्ट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का ठेका चीन की कंपनी को दिया जाना दोनों देशों की विदेश नीति को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

एक तरफ माले भारत के साथ कनेक्टिविटी और सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में चीन के साथ भी साझेदारी जारी रखे हुए है। इससे संकेत मिलता है कि मालदीव भारत के साथ संबंध सुधारने के बावजूद चीन से दूरी बनाने के मूड में नहीं है।

## थिलाफुशी पोर्ट का चीनी कंपनी को ठेका

फरवरी 2026 में मालदीव पोर्ट्स लिमिटेड (MPL) ने घोषणा की थी कि चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी (CHEC) को थिलाफुशी पोर्ट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है।

इस परियोजना के तहत थिलाफुशी में एक आधुनिक कमर्शियल पोर्ट विकसित करने की योजना है। मालदीव के लिए यह प्रोजेक्ट काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए देश की समुद्री और कारोबारी गतिविधियों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है।

## क्या है थिलाफुशी पोर्ट प्लान?

थिलाफुशी मालदीव की राजधानी माले के पश्चिम में स्थित एक आर्टिफिशियल आइलैंड है। इसे 1991 में नगर निगम के कचरा निपटान स्थल के रूप में विकसित किया गया था। समय के साथ यह इलाका औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण स्थान बन गया।

मालदीव अब यहां बड़े स्तर पर कमर्शियल पोर्ट विकसित करने की योजना बना रहा है। इसका मकसद समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी गतिविधियों को एक व्यवस्थित स्थान पर लाना है।

## माले से थिलाफुशी शिफ्ट होगी पोर्ट गतिविधियां

मालदीव की योजना मुख्य बिजनेस पोर्ट से जुड़ी गतिविधियों को माले के माफान्नु इलाके से थिलाफुशी ले जाने की भी है।

राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने फरवरी में इस स्थानांतरण को लेकर अपनी सरकार की योजना का उल्लेख किया था। थिलाफुशी में पोर्ट विकसित होने के बाद व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक बड़ा और अधिक व्यवस्थित समुद्री केंद्र तैयार करने की कोशिश की जाएगी।

इससे राजधानी माले पर मौजूद दबाव को कम करने और मालदीव की कारोबारी गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

## भारत के साथ भी बढ़ रही है कनेक्टिविटी

मालदीव और भारत के रिश्तों में भी हाल के समय में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। भारत समर्थित थिलामाले ब्रिज इसका प्रमुख उदाहरण है।

राष्ट्रपति मुइज्जू ने थिलामाले ब्रिज को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों का प्रतीक बताया है। यह परियोजना माले क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

भारत और मालदीव के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और विकास से जुड़े सहयोग को दोनों देशों के रिश्तों का अहम हिस्सा माना जाता है।

## चीन से दूरी नहीं बना रहा माले

हालांकि, थिलाफुशी पोर्ट प्रोजेक्ट का ठेका चीनी कंपनी CHEC को मिलना यह संकेत देता है कि भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के बावजूद मालदीव चीन के साथ भी अपने आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर संबंध जारी रखना चाहता है।

मालदीव हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। ऐसे में भारत और चीन दोनों की नजरें मालदीव के इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्री परियोजनाओं पर रहती हैं।

माले के लिए दोनों देशों के साथ संबंधों को संतुलित रखना आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। एक ओर भारत उसके लिए पड़ोसी और महत्वपूर्ण विकास साझेदार है, तो दूसरी ओर चीन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश और निर्माण क्षमता के जरिए अपनी मौजूदगी बनाए हुए है।

## भारत-चीन के बीच संतुलन की कोशिश?

मालदीव की मौजूदा नीति को भारत और चीन के बीच संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। थिलामाले ब्रिज जैसे भारत समर्थित प्रोजेक्ट भारत के साथ सहयोग को दर्शाते हैं, जबकि थिलाफुशी पोर्ट में चीनी कंपनी की भागीदारी चीन के साथ जारी आर्थिक संबंधों को दिखाती है।

आने वाले समय में थिलाफुशी पोर्ट प्रोजेक्ट और मालदीव की अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं कि माले भारत और चीन के साथ अपने संबंधों को किस तरह आगे बढ़ाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button