उत्तर प्रदेश

पीयूष गोयल का बड़ा बयान: कोरोना संकट में भारत की मदद को कोई देश नहीं आया, हमने सबकी सहायता की

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में केंद्रीय मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर उठाए सवाल, बोले- भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान दूसरों की मदद की, लेकिन संकट में उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिला

# कोविड-19 संकट पर पीयूष गोयल का बड़ा बयान, बोले- भारत ने सबकी मदद की, लेकिन संकट में साथ देने कोई नहीं आया

**नई दिल्ली:** केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत को मिले अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर बड़ा बयान दिया है। नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के समय भारत जैसे 1.4 अरब आबादी वाले देश को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक, उस मुश्किल दौर में भारत ने दूसरे देशों की मदद की, लेकिन जब भारत को सहायता की जरूरत थी, तब उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।

## भारत ने मुश्किल दौर में की दूसरे देशों की मदद

पीयूष गोयल ने महामारी के दौरान भारत की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने संकट के समय दूसरे देशों की सहायता करने का प्रयास किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत ने जरूरत के समय अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन भारत को संकट के दौरान वैसी मदद नहीं मिली, जैसी अपेक्षा की जा रही थी।

## भारत की 1.4 अरब आबादी के सामने थीं बड़ी चुनौतियां

कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया था। भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश के सामने स्वास्थ्य सेवाओं, दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसी बड़ी चुनौतियां थीं।

इस दौरान भारत ने घरेलू स्तर पर महामारी से निपटने के प्रयास किए और दूसरे देशों को भी दवाओं तथा टीकों सहित विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई। पीयूष गोयल ने इसी संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संकट के समय देशों की जिम्मेदारियों पर अपनी बात रखी।

## ‘भारत करता है मदद, बाकी देश देखते हैं अपना फायदा’

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत किसी न किसी रूप में दूसरे देशों की सहायता करता है, जबकि कई देश अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सहयोग और पारस्परिक जिम्मेदारी का महत्व होना चाहिए।

उन्होंने कोविड-19 महामारी के अनुभवों का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक संकट के समय देशों को एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आना चाहिए। महामारी ने यह भी दिखाया कि स्वास्थ्य, दवाओं और जरूरी संसाधनों के मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितना महत्वपूर्ण है।

## वैश्विक सहयोग पर फिर उठे सवाल

कोरोना महामारी के दौरान कई देशों ने चिकित्सा संसाधनों, दवाओं और टीकों की उपलब्धता को लेकर चुनौतियों का सामना किया था। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आपूर्ति व्यवस्था और जरूरतमंद देशों तक आवश्यक संसाधन पहुंचाने का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।

पीयूष गोयल के बयान ने एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ला दिया है कि वैश्विक संकट के समय देशों के बीच सहयोग किस तरह होना चाहिए और क्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मानवीय जरूरतों को आर्थिक तथा रणनीतिक हितों से ऊपर रखा जाता है।

केंद्रीय मंत्री का यह बयान महामारी से मिले अनुभवों और भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को लेकर उनकी राय को सामने रखता है। उनके मुताबिक, भारत ने दूसरों की मदद की और भविष्य में भी वैश्विक सहयोग की भावना महत्वपूर्ण बनी रहनी चाहिए।

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