उत्तर प्रदेश

मेरठ सेंट्रल मार्केट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 16,726 संपत्तियों की सीलिंग का आदेश

शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में आवासीय प्लॉटों पर हुए अवैध व्यावसायिक निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और कार्रवाई के निर्देश दिए।

**मेरठ सेंट्रल मार्केट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 16,726 संपत्तियों की सीलिंग का आदेश**

मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में आवासीय प्लॉटों पर किए गए अवैध व्यावसायिक निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। 21 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में अदालत ने मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के जोन-ए सर्वे में चिन्हित **16,726 अनधिकृत भवनों को सील करने के निर्देश** दिए। मामला केवल सेंट्रल मार्केट तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के दूसरे हिस्सों में भी अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल की जांच का दायरा बढ़ गया है।

### अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

सुनवाई के दौरान अदालत ने अवैध निर्माण को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। रिपोर्टों के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि कोई निर्माण लंबे समय से मौजूद होने के कारण वैध नहीं हो जाता। सेंट्रल मार्केट में आवासीय स्वीकृति वाली संपत्तियों पर अतिरिक्त निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में अदालत ने कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

### 16,726 भवनों पर सीलिंग की कार्रवाई

मेडा की ओर से कोर्ट में जोन-ए की सर्वे रिपोर्ट पेश की गई। इसमें **16,726 भवनों को अनधिकृत** बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में बेगमपुल, लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी, भगवतपुरा और तारापुरी समेत कई इलाके शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इन चिन्हित संपत्तियों को सील करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही बाकी जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी की रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। अगली सुनवाई के दौरान इन क्षेत्रों की स्थिति भी सामने आ सकती है।

### सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों पर भी कार्रवाई

सेंट्रल मार्केट से जुड़े मामले में पहले से चिन्हित **44 संपत्तियों** पर भी कार्रवाई जारी है। कोर्ट में पेश रिपोर्ट के अनुसार इनमें छह भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए थे और उन्हें ध्वस्त किया जा चुका है। वहीं 38 संपत्तियों में आवासीय स्वीकृति होने के बावजूद अतिरिक्त निर्माण और व्यावसायिक इस्तेमाल का मामला सामने आया।

रिपोर्ट के मुताबिक 44 में से 24 संपत्तियों के अवैध निर्माण आवंटियों की ओर से हटाए जा चुके हैं, जबकि बाकी 20 में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी 44 संपत्तियों पर कार्रवाई पूरी कर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

### सेटबैक में अवैध निर्माण भी जांच के दायरे में

मामले की सुनवाई के दौरान सेटबैक में किए गए अवैध निर्माण का मुद्दा भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार **201 संपत्तियों** में सेटबैक क्षेत्र में अवैध निर्माण पाया गया था। इनमें से 63 संपत्तियों में अवैध निर्माण हटाया जा चुका है, जबकि बाकी पर कार्रवाई जारी बताई गई है।

### पूरे मेरठ में सर्वे का दायरा बढ़ेगा

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मेरठ में अवैध निर्माण और नियमों के विपरीत व्यावसायिक इस्तेमाल वाली संपत्तियों की जांच का दायरा बढ़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार पूरे शहर में करीब **4.75 लाख भवनों** का सर्वे किया जाना है। पहले चरण में जोन-ए का सर्वे पूरा हुआ है और अन्य जोन की रिपोर्ट भी तैयार की जानी है।

मेडा के सर्वे में यह देखा जा रहा है कि संबंधित भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है, नक्शा स्वीकृत है या नहीं और निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप है या नहीं। खास तौर पर आवासीय भवनों में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों की पहचान की जा रही है।

### उल्देपुर की अवैध कॉलोनियों का मामला भी उठा

सुनवाई के दौरान मेरठ के बाहरी क्षेत्र उल्देपुर में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों का मामला भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को वहां अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए और यह सवाल उठाया कि कई वर्षों से चल रही गतिविधियों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

### 9 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए **9 दिसंबर 2026** की तारीख तय की है। तब तक संबंधित अधिकारियों को अदालत के निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इसमें सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों पर हुई कार्रवाई के साथ-साथ जोन-ए की 16,726 संपत्तियों की सीलिंग और अन्य जोन के सर्वे की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।

मेरठ सेंट्रल मार्केट से शुरू हुआ यह मामला अब शहर में अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल की व्यापक जांच से जुड़ गया है। आगे की कार्रवाई मेडा की सर्वे रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन पर निर्भर करेगी।

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