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दलीप ट्रॉफी में 35 साल पुरानी यादें ताजा, वैभव सूर्यवंशी-तिलक वर्मा की बहस ने दिलाया रमण लांबा विवाद का किस्सा

दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी और साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा के बीच हुई बातचीत ने पुराने घरेलू क्रिकेट विवाद की यादें ताजा कर दीं. 35 साल पहले राशिद पटेल और रमण लांबा के बीच हुआ विवाद आज भी क्रिकेट इतिहास में चर्चित है.

# दलीप ट्रॉफी में वैभव-तिलक की बहस ने दिलाई 35 साल पुराने रमण लांबा-राशिद पटेल विवाद की याद

**नई दिल्ली:** क्रिकेट में कुछ मुकाबले सिर्फ स्कोरबोर्ड की वजह से याद नहीं रहते। उन्हें उन घटनाओं के लिए याद किया जाता है, जब मैदान पर मुकाबले का तनाव अचानक व्यक्तिगत टकराव में बदल जाता है। दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब 15 साल के वैभव सूर्यवंशी और साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा के बीच मैदान पर बातचीत कैमरों में कैद हुई।

इस घटना ने भारतीय घरेलू क्रिकेट के एक पुराने और बेहद चर्चित विवाद की याद ताजा कर दी। दोनों घटनाओं के बीच करीब 35 साल का अंतर है। एक तरफ क्रिकेट की नई पीढ़ी के चर्चित खिलाड़ी हैं, तो दूसरी तरफ 1990 के दशक के भारतीय क्रिकेट से जुड़ा रमण लांबा और राशिद पटेल का विवाद है।

## वैभव सूर्यवंशी और तिलक वर्मा के बीच क्या हुआ?

दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले के दौरान वैभव सूर्यवंशी और तिलक वर्मा के बीच मैदान पर कुछ बातचीत हुई। साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा वैभव के करीब पहुंचे और दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई।

कैमरों ने इस पूरे पल को रिकॉर्ड कर लिया। इस दृश्य ने इसलिए भी ध्यान खींचा क्योंकि एक तरफ महज 15 साल के वैभव सूर्यवंशी थे और दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके तिलक वर्मा।

हालांकि, दोनों के बीच हुई बातचीत में क्या कहा गया, यह स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आया है। लेकिन मैदान पर खिलाड़ियों के बीच हुई इस बातचीत ने क्रिकेट प्रशंसकों को पुराने दौर की एक चर्चित घटना की याद जरूर दिला दी।

## 35 साल पुराना रमण लांबा-राशिद पटेल विवाद

करीब 35 साल पहले भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक ऐसा विवाद हुआ था, जिसने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। यह घटना रमण लांबा और राशिद पटेल से जुड़ी थी।

मैच के पांचवें और आखिरी दिन नॉर्थ जोन की जीत पहली पारी की बढ़त के आधार पर तय मानी जा रही थी। इसी दौरान मैदान पर विवाद बढ़ गया और राशिद पटेल ने अपना आपा खो दिया।

बताया जाता है कि विवाद के बाद राशिद पटेल ने स्टंप उखाड़ लिया और रमण लांबा की तरफ बढ़े। उन्होंने लांबा पर हमला करने की कोशिश की और उन्हें बाउंड्री लाइन तक दौड़ाया। इस घटना ने घरेलू क्रिकेट में अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

## राशिद पटेल पर लगा था 13 महीने का प्रतिबंध

घटना के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। राशिद पटेल पर 13 महीने का प्रतिबंध लगाया गया था। वहीं, रमण लांबा पर भी 10 महीने का बैन लगा था।

यह मामला भारतीय घरेलू क्रिकेट के उन विवादों में शामिल हो गया, जिन्हें लंबे समय तक याद किया गया। मैदान पर खिलाड़ियों के बीच बढ़े विवाद और उसके बाद हुई कार्रवाई ने क्रिकेट जगत में काफी चर्चा पैदा की थी।

## रमण लांबा का क्रिकेट करियर

रमण लांबा भारतीय क्रिकेट के जाने-पहचाने खिलाड़ियों में शामिल रहे। उन्होंने भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट भी खेला और घरेलू क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी के दम पर अलग पहचान बनाई।

उनके करियर में आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ मैदान पर उनकी चुस्ती भी चर्चा में रहती थी। वह शॉर्ट लेग जैसी संवेदनशील फील्डिंग पोजीशन पर भी नजर आते थे।

हालांकि, उनके क्रिकेट करियर की कहानी का अंत बेहद दुखद रहा।

## 1998 में मैदान पर हुआ दर्दनाक हादसा

रमण लांबा की 1998 में बांग्लादेश में क्लब क्रिकेट खेलते समय गंभीर चोट लगने के बाद मौत हो गई थी। शॉर्ट लेग पर फील्डिंग के दौरान गेंद उनके सिर पर लगी थी।

गेंद लगने के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

इस हादसे ने क्रिकेट जगत को झकझोर कर रख दिया था और हेलमेट तथा शॉर्ट लेग जैसी खतरनाक फील्डिंग पोजीशन पर सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे थे।

## एक तरफ नई पीढ़ी, दूसरी तरफ पुरानी याद

दलीप ट्रॉफी में वैभव सूर्यवंशी और तिलक वर्मा के बीच दिखाई दिया यह पल किसी बड़े विवाद में बदलता नजर नहीं आया। लेकिन इसने क्रिकेट के उस दौर की याद जरूर दिला दी, जब घरेलू मुकाबलों में खिलाड़ियों के बीच टकराव कई बार बेहद गंभीर रूप ले लेते थे।

आज क्रिकेट में खिलाड़ियों की सुरक्षा, अनुशासन और मैदान पर व्यवहार को लेकर नियम पहले की तुलना में काफी सख्त हैं। ऐसे में पुराने विवादों को याद करना यह दिखाता है कि भारतीय क्रिकेट ने मैदान पर आक्रामकता और अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की दिशा में लंबा सफर तय किया है।

दलीप ट्रॉफी का यह मुकाबला भी अब सिर्फ नतीजे के लिए नहीं, बल्कि मैदान पर बने उन दिलचस्प पलों के कारण चर्चा में है, जिन्होंने क्रिकेट के पुराने अध्याय को फिर से याद करा दिया।

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