
# PM मोदी का ‘दिमागी नक्सल’ पर फिर हमला, बोले- होम्योपैथिक गोली से बाहर आ गए आलोचक
**नई दिल्ली।** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर उठे विवाद के बीच एक बार फिर इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को दिल्ली के **श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC)** के शताब्दी समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने अपने उस बयान की तुलना होम्योपैथिक दवा से की। उन्होंने कहा कि लाल किले से दी गई ‘दिमागी नक्सल’ वाली होम्योपैथिक गोली के बाद ऐसे लोग एक-एक करके सामने आने लगे, जिन्हें उन्होंने इस विचारधारा को बढ़ावा देने वाला बताया।
## ‘दिमागी नक्सल’ वाली बात पर क्या बोले PM मोदी?
SRCC में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए भाषण का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस भाषण में उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
पीएम मोदी ने होम्योपैथी के सिद्धांत का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह के उपचार में शुरुआत में बीमारी बढ़ती हुई दिखाई देती है। इसी तर्ज पर उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ की होम्योपैथिक गोली दी, वैसे ही कथित ‘दिमागी नक्सल’ एक के बाद एक सामने आने लगे।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि अब देश भी ऐसे लोगों का असली रंग देख रहा है। उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन अपने संबोधन में सरकार की नीतियों और देश की प्रगति पर सवाल उठाने वाले आलोचकों पर निशाना साधा।
## स्वतंत्रता दिवस के भाषण के बाद हुआ था विवाद
दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में पीएम मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई थी।
प्रधानमंत्री ने अपने ताजा संबोधन में उसी शब्द को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया। उन्होंने कहा कि उनके बयान पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, उससे उन्हें लगा कि जिन लोगों की ओर वह इशारा कर रहे थे, वे खुद सामने आ गए।
उन्होंने कहा कि देश ऐसे लोगों को देख रहा है और जनता उनके रवैये को समझ रही है।
## आलोचकों पर भी साधा निशाना
SRCC के मंच से पीएम मोदी ने केवल ‘दिमागी नक्सल’ मुद्दे पर ही बात नहीं की, बल्कि सरकार की नीतियों के आलोचकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में कुछ ऐसे लोग हैं जो हर नई पहल पर सवाल उठाते हैं और पूछते हैं कि इसकी जरूरत क्या है।
प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों के लिए ‘नाराज फूफा’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, हाई-स्पीड रेल, UPI और नई संसद जैसी परियोजनाएं शुरू कीं, तब भी इनके औचित्य पर सवाल उठाए गए।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने इन तमाम सवालों का जवाब अपने काम से दिया है और देश के लिए जो जरूरी है, उसे करने से कोई नहीं रोक सकता।
## पुरानी सरकारों के कामकाज पर भी सवाल
अपने करीब 50 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने 2013 और मौजूदा समय के भारत की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश ने कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसी कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया।
पीएम मोदी ने दावा किया कि हर संकट के दौरान कुछ लोगों को उम्मीद थी कि भारत आगे नहीं बढ़ पाएगा और उनकी सरकार मुश्किल में फंस जाएगी। लेकिन जनता के समर्थन से देश इन चुनौतियों से निकलकर आगे बढ़ता रहा।
## 2013 के SRCC दौरे को भी किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब 13 साल बाद एक बार फिर SRCC पहुंचे थे। इससे पहले वह 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए इस कॉलेज में आए थे। इस बार कॉलेज के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह में उन्होंने छात्रों से संवाद किया और भारत की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति का उल्लेख किया।
उन्होंने अपने संबोधन में भारत की अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं की भूमिका पर भी बात की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में कई चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी स्थिति मजबूत की है।
## विकास की रफ्तार का भी किया जिक्र
पीएम मोदी ने रेलवे विद्युतीकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन कामों में दशकों लगते थे, उन्हें अब कुछ वर्षों में पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2014 तक देश के रेलवे नेटवर्क का 30 प्रतिशत से भी कम हिस्सा विद्युतीकृत था, जबकि अब यह आंकड़ा लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि भारत के पास आगे बढ़ने के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और विकास दर का भी उल्लेख किया और सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया।
### निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर उठे विवाद के बीच पीएम मोदी ने SRCC के मंच से अपने पुराने बयान को फिर चर्चा में ला दिया। उन्होंने इसे होम्योपैथिक गोली का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके बयान के बाद कथित तौर पर ऐसे लोग खुद सामने आ गए। साथ ही उन्होंने सरकार की नीतियों के आलोचकों पर निशाना साधते हुए देश की विकास यात्रा और अपनी सरकार के कामकाज का भी जिक्र किया।



