मैंगलोर में पद्मश्री हरेकला हजब्बा को नोटिस देने पर बवाल, अधिकारियों ने घर पहुंचकर मांगी माफी
पुरानी मतदाता सूची में नाम सिर्फ ‘हजब्बा’ दर्ज होने के आधार पर चुनाव अधिकारियों ने नोटिस जारी कर दिया था. गलती सामने आने के बाद अधिकारियों ने नोटिस वापस लिया और दस्तावेज लेकर घर पहुंचकर माफी मांगी.

# पद्मश्री हरेकला हजब्बा को चुनावी नोटिस, गलती सामने आई तो घर पहुंचकर अधिकारियों ने मांगी माफी
**मैंगलोर:** कर्नाटक के मैंगलोर में चुनाव अधिकारियों की एक बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। प्रख्यात साक्षरता कार्यकर्ता और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हरेकला हजब्बा को चुनाव अधिकारियों की ओर से एक नोटिस जारी किया गया था। मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने अपनी गलती स्वीकार की और हरेकला हजब्बा के घर पहुंचकर उनसे माफी मांगी।
बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद पुरानी मतदाता सूची में नाम दर्ज होने को लेकर सामने आया। अधिकारियों ने 2002 की मतदाता सूची में दर्ज नाम और बाद के आधिकारिक दस्तावेजों में मौजूद नाम के बीच अंतर के आधार पर कार्रवाई की थी।
## 2002 की वोटर लिस्ट में सिर्फ ‘हजब्बा’ नाम
दरअसल, 2002 की पुरानी मतदाता सूची में हरेकला हजब्बा का नाम सिर्फ **’हजब्बा’** के तौर पर दर्ज था। वहीं, बाद में जारी किए गए आधिकारिक दस्तावेजों और पहचान पत्रों में उनका पूरा नाम हरेकला हजब्बा दर्ज है।
इसी नाम के अंतर को लेकर चुनाव अधिकारियों की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया। नोटिस सामने आने के बाद मामले को लेकर सवाल उठने लगे कि एक पद्मश्री सम्मानित व्यक्ति के आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज नाम के बावजूद पुरानी मतदाता सूची में नाम के अंतर को लेकर इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई।
## गलती का अहसास हुआ तो घर पहुंचे अधिकारी
मामला सामने आने के बाद अधिकारियों को अपनी गलती का एहसास हुआ। इसके बाद अधिकारी हरेकला हजब्बा के घर पहुंचे और उनसे माफी मांगी।
अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेज भी अपने साथ रखे और पूरे मामले को स्पष्ट किया। इसके बाद जारी किए गए नोटिस को वापस लेने की कार्रवाई की गई।
अधिकारियों की इस कार्रवाई के बाद फिलहाल विवाद को खत्म करने की कोशिश की गई है।
## शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा योगदान
हरेकला हजब्बा कर्नाटक के जाने-माने साक्षरता कार्यकर्ता हैं। उन्हें अपने गांव हरेकला में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।
उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने गांव और आसपास के बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था खड़ी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों के कारण उन्हें देशभर में पहचान मिली।
हरेकला हजब्बा का जीवन शिक्षा के प्रति समर्पण और सामाजिक सेवा की मिसाल माना जाता है। इसी योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
## नाम के अंतर से पैदा हुआ पूरा विवाद
इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि पुरानी मतदाता सूची में दर्ज नाम और बाद के आधिकारिक दस्तावेजों में मौजूद नाम के अंतर को किस तरह देखा जाना चाहिए। पुरानी सूची में सिर्फ ‘हजब्बा’ नाम दर्ज होने और बाद के दस्तावेजों में पूरा नाम होने की वजह से चुनाव प्रक्रिया के दौरान यह स्थिति पैदा हुई।
हालांकि, अधिकारियों द्वारा गलती स्वीकार किए जाने और हरेकला हजब्बा से माफी मांगने के बाद मामले में राहत मिली है।
## प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा
पद्मश्री सम्मानित हरेकला हजब्बा को नोटिस जारी किए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। इसके बाद अधिकारियों ने तुरंत स्थिति संभालने की कोशिश की।
अधिकारियों का हरेकला हजब्बा के घर जाकर माफी मांगना इस बात का संकेत है कि नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में गलती हुई थी। अब संबंधित दस्तावेजों के आधार पर मामले को ठीक किया जा रहा है।
फिलहाल हरेकला हजब्बा को जारी नोटिस वापस लिया जा चुका है और अधिकारियों की ओर से माफी मांगे जाने के बाद विवाद शांत होने की उम्मीद है।



