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महायुति में खींचतान खत्म करने की कवायद, निगमों के बंटवारे का फॉर्मूला तय

सीएम देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर हुई बैठक में विधायकों की संख्या के आधार पर सरकारी निगमों के बंटवारे पर सहमति बनी।

महायुति सरकार में खींचतान खत्म करने की कवायद, निगमों के बंटवारे का फॉर्मूला तय

महाराष्ट्र की महायुति सरकार के भीतर जारी मतभेद दूर करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहल तेज कर दी है। मुंबई स्थित अपने सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर उन्होंने गठबंधन के प्रमुख नेताओं के साथ अहम बैठक की। इस दौरान सरकारी निगमों और विभिन्न संस्थाओं में नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में सरकारी निगमों के बंटवारे के लिए विधायकों की संख्या को आधार बनाने पर सहमति बनी। इस फॉर्मूले के तहत विधानसभा में जिस दल के जितने अधिक विधायक हैं, उसे उसी अनुपात में निगमों और महत्वपूर्ण पदों में हिस्सेदारी मिलने की संभावना है। महायुति में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ा घटक दल है, इसलिए उसे अधिक पद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को भी उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी के अनुरूप प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।

सरकारी निगमों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां महाराष्ट्र की राजनीति में अहम मानी जाती हैं। ऐसे पदों के माध्यम से गठबंधन के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाती है, जिन्हें मंत्रिमंडल या अन्य प्रमुख पदों पर अवसर नहीं मिला है। यही वजह है कि नियुक्तियों और हिस्सेदारी को लेकर सहयोगी दलों के बीच लंबे समय से असहमति की चर्चा चल रही थी।

मुख्यमंत्री फडणवीस की कोशिश है कि बंटवारे के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाकर घटक दलों के बीच अविश्वास और अनावश्यक विवाद कम किए जाएं। बैठक में गठबंधन के नेताओं के बीच बेहतर संवाद, समन्वय और भविष्य में विवादों को आपसी बातचीत से सुलझाने पर भी जोर दिया गया।

हाल के दिनों में विकास कार्यों के श्रेय, स्थानीय राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक फैसलों को लेकर महायुति के सहयोगी दलों के बीच मतभेद सामने आए थे। ऐसे में सरकारी निगमों के बंटवारे पर सहमति को गठबंधन के भीतर संतुलन कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

फिलहाल विभिन्न दलों को मिलने वाले निगमों और पदों की अंतिम संख्या के संबंध में विस्तृत आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। आने वाले दिनों में नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज होने और गठबंधन के नेताओं के बीच आगे भी समन्वय बैठकों का दौर जारी रहने की संभावना है।

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