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तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था विभाग को RTI से बाहर रखने का फैसला लिया वापस, विपक्ष ने उठाए सवाल

विजय सरकार ने 21 सितंबर के सरकारी आदेश को किया रद्द, RTI Act की धारा 24(4) के तहत कानून-व्यवस्था विभाग को मिली छूट अब लागू नहीं रहेगी

# तमिलनाडु सरकार ने RTI से कानून-व्यवस्था विभाग को बाहर रखने का फैसला लिया वापस, विपक्ष ने उठाए सवाल

**दीप सिंह लखनऊ मुख्य संवाददाता दैनिक रुस्तम-ए-हिंद**

**चेन्नई।** तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेत्री कझगम (TVK) सरकार ने कानून-व्यवस्था विभाग को सूचना का अधिकार यानी **RTI Act, 2005** के दायरे से बाहर रखने का फैसला वापस ले लिया है। सरकार ने कहा है कि मानव संसाधन प्रबंधन विभाग की ओर से जारी संबंधित सरकारी आदेश अब प्रभावी नहीं रहेगा। यह फैसला उस समय सामने आया जब कानून-व्यवस्था विभाग को RTI से छूट देने के कदम पर विपक्षी दलों और नेताओं ने सवाल उठाए।

## 21 सितंबर को जारी हुआ था सरकारी आदेश

मामला मानव संसाधन प्रबंधन विभाग के **21 सितंबर 2026** के सरकारी आदेश से जुड़ा है। इस आदेश के तहत तमिलनाडु के Public (Law and Order) Department को RTI Act की धारा 24(4) के तहत एक इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन के तौर पर अधिसूचित किया गया था।

सरकार के आदेश में कहा गया था कि संबंधित विभाग पर RTI कानून लागू नहीं होगा। इसके बाद कानून-व्यवस्था से जुड़े कई विषयों की जानकारी RTI के जरिए हासिल करने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।

हालांकि, विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद सरकार ने अब इस आदेश को रद्द कर दिया है। सरकार के मुताबिक, **Government Order Ms.No 57** अब लागू नहीं रहेगा।

## किन मामलों की जानकारी पर पड़ सकता था असर?

Public (Law and Order) Department के दायरे में कानून-व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले आते हैं। इनमें पुलिस फायरिंग की जांच रिपोर्ट, पुलिस हिरासत में मौत, पुलिस यातना और रिमांड में बंद कैदियों की मौत से संबंधित रिपोर्ट शामिल हैं।

इसके अलावा विभाग सांप्रदायिक और जातीय झड़पों, राजनीतिक आंदोलनों, छात्रों और विभिन्न संगठनों के आंदोलनों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) और COFEPOSA के तहत हिरासत से जुड़े मामलों को भी देखता है।

विभाग राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जुड़े मामलों और कानून-व्यवस्था संबंधी रिपोर्टों पर भी काम करता है। ऐसे में RTI के दायरे से विभाग को बाहर करने के फैसले को लेकर पारदर्शिता और सार्वजनिक जानकारी की उपलब्धता पर चर्चा शुरू हो गई थी।

## विपक्ष ने फैसले पर जताई आपत्ति

सरकार के शुरुआती फैसले पर विपक्षी नेताओं ने आपत्ति जताई। कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने कहा कि RTI का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। उन्होंने कानून-व्यवस्था विभाग को RTI के दायरे से बाहर करने के कदम पर सवाल उठाए।

CPI(M) सांसद एस. वेंकटेशन ने भी सरकार के फैसले की आलोचना की और इसे वापस लेने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे फैसले से कानून-व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सार्वजनिक निगरानी प्रभावित हो सकती है। यह विपक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया थी।

## TVK ने पहले क्या कहा था?

सरकार की ओर से पहले इस फैसले का स्पष्टीकरण भी दिया गया था। TVK मंत्री CTR निर्मल कुमार ने कहा था कि कानून-व्यवस्था विभाग के सभी विषयों को RTI से बाहर करने का उद्देश्य नहीं था। उनके मुताबिक विभाग के करीब 20 सेक्शनों में से कुछ संवेदनशील हिस्सों को ही छूट देने की बात थी, खासकर सामुदायिक झड़पों से जुड़ी जानकारी को लेकर।

मंत्री ने यह भी कहा था कि यदि आम लोगों को इस व्यवस्था को लेकर आपत्ति है, तो मामले को मुख्यमंत्री के सामने दोबारा रखा जा सकता है। इसके बाद सरकार ने संबंधित आदेश को वापस लेने का फैसला किया।

## RTI की धारा 24(4) क्या कहती है?

RTI Act की धारा 24 के तहत कुछ खुफिया और सुरक्षा संगठनों को कानून के दायरे से छूट दी जा सकती है। तमिलनाडु सरकार ने इसी प्रावधान की धारा 24(4) के तहत Public (Law and Order) Department को इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन के तौर पर अधिसूचित किया था।

हालांकि RTI कानून में छूट पूरी तरह निरपेक्ष नहीं है। राज्य सूचना आयोग की जानकारी के अनुसार, छूट प्राप्त संगठनों से भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित जानकारी के लिए कानून में विशेष प्रावधान मौजूद हैं।

## अब क्या बदलेगा?

सरकार द्वारा Government Order Ms.No 57 को वापस लेने के बाद कानून-व्यवस्था विभाग को RTI से बाहर रखने वाला यह विशेष आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। इसका मतलब है कि इस आदेश के आधार पर विभाग को RTI से पूर्ण छूट देने की व्यवस्था लागू नहीं होगी। हालांकि किसी RTI आवेदन पर जानकारी उपलब्ध कराने या रोकने का फैसला RTI Act के अन्य लागू प्रावधानों और मांगी गई जानकारी की प्रकृति के आधार पर होगा।

फिलहाल तमिलनाडु सरकार के इस फैसले के बाद RTI और कानून-व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता को लेकर जारी राजनीतिक बहस पर विराम लगने की उम्मीद है। सरकार ने अपने पहले के आदेश को वापस लेकर यह स्पष्ट कर दिया है कि 21 सितंबर को जारी संबंधित छूट आदेश अब लागू नहीं रहेगा।

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