UP Flood: कानपुर-लखनऊ में बाढ़ का संकट, गंगा-गोमती का बढ़ा जलस्तर, 20 साल बाद हनुमत धाम पहुंचा पानी
उत्तर प्रदेश के कानपुर और लखनऊ समेत कई जिलों में बाढ़ का संकट बना हुआ है। गंगा और गोमती का जलस्तर बढ़ने से रिहायशी इलाकों और गंगा किनारे बसे गांवों में पानी पहुंच गया है, जबकि लखनऊ में करीब 20 साल बाद गोमती का पानी हनुमत धाम परिसर तक पहुंचा है।

# UP Flood: कानपुर-लखनऊ में बाढ़ का संकट, गंगा-गोमती का बढ़ा जलस्तर, 20 साल बाद हनुमत धाम पहुंचा पानी
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। कानपुर और लखनऊ में नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों और रिहायशी क्षेत्रों में पानी पहुंच गया है। कई जगह सड़कें जलमग्न हैं और लोगों को घरों से बाहर निकलने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कानपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर पानी भर गया है, जबकि लखनऊ में गोमती नदी का पानी हनुमत धाम परिसर तक पहुंच गया है।
## कानपुर में गंगा का बढ़ा जलस्तर
कानपुर में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का असर अब नदी किनारे के इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। कई प्रमुख घाट जलमग्न हो गए हैं। शुक्लागंज में जलस्तर 113.08 मीटर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे गंगा के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
गंगा बैराज के आसपास करीब आठ गांव भी बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। इन इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है और स्थानीय लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर पड़ा है।
कानपुर में इससे पहले पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण भी निचले इलाकों में पानी जमा हुआ था। अब गंगा के बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
## लखनऊ में गोमती ने बढ़ाई चिंता
राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। नदी का पानी रिहायशी इलाकों के अलावा धार्मिक स्थलों और रिवरफ्रंट के आसपास तक पहुंच गया है। गोमती का जलस्तर 108.14 मीटर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जिसे सामान्य स्तर से करीब आठ फीट ऊपर बताया गया है।
लखनऊ के हनुमत धाम परिसर में करीब 20 साल बाद गोमती का पानी पहुंचा है। इससे पहले 2007 के बाद ऐसी स्थिति सामने आने की बात कही गई है। मंदिर परिसर में पानी पहुंचने से श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन के सामने भी नई चुनौती खड़ी हो गई है।
हनुमान मंदिर के मुख्य पुरोहित के मुताबिक, पानी हनुमान जी के चरणों तक पहुंच गया है। जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में मंदिर की परंपरा के अनुसार बाहर से ही पूजा-अर्चना और आरती करने की व्यवस्था की जा सकती है।
## फैजुल्लागंज से बीकेटी तक असर
गोमती नदी के बढ़े जलस्तर का असर फैजुल्लागंज से लेकर बक्शी का तालाब (बीकेटी) और आसपास के ग्रामीण इलाकों तक दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर जलभराव के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हनुमत धाम, प्राचीन शनि देव मंदिर और लक्ष्मण मेला मैदान के आसपास भी पानी का असर बताया गया है।
बख्शी का तालाब तहसील के लासा, बहादुरपुर, सुल्तानपुर और अकड़िया मऊ जैसे गांवों में पानी का स्तर कुछ कम होने की जानकारी है, लेकिन स्थानीय लोगों की परेशानियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
## राहत और बचाव के लिए नावें तैनात
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। लखनऊ में आवाजाही और राहत कार्य के लिए 30 नावें तैनात की गई हैं। इसके अलावा चार शिविर और सहायता केंद्र बनाए गए हैं, जहां प्रभावित लोगों को भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन की टीमें निचले इलाकों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मेडिकल किट और क्लोरीन की गोलियां उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। जहां कर्मचारी सीधे नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहां दवा के छिड़काव के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
## प्रशासन अलर्ट, लोगों से सावधानी की अपील
बाढ़ के हालात को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज रखने के निर्देश दिए गए हैं। नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।
फिलहाल कानपुर में गंगा और लखनऊ में गोमती के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। नदी का पानी रिहायशी और धार्मिक क्षेत्रों तक पहुंचने के कारण प्रभावित इलाकों में राहत कार्य लगातार जारी है। आने वाले समय में जलस्तर में होने वाला बदलाव ही तय करेगा कि इन क्षेत्रों में बाढ़ का संकट कितनी जल्दी कम होता है।



