स्थानीय मुख्यालय पवई में लंबे समय से नगर के अंदर से ओवरलोड डंपर ट्रक कानून को टायरों तले रौंदते हुए आगे निकल रहे है*

*प्रशासन व सरकार के लिए नासूर बने ओवरलोडिंग वाहन*
*नवनिर्मित डेढ़ सौ करोड़ की लागत के लगभग सड़क गड्ढों में हुई तब्दील*
*रिपोर्टर- एम पी सी जी Sky इंडिया टीवी से एमपी हेड मोहम्मद शमीम अहमद खान की रिपोर्ट*
एक तरफ सरकार गाड़ियों से होने वाले हादसों को कम करने के लिए सख्त कानून बना रहा है वहीं दूसरी तरफ पन्ना जिले के पवई में बेखौफ होकर निकल रहे ओवरलोडिंग ट्रैकों डंपरों पर लदी गिट्टी रेता पर अंकुश लगाने के लिए संबंधित विभाग व यातायात विभाग कोई कदम नहीं उठा रहा है और स्थानीय प्रशासन भी इसे गंभीरता से नहीं ले रही है स्थानीय मुख्यालय में लंबे समय से नगर के अंदर से ओवरलोड डंपर ट्रक सभी कानूनों को टायरों तले रौंदते हुए आगे गुजर रहे है और इन्हें कोई पूछने वाला नहीं है जिला प्रशासन एवं तहसील प्रशासन भी इस मामले में कई बार हाथ खड़े कर चुका है पिछले 5 से 6 वर्षों से ओवरलोडिंग जिला प्रशासन व सरकार के लिए नासूर बना हुआ है ओवरलोडिंग की वजह से जिले सहित क्षेत्र की सड़कें टूटी पड़ी हुई है सड़कों को जितने वजन के लिए सक्षम बनाया गया है उससे कहीं अधिक वजन उन पर चल रहा है ओवरलोड वाहन प्रशासन और सरकार के लिए एक बड़ी समस्या बनी गई है ये ओवर लोडिंग डंपर केवल सड़कों को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं ओवरलोडिंग वाहन एक गंभीर समस्या जिले में बनी हुई है जिसके लिए तत्काल सावधान की आवश्यकता है यदि इन वाहनों को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह न केवल सड़कों को नुकसान पहुंचाते रहेंगे बल्कि लोगों के जीवन को भी खतरे में डालते रहेंगे जहां सड़कों पर मौत के ओवरलोडिंग डंपर यमदूत बनकर दौड़ रहे हैं वहीं कई लोगों की जिंदगियां लील रहे हैं लेकिन उसके बाद भी प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा है तहसील कार्यालय एवं पुलिस थाने के सामने से ओवरलोडिंग वाहन सड़कों से बैखौफ गुजर रहे हैं जो लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं अवैध ओवरलोडिंग की समस्या पन्ना जिले एवं तहसील मुख्यालय पवई के लिए नासूर बन चुकी है ओवरलोडिंग के चलते लगभग डेढ़ सौ करोड़ की लागत से नवनिर्मित सड़के पूरी तरह से ध्वस्त होने की कगार की ओर पहुंच रही है वही ओवरलोड भरे गिट्टी रेता डंपरों ट्रकों से यात्रियों राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है रेता गिट्टी के ओवरलोडिंग के जो भयंकर दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं वे इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है भारी वाहनों में निर्धारित क्षमता से 3 से 4 गुना अधिक रेता गिट्टी परिवहन के चलते खनन क्षेत्रों की सड़कों का नामोनिशान मिटाने में लगे हुए हैं और जिले के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी एवं परिवहन विभाग के अफसर तमाशाबीन बने हुए हैं वहीं अक्सर देखा गया है ओवरलोडिंग पर प्रभावी अंकुश लगाने की बजाय जिला परिवहन अधिकारी कार्यवाही के नाम पर महज औपचारिकता पूरी करते हैं फलस्वरुप ओवरलोडिंग गिट्टी रेता की समस्या नासूर बन चुकी है इससे न सिर्फ शासन को दोहरी आर्थिक क्षति पहुंच रही है बल्कि खनन क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा है जो निश्चित ही चिंताजनक है जिला मुख्यालय के उच्चाधिकारियों को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए
