बेल्जियम से आई विशाल मशीन लेकर चंदौली पहुंचा 308 पहियों वाला महाबली ट्रक, 2-3 हफ्ते में लखीमपुर पहुंचेगा
बेल्जियम से समुद्री रास्ते ओडिशा पहुंची बायो पॉलीमर प्लांट की विशाल मशीन 308 पहियों वाले महाबली ट्रक से लखीमपुर ले जाई जा रही है, लेकिन चंदौली में संकरे रास्ते और ऊंचाई की बाधाओं के चलते ट्रक रुक गया है।

बेल्जियम से यूपी पहुंची विशाल मशीन, 308 पहियों वाला महाबली ट्रक चंदौली में रुका; 2-3 हफ्ते में लखीमपुर पहुंचेगा
उत्तर प्रदेश के चंदौली में इन दिनों 308 पहियों वाला विशालकाय ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए भारत पहुंची बायो पॉलीमर प्लांट की भारी-भरकम मशीन को यह महाबली ट्रक लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित प्लांट तक लेकर जा रहा है। चंदौली में संकरा रास्ता, ऊंचाई और चौड़ाई से जुड़ी बाधाओं के कारण यह ट्रक पिछले तीन दिनों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास नेशनल हाईवे-19 के रिंग रोड पर रुका हुआ है।
बेल्जियम से समुद्र के रास्ते ओडिशा पहुंची मशीन
जानकारी के मुताबिक, यह विशाल मशीन अप्रैल 2026 में बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए रवाना हुई थी। करीब एक महीने के सफर के बाद यह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची। वहां जरूरी कागजी कार्रवाई और क्लीयरेंस में एक महीने से ज्यादा समय लगा। इसके बाद मशीन को विशेष 308 पहियों वाले हाइड्रोलिक ट्रक पर लादकर सड़क मार्ग से लखीमपुर के लिए रवाना किया गया।
यह भारी-भरकम उपकरण लखीमपुर खीरी के कुंभी में तैयार किए जा रहे बायोप्लास्टिक/बायो पॉलीमर प्लांट में इस्तेमाल किया जाना है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रक करीब 200 टन वजनी औद्योगिक वेसल को लेकर चल रहा है।
ओडिशा से झारखंड-बिहार होते हुए यूपी पहुंचा
पारादीप बंदरगाह से निकलने के बाद महाबली ट्रक झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश में दाखिल हुआ। रास्ते में कई जगह ओवरब्रिज, फुटओवर ब्रिज, बिजली के तार, पोल और संकरी सड़कों जैसी चुनौतियां सामने आईं। इन्हें दूर करने के लिए संबंधित विभागों और लॉजिस्टिक टीम को विशेष इंतजाम करने पड़े।
कई स्थानों पर ट्रक को निकालने के लिए जेसीबी और क्रेन की मदद ली गई। कुछ जगह फुटओवर ब्रिज के हिस्सों को उठाकर रास्ता बनाया गया, ताकि इतना ऊंचा और चौड़ा ट्रक मशीन के साथ सुरक्षित तरीके से गुजर सके।
चंदौली में क्यों रुका 308 पहियों वाला ट्रक?
चंदौली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास रिंग रोड पर आगे का रास्ता पर्याप्त चौड़ा और साफ नहीं मिलने के कारण ट्रक को रोकना पड़ा। लॉजिस्टिक टीम के प्रबंधक अनेक भारती के मुताबिक, रास्ते में ऊंचाई और चौड़ाई से जुड़ी कई बाधाएं हैं। संबंधित विभागों की अनुमति लेकर इन्हें हटाने और रास्ता तैयार करने का काम किया जा रहा है।
रूट को क्लियर करने के लिए जेसीबी मशीनों से नया रास्ता तैयार किया जा रहा है। इससे पहले भी यात्रा के दौरान कई अवरोधों को हटाकर ट्रक को आगे बढ़ाया गया है।
तीन हफ्ते में लखीमपुर पहुंचने की उम्मीद
लॉजिस्टिक टीम के अनुसार, इस विशालकाय ट्रक को अपनी मंजिल तक पहुंचने में अभी करीब दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है। अत्यधिक वजन और आकार के कारण इसकी रफ्तार सामान्य ट्रकों की तुलना में काफी कम है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रक कई जगहों पर एक दिन में लगभग 10 से 12 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पा रहा है।
लखीमपुर पहुंचने के बाद इस मशीन को कुंभी में स्थापित किए जा रहे बायोप्लास्टिक प्लांट में लगाया जाएगा।
ट्रक देखने के लिए उमड़ी भीड़
जैसे ही 308 पहियों वाला यह महाबली ट्रक चंदौली पहुंचा, उसे देखने के लिए आसपास के गांवों और दूर-दराज के इलाकों से लोग पहुंचने लगे। लोगों ने ट्रक और उस पर लदी विशाल मशीन के साथ सेल्फी ली और वीडियो बनाए। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस की तैनाती भी की गई। स्थानीय लोगों के लिए इतने बड़े आकार के ट्रक को सड़क पर चलते देखना अपने आप में अलग अनुभव रहा।
मरीन इंजीनियर भी पहुंचे देखने
पास के गांव के रहने वाले मरीन इंजीनियर संजय यादव भी इस विशाल ट्रक को देखने पहुंचे। उन्होंने बताया कि जहाजों पर इससे बड़े सामान देखने को मिलते हैं, लेकिन समुद्री मार्ग के बाद सड़क के रास्ते इतनी विशाल मशीन को ले जाते देखना बेहद दिलचस्प है।
308 पहियों वाला यह महाबली ट्रक फिलहाल चंदौली में रास्ता साफ होने का इंतजार कर रहा है। रूट की बाधाएं दूर होने के बाद इसे लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित प्लांट की ओर रवाना किया जाएगा।



