चार माह से राशन के लिए तरसे ग्रामीण, 8 घंटे तक सड़क पर चक्काजाम*
*चार माह से राशन के लिए तरसे ग्रामीण, 8 घंटे तक सड़क पर चक्काजाम*


*रैपुरा क्षेत्र के मनकोरा गांव में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल कनिष्ठ खाद्य अधिकारी प्रदीप त्रिपाठी के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा*
रिपोर्टर –
पन्ना। पन्ना जिले के ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। रैपुरा क्षेत्र के ग्राम मनकोरा में पिछले चार माह से राशन नहीं मिलने से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने गुरुवार को सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित ग्रामीणों ने करीब 8 घंटे तक चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और खाद्यान्न वितरण व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की।
*चार माह से राशन नहीं मिलने का आरोप*
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पात्र हितग्राहियों को लगातार चार माह से खाद्यान्न का वितरण नहीं किया गया। राशन नहीं मिलने के कारण गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के सामने रोजमर्रा के भोजन का संकट खड़ा हो गया। ग्रामीणों का कहना था कि कई बार संबंधित अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
*कनिष्ठ खाद्य अधिकारी के खिलाफ आक्रोश*
विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में वर्षों से पदस्थ बताए जा रहे कनिष्ठ खाद्य अधिकारी प्रदीप त्रिपाठी के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारी से संपर्क करने के लिए फोन किया जाता है, लेकिन कई बार फोन रिसीव नहीं किया जाता। इससे ग्रामीणों में असंतोष और बढ़ गया।
ग्रामीणों का कहना था कि जब उन्हें समय पर राशन नहीं मिलता और शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्या सुनने के लिए उपलब्ध नहीं होते, तो आखिर वे अपनी समस्या लेकर किसके पास जाएं।
*कलेक्टर से की सीधी बात*
स्थिति बिगड़ने पर ग्रामीणों ने पन्ना कलेक्टर उषा परमार से फोन पर संपर्क कर अपनी समस्या बताई। ग्रामीणों ने कलेक्टर को चार माह से राशन नहीं मिलने और सड़क पर किए जा रहे आंदोलन की पूरी जानकारी दी। बताया जाता है कि कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद खाद्य विभाग के कनिष्ठ खाद्य अधिकारी प्रदीप त्रिपाठी करीब छह घंटे बाद मौके पर पहुंचे।
अधिकारी के पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने उनके सामने अपनी समस्याएं रखीं और राशन वितरण में कथित लापरवाही को लेकर जमकर नाराजगी व्यक्त की।
*आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला*
लगातार कई घंटे चले चक्काजाम के कारण आवागमन प्रभावित रहा। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याओं को सुना और खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को लेकर आवश्यक कार्रवाई एवं समाधान का आश्वासन दिया। प्रशासन की समझाइश और आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन समाप्त किया और सड़क पर आवागमन सामान्य हो सका।
*व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल*
मनकोरा की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि किसी गांव के पात्र हितग्राहियों को लगातार चार माह तक राशन नहीं मिलता है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों की ओर से समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं ली गई? ग्रामीणों को अपनी समस्या के समाधान के लिए घंटों सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की नौबत क्यों आई?
फिलहाल ग्रामीणों में खाद्य विभाग के कनिष्ठ अधिकारी प्रदीप त्रिपाठी को लेकर खासा आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में पात्र हितग्राहियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए।