उत्तर प्रदेश

आगरा में सवर्ण संगठनों की सक्रियता, 2027 से पहले सपा के दलित सम्मेलन की भी तैयारी

आगरा में UGC के नए नियमों के विरोध में सवर्ण संगठनों की सक्रियता और समाजवादी पार्टी के प्रस्तावित दलित सम्मेलन ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जिले की जातीय राजनीति को चर्चा में ला दिया है।

**आगरा में सवर्ण संगठनों की सक्रियता के बीच सपा का दलित सम्मेलन, 2027 से पहले जातीय राजनीति पर नजर**

उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले आगरा में सितंबर 2026 के दौरान सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर कई तरह की गतिविधियां देखने को मिली हैं। एक तरफ यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी UGC के नए नियमों के विरोध में सवर्ण संगठनों की ओर से प्रदर्शन किए गए, वहीं समाजवादी पार्टी ने 15 नवंबर को आगरा में दलित सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आगरा में अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच राजनीतिक सक्रियता चर्चा का विषय बन गई है।

### UGC नियमों के विरोध में तीन प्रदर्शन

आगरा के एत्मादपुर और खंदौली क्षेत्र में पिछले करीब एक महीने में UGC के नए नियमों और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर तीन प्रमुख आंदोलन हुए। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा सहित कई संगठनों ने UGC के ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ का विरोध किया है। UGC की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक ये नियम 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित किए गए थे।

1 सितंबर को एत्मादपुर के मुड़ी चौराहे पर प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद 18 सितंबर को सिस्टम सुधार संगठन और राष्ट्रीय करणी सेना से जुड़े लोगों ने ट्रैक्टर मार्च निकाला। 20 सितंबर को UGC मुक्ति मोर्चा के आह्वान पर कलेक्ट्रेट के घेराव का प्रयास किया गया।

21 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन में करीब 200 ट्रैक्टरों के साथ लोग पहुंचे थे और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग तथा जेसीबी और अन्य भारी वाहनों का इस्तेमाल किया। कुछ प्रदर्शनकारी यमुना एक्सप्रेस-वे की ओर भी बढ़े थे।

### आंदोलनकारी क्या मांग कर रहे हैं?

प्रदर्शन से जुड़े संगठनों की प्रमुख मांग UGC के नए नियमों को वापस लेने और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े राघवेंद्र सिंह राजू ने दावा किया कि सवर्ण युवाओं से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त राजनीतिक ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति को बनाया जाना चाहिए। हालांकि यह आंदोलनकारी संगठनों की मांग है और इसे सभी राजनीतिक दलों या सामाजिक समूहों की समान राय नहीं माना जा सकता।

### आगरा में ही क्यों बढ़ी सक्रियता?

आगरा लंबे समय से उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। जिले में अनुसूचित जाति की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 22.43 प्रतिशत है। जाटव समुदाय की मौजूदगी के कारण भी आगरा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में अहम माना जाता है।

वहीं एत्मादपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में क्षत्रिय और ब्राह्मण समुदायों की अच्छी मौजूदगी है। आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि क्षेत्र की सामाजिक संरचना और यमुना एक्सप्रेस-वे तथा अन्य प्रमुख मार्गों से कनेक्टिविटी के कारण यहां बड़े प्रदर्शन आयोजित करना संभव हुआ।

21 सितंबर के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह टकराव जैसी स्थिति बनी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई रास्तों पर सुरक्षा बल तैनात किए थे।

### 2027 चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज

उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में विभिन्न दल और सामाजिक संगठन अलग-अलग समुदायों के बीच अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं।

आगरा में UGC और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सवर्ण संगठनों की सक्रियता के समानांतर समाजवादी पार्टी भी दलित समाज के बीच अपना संगठन मजबूत करने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने 15 नवंबर को आगरा में दलित सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई है। इसमें अखिलेश यादव के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की जानकारी दी गई है।

### सपा का दलित सम्मेलन क्यों महत्वपूर्ण?

समाजवादी पार्टी ने पिछले कुछ समय में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों को अपने राजनीतिक अभियान के प्रमुख हिस्से के रूप में पेश किया है। आगरा में प्रस्तावित दलित सम्मेलन इसी अभियान का हिस्सा बताया गया है।

सपा की योजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से दलित समुदाय के लोगों को कार्यक्रम में जोड़ने की है। पार्टी विशेष रूप से जाटव सहित अन्य दलित समुदायों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

यह गतिविधि ऐसे समय हो रही है जब आगरा और आसपास के इलाकों में सामाजिक संगठनों की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर लामबंदी भी दिखाई दे रही है। इसलिए 2027 के चुनाव से पहले आगरा में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों पर नजर बनी हुई है।

### आगे और आंदोलनों की तैयारी

UGC नियमों के विरोध में आंदोलन कर रहे संगठनों ने आगरा के बाद दूसरे जिलों में भी कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही है। Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन से जुड़े नेताओं ने 20 अक्टूबर को कानपुर में कार्यक्रम और इसके बाद अन्य आयोजनों की योजना बताई है।

फिलहाल आगरा में सवर्ण संगठनों की सक्रियता और सपा के प्रस्तावित दलित सम्मेलन को अलग-अलग राजनीतिक गतिविधियों के रूप में देखा जा रहा है। इनके चुनावी प्रभाव के बारे में अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में जातीय और सामाजिक समूहों के बीच राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की गतिविधियां तेज हो रही हैं।

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