बिहार में बाढ़ का कहर जारी, 48 लाख लोग प्रभावित; कोसी-बूढ़ी गंडक उफान पर, 1,790 नावें तैनात
बिहार में सितंबर में सामान्य से 13% ज्यादा बारिश, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर; प्रशासन ने राहत-बचाव अभियान तेज किया

**बिहार में बाढ़ से 48 लाख लोग प्रभावित, कोसी-बूढ़ी गंडक उफान पर, 1,790 नावें तैनात**
बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई हिस्सों में पानी का स्तर कुछ जगहों पर कम होना शुरू हुआ है, लेकिन कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा और अन्य नदियों में जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में अब भी संकट बना हुआ है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, बाढ़ से राज्य में **48 लाख से अधिक लोग प्रभावित** हुए हैं।
### कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर
बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं। कोसी और बूढ़ी गंडक समेत कई नदियों का जलस्तर अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बिहार में बाढ़ की स्थिति केवल स्थानीय बारिश का नतीजा नहीं है। गंगा समेत कई बड़ी नदियों और उनकी सहायक नदियों में बढ़ा जलस्तर भी इसका बड़ा कारण है। गंगा का जलस्तर ऊंचा होने से कुछ सहायक नदियों के पानी की निकासी प्रभावित हुई, जिससे कई इलाकों में जलजमाव और बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई।
### 48 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
बाढ़ ने बिहार के कई जिलों में बड़ी आबादी को प्रभावित किया है। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि कई परिवार अब भी बाढ़ के पानी के बीच रहने को मजबूर हैं।
राहत शिविरों में लोगों के लिए भोजन, पीने का पानी और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
### राहत और बचाव के लिए नावों की तैनाती
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में नावों को लगाया गया है। प्रशासन ने **करीब 1,790 नावें** राहत और परिवहन कार्य के लिए तैनात की हैं।
नावों की मदद से बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों तक खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
### पानी घटने के बावजूद खतरा बरकरार
बिहार के कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन प्रशासन के सामने नई चुनौतियां भी हैं। अचानक जलस्तर घटने के दौरान कमजोर मकानों, सड़कों और तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। साथ ही जलभराव वाले क्षेत्रों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
इसी वजह से प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बनाए रखने और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
### बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई परेशानी
सितंबर में बिहार में बारिश सामान्य से अधिक दर्ज की गई है। इसके अलावा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश और नदियों में बढ़े प्रवाह का असर भी राज्य के निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है।
बिहार में गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा जैसी नदियां अलग-अलग हिस्सों में खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी और स्थानीय स्तर पर तेज बारिश के कारण बाढ़ का असर बढ़ा है।
### सरकार और प्रशासन की चुनौती
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना और राहत सामग्री उपलब्ध कराना है। प्रशासन की टीमें लगातार संवेदनशील इलाकों में निगरानी कर रही हैं। नावों के साथ राहत दलों को भी तैनात किया गया है।
बिहार में बाढ़ की स्थिति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर और मौसम की स्थिति के आधार पर प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा।



