यूपी राज्यसभा चुनाव: अखिलेश ने रामगोपाल यादव के साथ धनराज नाथवानी को बनाया उम्मीदवार, सपा का पुराना कॉरपोरेट कनेक्शन
यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का दांव, अखिलेश यादव ने रामगोपाल यादव के साथ धनराज नाथवानी को बनाया उम्मीदवार; जानिए पार्टी के पुराने कॉरपोरेट कनेक्शन

**यूपी राज्यसभा चुनाव: अखिलेश ने रामगोपाल यादव के साथ धनराज नाथवानी को बनाया उम्मीदवार, सपा का पुराना कॉरपोरेट कनेक्शन**
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम सामने रख दिए हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव के साथ उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी को प्रत्याशी बनाया है। दोनों उम्मीदवारों ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया।
धनराज नाथवानी को सपा की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उनका राजनीतिक पहचान से ज्यादा संबंध कॉरपोरेट और खेल प्रशासन के क्षेत्र से रहा है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी हैं और उनके पिता परिमल नाथवानी झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।
### कौन हैं धनराज परिमल नाथवानी?
धनराज नाथवानी कॉरपोरेट क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और रिलायंस समूह से जुड़े हैं। इसके अलावा उनका खेल प्रशासन से भी जुड़ाव रहा है। उनके राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद यूपी की राजनीति में उनके राजनीतिक और कारोबारी कनेक्शन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
सपा ने रामगोपाल यादव के साथ उन्हें उम्मीदवार बनाकर पार्टी के पारंपरिक राजनीतिक चेहरों के अलावा कारोबारी पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को भी उच्च सदन भेजने का रास्ता खोला है।
### सपा और उद्योगपतियों का पुराना रिश्ता
समाजवादी पार्टी की राजनीति में कारोबारी और उद्योग जगत से जुड़े लोगों को राज्यसभा भेजे जाने का इतिहास नया नहीं है। इससे पहले भी पार्टी के समर्थन से कई कारोबारी या उद्योगपति उच्च सदन तक पहुंचे हैं।
**अनिल अंबानी** को वर्ष 2004 में उत्तर प्रदेश से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचने में सपा का समर्थन मिला था। बाद में 2006 में ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ से जुड़े विवाद के बीच उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
इसी तरह होटल कारोबारी **ललित सूरी** वर्ष 2002 से 2006 तक उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था और उन्हें सपा का समर्थन प्राप्त था। 2004 में भी मुलायम सिंह यादव के समर्थन से वे दोबारा राज्यसभा पहुंचे।
### संजय सेठ भी सपा के समर्थन से पहुंचे थे राज्यसभा
उत्तर प्रदेश के कारोबारी और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संजय सेठ को भी समाजवादी पार्टी ने 2016 में राज्यसभा भेजा था। हालांकि, 2019 में उन्होंने सपा और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा भेजा।
संजय सेठ का उदाहरण सपा की ओर से कारोबारी पृष्ठभूमि वाले नेताओं को राज्यसभा भेजे जाने के संदर्भ में अक्सर चर्चा में आता है।
### बनवारी लाल कंछल भी बने थे सपा के राज्यसभा सांसद
व्यापारी नेता बनवारी लाल कंछल भी सपा के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे। 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान उन्हें सपा ने राज्यसभा भेजा था। बाद में 2009 में उन्होंने सपा छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
इस तरह धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी को सपा की उस राजनीतिक परंपरा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी ने अलग-अलग समय पर कारोबारी और उद्योग जगत से जुड़े चेहरों को उच्च सदन के लिए समर्थन दिया है।
### यूपी में 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर को होना है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की प्रक्रिया 6 अक्टूबर तक चलेगी।
सपा ने फिलहाल रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी के नाम घोषित किए हैं। दोनों के नामांकन के बाद अब राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में अन्य दलों की ओर से उम्मीदवारों के नाम और चुनावी रणनीति सामने आने की उम्मीद है।
धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी ने इस चुनाव में कॉरपोरेट जगत से जुड़े चेहरों की भूमिका और सपा के पुराने राज्यसभा उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, उनकी उम्मीदवारी और पार्टी की रणनीति को लेकर अंतिम राजनीतिक आकलन चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही स्पष्ट होगा।



