दिव्य महापुरुष संत रमेश बाबा महाराज को कोटि-कोटि नमन
दिव्य महापुरुष संत रमेश बाबा महाराज को कोटि-कोटि नमन

बरसाना।आपको बता दें कि आज ब्रजभूमि ही नहीं, संपूर्ण भारतवर्ष और विश्वभर में श्रीराधा-कृष्ण के करोड़ों भक्तों के लिए अत्यंत दुःख और विरह का क्षण है।
मान मंदिर, बरसाना के महंत, ब्रजनिष्ठ संत, परम गौसेवी, ब्रज विभूति, ब्रजवासियों के लाड़ले और ठाकुरजी – श्रीजी के अनन्य भक्त पद्मश्री संत रमेश बाबा महाराज ने पितृपक्ष की पावन इंदिरा एकादशी के दिन मंगलवार को मध्याह्न में श्रीराधा नाम का स्मरण करते हुए ब्रज की परम पावन भूमि गहवर वन में अपनी नित्य लीला में प्रवेश किया।
जिस संत का जीवन स्वयं ब्रजभक्ति, गौसेवा, साधना, त्याग और श्रीराधा नाम के प्रति अखंड समर्पण की जीवंत गाथा रहा, उनके गोलोक गमन से ब्रजभूमि ने अपने एक ऐसे संत को खो दिया है, जिनके जीवन की प्रत्येक सांस श्रीजी की सेवा ब्रज की सेवा, गौमाता की सेवा और ब्रज की महिमा को समर्पित रही।
संगम नगरी प्रयागराज की पावन धरा पर जन्मे 88 वर्षीय संत रमेश बाबा महाराज केवल एक संत नहीं थे, वे ब्रज की आत्मा, गौसेवा के महान प्रहरी और श्रीराधा-कृष्ण भक्ति की साक्षात साधना थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ब्रज, ब्रजवासियों, गौमाता और ठाकुरजी श्रीजी की सेवा में अर्पित कर दिया। उनके श्रीमुख से निकला श्रीराधा नाम और उनके जीवन से प्रकट हुई ब्रजभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा बनी रहेगी।
आज गहवर वन की पवित्र धरा, जिसे बाबा ने 70 वर्ष पूर्व अपनी साधना के लिए चुना, वहीं भूमि बाबा की उस दिव्य आत्मा को अपने आंचल में समेटने जा रही है, जिसने जीवनभर इसी पावन भूमि को अपनी तपस्थली बनाया। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आज सायं लगभग छह बजे उनकी तपस्थली गहवर वन में होगा।
यह किसी संत का अंत नहीं, बल्कि एक दिव्य यात्रा का अगला चरण है।
ब्रज की धूल में जिनके चरण पड़े,
श्रीजी के नाम में जिनकी सांसें बसीं,
गौमाता की सेवा में जिनका जीवन बीता,
और गहवर वन जिनकी तपस्थली बना—
ऐसे दिव्य महापुरुष को मृत्यु कैसे छू सकती है?
संत रमेश बाबा महाराज अपने शरीर से भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी साधना, उनका श्रीराधा नाम, उनकी गौसेवा और उनका ब्रजप्रेम युगों-युगों तक जीवित रहेगा।
हम प्रार्थना करते हैं कि नन्दलाल श्रीकृष्ण, श्रीकिशोरी जी और गौमाता की कृपा उनके ऊपर सदैव बनी रहे।
हे ब्रजराज!
हे श्रीराधे!
अपने इस अनन्य सेवक को अपने चरणों में स्थान देना।
दिव्य महापुरुष संत रमेश बाबा महाराज के पावन चरणों में कोटिशः प्रणाम।
आश्विन बदी इंदिरा एकादशी
6 अक्टूबर 2026,मंगलवार
ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ पुत्र धर्म दास महाराज सभी काम छोड़कर बरसाना पहुंचेंगे। ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन परिवार में शौक की लहर छाई हुई।
एक के बाद दिव्य संत ब्रज धाम से वृहमलीन हो रहे हैं गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने कहा


