उत्तर प्रदेश

यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का बड़ा दांव, धनराज नथवानी को उतारकर बीजेपी के सामने खड़ी की नई चुनौती

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर सपा-बीजेपी की सियासी जंग, धनराज नथवानी को प्रत्याशी बनाकर अखिलेश यादव ने बढ़ाई चुनौती

**यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का बड़ा दांव, धनराज नथवानी को उतारकर बीजेपी के सामने खड़ी की नई चुनौती**

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने बुधवार को अपने दो उम्मीदवारों के नाम का ऐलान करते हुए वरिष्ठ नेता प्रो. राम गोपाल यादव और उद्योग जगत से जुड़े धनराज परिमल नथवानी को प्रत्याशी बनाया। दोनों ने 30 सितंबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन भी दाखिल किया।

धनराज नथवानी के नाम ने इसलिए भी राजनीतिक चर्चा बढ़ा दी है, क्योंकि वह झारखंड से राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी के बेटे हैं। परिमल नथवानी को बीजेपी का समर्थन प्राप्त निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर झारखंड से राज्यसभा भेजा गया था। धनराज नथवानी का जुड़ाव रिलायंस समूह और खेल प्रशासन से रहा है।

**10 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान**

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हुई है और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी, जबकि मतदान की जरूरत पड़ने पर 16 अक्टूबर को वोटिंग होगी।

विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट की जरूरत है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी अपने सहयोगी दलों के साथ सात सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि सपा दो सीटों पर जीत की स्थिति में बताई जा रही है। ऐसे में अतिरिक्त सीटों को लेकर दोनों खेमों के बीच संख्या बल और दूसरी वरीयता के वोट महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

**आठवीं सीट के लिए NDA को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत**

मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर बीजेपी के पास 256 विधायक बताए गए हैं। उसके सहयोगी अपना दल (एस), आरएलडी, सुभासपा और निषाद पार्टी के विधायकों को जोड़ने पर NDA का आंकड़ा 289 तक पहुंचता है। कुछ निर्दलीय और अन्य विधायकों के समर्थन को जोड़कर यह संख्या 294 बताई गई है। आठ सीटों के लिए 296 वोट चाहिए होंगे, यानी दो अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है।

विपक्ष में सपा के 101 और कांग्रेस के दो विधायक बताए गए हैं। 74 वोटों से दो सीटें जीतने के बाद सपा के पास अतिरिक्त विधायक बचते हैं। इसी वजह से तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी सियासी गणित पर चर्चा हो रही है।

**धनराज नथवानी कौन हैं?**

धनराज परिमल नथवानी का संबंध रिलायंस समूह से है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह कॉरपोरेट क्षेत्र के साथ-साथ खेल प्रशासन से भी जुड़े रहे हैं। उनके पिता परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी और झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं।

सपा की ओर से धनराज नथवानी को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद यह उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। खास तौर पर उनके पारिवारिक और कॉरपोरेट जुड़ाव को देखते हुए इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

**बीजेपी और सपा के बीच बढ़ी राजनीतिक सक्रियता**

राज्यसभा चुनाव के जरिए विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या और विधायकों के समर्थन का गणित महत्वपूर्ण हो गया है। पिछले राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग के उदाहरणों के कारण इस बार भी राजनीतिक दल अपने-अपने विधायकों को लेकर रणनीति बनाने में जुटे हैं।

बीजेपी की ओर से भी उम्मीदवारों को लेकर प्रक्रिया जारी है। वहीं सपा ने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं और तीसरे उम्मीदवार को लेकर चर्चा बनी हुई है। बीजेपी की ओर से उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि यदि सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो बीजेपी भी अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है।

इस तरह यूपी की 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव केवल उम्मीदवारों की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि विधानसभा में मौजूदा संख्या बल, सहयोगी दलों के समर्थन, अतिरिक्त वोटों और संभावित दूसरी वरीयता के वोटों का गणित भी इसमें अहम भूमिका निभाएगा। मतदान और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button