देश का Dedicated Freight Corridor नेटवर्क हुआ पूरी तरह ऑपरेशनल, तेज होगी माल ढुलाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अहम सेक्शन का उद्घाटन किया। WDFC और EDFC के ऑपरेशनल होने से मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और पुराने रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा।

# Dedicated Freight Corridor नेटवर्क हुआ पूरी तरह ऑपरेशनल, JNPT से दादरी तक तेज होगी माल ढुलाई
**नई दिल्ली:** देश के माल ढुलाई नेटवर्क के लिए मंगलवार का दिन अहम रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के महत्वपूर्ण सेक्शन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही देश में माल ढुलाई के लिए बनाए जा रहे Dedicated Freight Corridor नेटवर्क को बड़ा विस्तार मिला है।
DFC के पूरी तरह ऑपरेशनल होने से मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होने, माल परिवहन में लगने वाले समय और लागत को कम करने तथा पुराने रेलवे नेटवर्क पर दबाव घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
## JNPT से दादरी तक ऑपरेशनल हुआ WDFC
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) से दिल्ली के पास दादरी तक फैला है। यह कॉरिडोर पश्चिमी भारत के प्रमुख बंदरगाहों को उत्तर भारत के औद्योगिक और कारोबारी क्षेत्रों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है।
गुजरात और राजस्थान से गुजरने वाला यह फ्रेट नेटवर्क देश के समुद्री बंदरगाहों से आने वाले माल को उत्तर भारत तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है।
WDFC के जरिए मालगाड़ियों को अलग और समर्पित रेल मार्ग उपलब्ध होता है। इससे यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के लिए एक ही ट्रैक पर निर्भरता कम होती है।
## नमक-कोयले से सीमेंट तक की तेज ढुलाई
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर अलग-अलग तरह के माल की आवाजाही होती है। WDFC के जरिए JNPT, मुंबई पोर्ट, पिपावाव, मुंद्रा और कांडला जैसे प्रमुख बंदरगाहों से आने वाले ISO कंटेनरों की ढुलाई की जाती है।
इसके अलावा नमक, कोयला, सीमेंट और अन्य औद्योगिक सामान को भी इस नेटवर्क के जरिए तेज गति से ले जाने की सुविधा मिलती है।
समर्पित माल गलियारा होने की वजह से मालगाड़ियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से चलाया जा सकता है। इससे लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
## पुराने रेल नेटवर्क पर घटेगा दबाव
Dedicated Freight Corridor की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि देश के प्रमुख रेलवे रूट लंबे समय से माल और यात्री ट्रेनों के भारी दबाव में रहे हैं।
एक ही रेल नेटवर्क पर यात्री और मालगाड़ियों के संचालन के कारण मालगाड़ियों की गति और समयबद्धता प्रभावित होती थी। DFC के जरिए मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक उपलब्ध होने से पुराने रेलवे नेटवर्क पर दबाव कम करने की कोशिश की गई है।
इसका फायदा यात्री ट्रेनों के संचालन को भी मिल सकता है, क्योंकि व्यस्त रेल मार्गों पर मालगाड़ियों के लिए अलग कॉरिडोर उपलब्ध होगा।
## EDFC भी ऑपरेशनल
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) देश का दूसरा बड़ा फ्रेट नेटवर्क है। यह करीब 1,337 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर है और उत्तर भारत के महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ता है।
WDFC और EDFC दोनों के ऑपरेशनल होने से देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच माल ढुलाई के लिए समर्पित रेल नेटवर्क तैयार हुआ है।
इन दोनों कॉरिडोर का उद्देश्य माल परिवहन को तेज, अधिक कुशल और व्यवस्थित बनाना है।
## रोज 426 से ज्यादा फ्रेट ट्रेनें
DFC नेटवर्क के कारण मालगाड़ियों की औसत रफ्तार में भी बड़ा सुधार हुआ है। दोनों कॉरिडोर पर बड़ी संख्या में फ्रेट ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
बताया गया है कि नेटवर्क पर रोजाना 426 से ज्यादा फ्रेट ट्रेनें चल रही हैं। समर्पित कॉरिडोर उपलब्ध होने से मालगाड़ियों को अधिक गति और बेहतर परिचालन व्यवस्था मिल रही है।
तेज माल ढुलाई का सीधा असर कारोबार और लॉजिस्टिक्स लागत पर पड़ सकता है। सामान को कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है।
## रेलवे से माल ढुलाई बढ़ाने का लक्ष्य
देश में कुल माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 27 फीसदी बताई गई है। सरकार का लक्ष्य रेलवे के जरिए माल परिवहन की हिस्सेदारी को और बढ़ाना है।
नेशनल रेल प्लान के तहत 2030 तक रेलवे की माल ढुलाई हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। Dedicated Freight Corridor इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जाता है।
रेल के जरिए अधिक माल परिवहन होने से सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
## 2005 में शुरू हुई थी प्रोजेक्ट की प्लानिंग
Dedicated Freight Corridor प्रोजेक्ट की योजना पर पहली गंभीर चर्चा अप्रैल 2005 में भारत और जापान के बीच हुई बैठक के दौरान हुई थी।
इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। यूपीए सरकार के आखिरी वर्षों तक जमीन अधिग्रहण, कुछ सेक्शनों के कॉन्ट्रैक्ट और शुरुआती निर्माण का काम आगे बढ़ चुका था।
हालांकि, मार्च 2014 तक EDFC और WDFC का पूरा नेटवर्क तैयार नहीं हुआ था। इसके बाद परियोजना के अलग-अलग हिस्सों पर निर्माण और परिचालन का काम आगे बढ़ता गया।
## देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के लिए बड़ा कदम
Dedicated Freight Corridor के विस्तार को भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
WDFC के JNPT से दादरी तक कनेक्शन और EDFC के ऑपरेशनल होने से देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों और बाजारों के बीच माल परिवहन की क्षमता बढ़ी है।
आने वाले समय में DFC नेटवर्क के बेहतर इस्तेमाल से माल ढुलाई का समय कम करने, लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और रेलवे की माल परिवहन में हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।



