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प्रयागराज कोर्ट ने दंडी संन्यासी प्रक्चैतन्य मुकुंदानंद की अर्जी खारिज की, पुराने मुकदमे में सबूत देने का निर्देश

प्रक्चैतन्य मुकुंदानंद ने आशुतोष ब्रह्मचारी समेत कई लोगों के खिलाफ FIR की मांग की थी, कोर्ट ने पुराने मुकदमे में ही शिकायत और दस्तावेजी व इलेक्ट्रॉनिक सबूत देने का निर्देश दिया।

# प्रयागराज कोर्ट ने प्रक्चैतन्य मुकुंदानंद की अर्जी खारिज की, पुराने मुकदमे में सबूत देने का निर्देश

**प्रयागराज:** उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्य और दंडी संन्यासी प्रक्चैतन्य मुकुंदानंद की ओर से दाखिल की गई अर्जी को अदालत ने खारिज कर दिया है। इलाहाबाद के विशेष न्यायालय ने उनकी उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।

अदालत ने मामले में एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत से जुड़े सभी दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच अधिकारी के सामने पेश कर सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिजिटल और भौतिक, दोनों तरह के सबूत जांच में शामिल किए जा सकते हैं।

## आशुतोष ब्रह्मचारी समेत कई लोगों के खिलाफ FIR की मांग

दरअसल, दंडी संन्यासी प्रक्चैतन्य मुकुंदानंद ने आशुतोष ब्रह्मचारी समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग को लेकर अदालत में अर्जी दाखिल की थी। उनका कहना था कि मामले में आरोपों की जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।

अर्जी पर सुनवाई के दौरान अदालत ने अलग से नया मुकदमा दर्ज करने की मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पहले से दर्ज मुकदमे की जांच में ही अपनी शिकायत और उससे संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराने का रास्ता बताया।

## पुराने मुकदमे में ही दिए जा सकेंगे सभी सबूत

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत और सबूत झूंसी थाने में दर्ज पुराने मुकदमे में दे सकते हैं। जांच अधिकारी इन साक्ष्यों को मौजूदा जांच का हिस्सा बना सकते हैं।

इसका मतलब यह है कि प्रक्चैतन्य मुकुंदानंद को अपने पास मौजूद सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज, रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच अधिकारी को उपलब्ध कराने होंगे। जांच के दौरान इन सबूतों की प्रासंगिकता और सत्यता की जांच की जाएगी।

## डिजिटल और फिजिकल एविडेंस भी सौंपने होंगे

कोर्ट के निर्देश के अनुसार याचिकाकर्ता मामले से जुड़े डिजिटल और फिजिकल दोनों तरह के साक्ष्य जांच अधिकारी के सामने पेश कर सकते हैं। इसमें दस्तावेजों के साथ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी शामिल हो सकते हैं।

जांच अधिकारी इन साक्ष्यों की जांच कर यह देखेंगे कि पुराने मुकदमे की जांच में इनका क्या महत्व है। अदालत ने इस तरह शिकायतकर्ता को अपनी बात और उपलब्ध साक्ष्य जांच प्रक्रिया के दौरान रखने का अवसर दिया है।

## वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्र ने दी आदेश की जानकारी

प्रक्चैतन्य मुकुंदानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्र ने अदालत के आदेश की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अदालत ने आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया है।

हालांकि, अदालत ने यह रास्ता खुला रखा है कि याचिकाकर्ता अपने आरोपों और सबूतों को झूंसी थाने में पहले से दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान जांच अधिकारी के सामने रख सकते हैं।

## अब पुराने केस की जांच पर नजर

अदालत के आदेश के बाद अब मामले में पहले से दर्ज मुकदमे की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। याचिकाकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच अधिकारी जांच करेंगे। इन सबूतों के आधार पर जांच में आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।

फिलहाल अदालत ने अलग से FIR दर्ज करने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया है। मामले से जुड़े आरोपों और साक्ष्यों की जांच पुराने मुकदमे की जांच प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेगी।

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