खबर

बड़सिलिंग पंचायत के कई आदिवासी गांव अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

निरंजन दास

ब्यूरो चीफ उड़ीसा

बड़सिलिंग पंचायत के कई आदिवासी गांव अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इन गांवों में न तो सड़क है, न बिजली और न ही पानी की सुविधा है। प्रशासन ने इन गांवों की ओर ध्यान नहीं दिया है, और गांववाले आंदोलन की ओर बढ़ रहे हैं।

सड़क निर्माण के लिए सरकार पंचायत और ब्लॉक के माध्यम से काम कर रही है, लेकिन स्वतंत्रता के 75 वर्षों के बाद भी गांव में सड़क और बिजली-पानी जैसी सुविधाओं की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रशासनिक योजनाएं लोगों तक नहीं पहुंची हैं, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि बड़सिलिंग पंचायत के आदिवासी गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ओडिशा का नयागढ़ जिले के गणिया ब्लॉक के बड़सिलिंग पंचायत के आदिवासी गांवों की स्थिति चिंताजनक है। यहां पहुंचने के लिए कोई उचित सड़क नहीं है और गांवों में बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं है। इस गांव में लगभग 500 परिवार हैं, जिनमें 300 से अधिक मतदाता हैं, लेकिन सड़क की कमी के कारण गांव बहुत पिछड़ा हुआ है। लोग ज्यादातर पैदल चलते हैं और बुनियादी सुविधाओं के बिना जीवनयापन कर रहे हैं।

गांव के आसपास अन्य क्षेत्रों में भी यही स्थिति है। ढीपी साही और बेदीकी नाल जैसे स्थानों में बिजली की व्यवस्था है, लेकिन पानी की सुविधा नहीं है। यहां कुएं या नल नहीं हैं, और लोग बेदीकी नाल से पानी लाकर उपयोग करते हैं। इसके अलावा, सड़क की कमी के कारण गांव वालों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

दशपल्ला निर्वाचन मंडल के कई आदिवासी गांव भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। इन गांवों में भी सड़क, बिजली और पानी की कोई सुविधा नहीं है। इन गांवों तक पहुंचने के लिए कोई परिवहन विकल्प उपलब्ध नहीं है।

भारतीय विकास परिषद के अध्यक्ष सुरेंद्र पाणिग्राही ने बताया कि आदिवासी गांवों के मौलिक अधिकारों के लिए उच्च न्यायालय में मामला दर्ज किया गया है और मामले की सुनवाई चल रही है। भारतीय विकास परिषद हमेशा लोगों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button