दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में बेटे को खोया, पिता संतोष खरवार का छलका दर्द- ‘किसी और माता-पिता को न झेलना पड़े’
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने वाले सात लोगों में पांच छात्र थे. मंगलवार को चंदौली के अभिषेक का पार्थिव शरीर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचा, जहां पिता संतोष खरवार ने बिल्डिंग की सुरक्षा और PG व्यवस्था पर सवाल उठाए.

# सत्य निकेतन हादसे में बेटे को खोया, अंतिम विदाई पर छलका पिता का दर्द, बोले- किसी और परिवार को न झेलना पड़े
दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग ढहने के हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई, जिनमें पांच छात्र बताए जा रहे हैं। इन्हीं मृतकों में चंदौली के रहने वाले अभिषेक खरवार भी शामिल थे। मंगलवार को अभिषेक का पार्थिव शरीर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचा, जहां बेटे को अंतिम विदाई देने पहुंचे पिता संतोष खरवार का दर्द छलक पड़ा।
बेटे की मौत से गमगीन संतोष खरवार ने कहा कि उन्होंने अभिषेक को पाल-पोसकर बड़ा किया था, लेकिन अब परिवार को जिंदगी भर का दर्द मिल गया है। उन्होंने हादसे के लिए बिल्डिंग मालिक को जिम्मेदार ठहराते हुए सवाल उठाया कि अगर इमारत की स्थिति ठीक नहीं थी तो उसमें छात्रों को रहने की अनुमति क्यों दी गई।
## बेटे के साथ खुद PG देखने गए थे पिता
संतोष खरवार ने बताया कि जब अभिषेक ने सत्य निकेतन में PG लिया था, तब वह खुद भी बेटे के साथ वहां गए थे। उस समय उन्हें ऐसी कोई बड़ी परेशानी नजर नहीं आई थी। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा दिल्ली में रहकर पढ़ाई और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश करेगा।
लेकिन कुछ समय बाद हुए इस हादसे ने परिवार की सारी उम्मीदें तोड़ दीं। अभिषेक की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और पिता के लिए बेटे को अंतिम विदाई देना बेहद मुश्किल पल रहा।
## बिल्डिंग मालिक पर लगाया लापरवाही का आरोप
अभिषेक के पिता ने हादसे के लिए बिल्डिंग मालिक को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि छात्रों की सुरक्षा के लिए PG और इमारतों की नियमित जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी भवन में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं तो वहां उन्हें रहने की अनुमति कैसे मिल सकती है।
संतोष खरवार ने कहा कि उनका परिवार जिस पीड़ा से गुजर रहा है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उनका कहना है कि उनका बेटा अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली गया था, लेकिन हादसे ने उसकी जिंदगी ही छीन ली।
## 11 महीने की फीस का भी उठाया मुद्दा
अभिषेक के पिता ने PG व्यवस्था को लेकर एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि कई जगह छात्रों से 11 महीने की फीस पहले ही जमा करा ली जाती है। ऐसे में अगर कोई छात्र बीच में कमरा छोड़ना चाहे तो जमा किया गया पैसा वापस नहीं मिलने की वजह से वह ऐसा नहीं कर पाता।
उन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों और उनके परिवारों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए। केवल फीस और कमरे की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जिस भवन में छात्र रह रहे हैं, वह सुरक्षित है।
## ‘किसी और माता-पिता को यह दर्द न झेलना पड़े’
बेटे की अंतिम विदाई के दौरान संतोष खरवार ने कहा कि वह नहीं चाहते कि किसी और माता-पिता को ऐसी स्थिति से गुजरना पड़े। दिल्ली जैसे बड़े शहरों में पढ़ाई और नौकरी के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा आते हैं। परिवार अपने बच्चों को भरोसे के साथ शहर भेजते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद अब PG और किराये के भवनों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अभिषेक के परिवार की मांग है कि हादसे की जिम्मेदारी तय हो और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे भविष्य में किसी परिवार को अपने बच्चे की इस तरह अंतिम विदाई न देनी पड़े।
अभिषेक की अंतिम यात्रा के दौरान परिवार और परिचितों की आंखें नम थीं। एक पिता के लिए बेटे को कंधा देना उस दर्द की तस्वीर बन गया, जिसे संतोष खरवार जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।



