बांदा में बारावफात जुलूस के दौरान मिला संदिग्ध युवक, बांग्लादेशी होने का शक… वीडियो कॉल से खुला 12 साल पुराना राज
पुलिस ने पूछताछ के बाद युवक की पहचान असम निवासी मो. सफीउर्रहमान के रूप में की, परिवार से संपर्क के बाद सामने आई पूरी कहानी

# बांदा में संदिग्ध युवक मिला, बांग्लादेशी होने की चर्चा के बीच खुला 12 साल पुराना राज; वीडियो कॉल से हुई पहचान
**बांदा, 29 अगस्त 2026।** उत्तर प्रदेश के बांदा में बारावफात के जुलूस के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध युवक मिला। युवक की भाषा पुलिसकर्मियों को समझ में नहीं आ रही थी और वह शुरुआत में अपना नाम-पता भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहा था। ऐसे में पुलिस ने उसे थाने लाकर पूछताछ की। शुरुआती तौर पर उसके बांग्लादेशी होने की चर्चा होने लगी, लेकिन पुलिस ने बिना पुष्टि के कोई जल्दबाजी नहीं की।
जांच आगे बढ़ी तो वीडियो कॉल के जरिए युवक की पहचान **असम के बोंगाईगांव जिले के निवासी मो. सफीउर्रहमान** के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक, वह करीब 12 साल से अपने परिवार से लापता था। अब उसके परिवार से संपर्क होने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है।
## चेकिंग के दौरान पुलिस ने रोका
पुलिस के मुताबिक, **25 अगस्त 2026** को बदौसा थाना क्षेत्र के फतेहगंज तिराहे पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस ने एक व्यक्ति को रोका।
सामान्य पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मियों को उसकी बोली समझने में परेशानी हुई। वह अपना नाम और पता भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहा था। उसकी पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर पुलिस उसे थाने ले गई और आगे पूछताछ शुरू की।
## अपना नाम और पता बताया
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान व्यक्ति ने अपना नाम **मो. सफीउर्रहमान**, पिता का नाम हुसैन अली, उम्र करीब 45 वर्ष बताया। उसने अपना पता ग्राम वरगुला, जिला बोंगाईगांव, असम बताया।
पहचान की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित थाना क्षेत्र और अन्य माध्यमों से उसके बताए पते की पुष्टि करने की कोशिश शुरू की।
## वीडियो कॉल से हुई पहचान
पुलिस ने सफीउर्रहमान के भाई **शुजाउल हक** से फोन पर संपर्क किया। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए उसकी पहचान कराने की कोशिश की गई।
वीडियो कॉल के दौरान परिवार के सदस्यों ने व्यक्ति को पहचान लिया। इसके बाद सामने आया कि सफीउर्रहमान करीब **12 साल से परिवार से लापता** था।
इस तरह जिस व्यक्ति की पहचान को लेकर शुरुआत में संदेह था, वह असम का रहने वाला निकला और लंबे समय बाद उसका परिवार से संपर्क हो सका।
## बांग्लादेशी होने की चर्चा के बीच पुलिस ने नहीं की जल्दबाजी
मामले में खास बात यह रही कि पुलिस ने शुरुआती शक और स्थानीय चर्चाओं के आधार पर उसे बांग्लादेशी घोषित नहीं किया। भाषा और पहचान स्पष्ट नहीं होने के बाद पुलिस ने पहले पूछताछ की और उसके बताए पते की जानकारी जुटाई।
अधिकारियों के मुताबिक, किसी व्यक्ति की नागरिकता या पहचान को लेकर अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों और नियमानुसार सत्यापन के बाद ही निकाला जा सकता है। इसी वजह से पुलिस ने मामले में जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी रखी।
## ASP ने बताई पूरी प्रक्रिया
ASP शिवराज ने बताया कि संदिग्ध परिस्थितियों में मिले व्यक्ति से पहले सामान्य पूछताछ की गई थी। भाषा स्पष्ट नहीं होने के कारण उसे थाने लाया गया और बातचीत के जरिए उसकी जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई।
पुलिस ने उसके द्वारा बताए गए नाम और पते के आधार पर संबंधित लोगों से संपर्क किया। इसके बाद परिवार के सदस्य से फोन पर बात हुई और वीडियो कॉल के जरिए पहचान की गई।
## परिवार के बांदा पहुंचने का इंतजार
पुलिस के मुताबिक, सफीउर्रहमान के परिजनों को बांदा बुलाया गया है। परिजनों के पहुंचने के बाद उसकी पहचान और दस्तावेजों की नियमानुसार पुष्टि की जाएगी। इसके बाद पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।
बारावफात के मद्देनजर पुलिस क्षेत्र में चेकिंग और निगरानी अभियान चला रही थी। इसी दौरान यह मामला सामने आया। पुलिस का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी भी व्यक्ति की पहचान को लेकर बिना सत्यापन के निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
## 12 साल बाद परिवार से मिल सकता है लापता शख्स
इस पूरे मामले ने एक तरफ पुलिस की जांच प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है, तो दूसरी तरफ 12 साल से लापता एक व्यक्ति के परिवार से दोबारा संपर्क होने की कहानी भी सामने आई है।
अगर दस्तावेजों और परिजनों से नियमानुसार सत्यापन के बाद पहचान की पुष्टि हो जाती है, तो यह सफीउर्रहमान और उसके परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत होगी।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और परिजनों के बांदा पहुंचने के बाद पहचान तथा दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद ही आगे की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।



