यूपी हिजाब विवाद पर मायावती की नसीहत, बोलीं- कोर्ट का चक्कर छोड़कर बैठकर सुलझाएं मसला; ओवैसी ने भी दिया बयान
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिजाब विवाद पर सियासत तेज, मायावती ने महिलाओं की गरिमा और पर्दे का सम्मान करने की बात कही, ओवैसी ने मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व पर जोर दिया।

# UP Hijab Row: हिजाब विवाद पर मायावती की नसीहत, ओवैसी ने मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व पर दिया जोर
**लखनऊ:** उत्तर प्रदेश में हिजाब को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। मायावती ने मामले में संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की नसीहत दी है, जबकि ओवैसी ने मुस्लिम समुदाय की अपनी राजनीतिक लीडरशिप की जरूरत पर जोर दिया।
## क्या है पूरा हिजाब विवाद?
मामला तब सामने आया जब एक छात्रा ने स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। छात्रा की ओर से अदालत में हिजाब पहनने की अनुमति देने की मांग की गई थी।
इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने की। दो जजों की बेंच ने छात्रा की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले के बाद हिजाब और स्कूल यूनिफॉर्म को लेकर बहस फिर तेज हो गई।
मामला केवल स्कूल ड्रेस कोड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
## मायावती ने दी बातचीत से विवाद सुलझाने की सलाह
बसपा प्रमुख मायावती ने हिजाब विवाद को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों को अनावश्यक रूप से विवाद का विषय बनाने के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं की गरिमा और पर्दे से जुड़े संवेदनशील पहलुओं का सम्मान किए जाने की बात कही।
मायावती की टिप्पणी को खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने अदालत में लंबे समय तक मामला चलाने के बजाय संबंधित पक्षों के बीच आपसी बातचीत से समाधान निकालने पर जोर दिया है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतना जरूरी है। समाज में तनाव पैदा करने के बजाय आपसी सहमति और संवाद के रास्ते से समाधान निकालना बेहतर होगा।
## ‘कोर्ट का चक्कर छोड़ो, बैठकर सुलझाओ मसला’
मायावती की प्रतिक्रिया का मुख्य संदेश यही रहा कि हिजाब और यूनिफॉर्म से जुड़े विवाद को बढ़ाने के बजाय बातचीत से हल किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से ऐसा कदम नहीं उठाने की सलाह दी जिससे सामाजिक तनाव बढ़े।
बसपा प्रमुख की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हिजाब को लेकर अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
मायावती ने महिलाओं की गरिमा और पर्दे के अधिकार से जुड़े पहलुओं को भी अपनी बात में शामिल किया। उनका कहना है कि संवेदनशील सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर टकराव के बजाय समझदारी और संयम का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
## ओवैसी ने भी दी प्रतिक्रिया
हिजाब विवाद के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया भी सामने आई। ओवैसी ने अदालत के फैसले और हिजाब के मुद्दे पर अपनी बात रखी।
उन्होंने मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। ओवैसी ने कहा कि जिस तरह दूसरे समुदायों की अपनी राजनीतिक लीडरशिप होती है, उसी तरह मुसलमानों की भी अपनी अलग राजनीतिक नेतृत्व व्यवस्था होनी चाहिए।
ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अपनी राजनीतिक आवाज मजबूत करने की जरूरत है। उनके बयान को उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
## यूपी चुनाव को लेकर भी बोले ओवैसी
इसी कार्यक्रम में असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और आगामी चुनाव को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अपनी राजनीतिक लीडरशिप के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।
ओवैसी का कहना है कि लोकतंत्र में हर समुदाय को अपनी राजनीतिक आवाज और नेतृत्व खड़ा करने का अधिकार है। उन्होंने मुस्लिम समाज से राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने और अपने मुद्दों को मजबूती से उठाने की अपील की।
उनके इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में मुस्लिम वोट और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है।
## हिजाब विवाद ने फिर पकड़ा राजनीतिक रंग
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई बहस अब अदालत से बाहर राजनीतिक मंच तक पहुंच गई है। एक तरफ मायावती ने विवाद को बातचीत और संयम के जरिए सुलझाने की सलाह दी है, वहीं ओवैसी ने इसे मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के सवाल से भी जोड़ दिया।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों नेताओं के बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हिजाब, धार्मिक स्वतंत्रता, महिला गरिमा और स्कूल यूनिफॉर्म जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मायावती जहां बातचीत और आपसी समाधान पर जोर दे रही हैं, वहीं ओवैसी मुस्लिम समुदाय की स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व की जरूरत की बात कर रहे हैं।
**स्रोत:** आजतक — यूपी हिजाब विवाद, मायावती और असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया। [मूल खबर पढ़ें]

