कांवड़ यात्रा में बच्चों की पुकार पहुंची DM तक, पढ़ाई का सपना बचाने के लिए उठाया कदम
Four children facing financial difficulties had to stop their studies; after the matter reached social media, the administration stepped in and took action.

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के कोसीकलां क्षेत्र के चार बच्चों की कहानी इन दिनों चर्चा में है। आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे परिवार के बच्चों ने कांवड़ यात्रा के दौरान भगवान भोलेनाथ से एक अनोखी मन्नत मांगी थी कि उनकी स्कूल फीस माफ हो जाए और वे दोबारा पढ़ाई जारी रख सकें। बच्चों की यह इच्छा सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसके बाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया।
मामला कोसीकलां क्षेत्र के भटैन गांव का है। यहां रहने वाले भरत सिंह का परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था। परिवार की आय सीमित होने के कारण बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पा रही थी। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने लगी थी।
चारों बच्चों ने हरिद्वार से कांवड़ यात्रा शुरू की और गंगाजल लेकर भगवान शिव से प्रार्थना की कि उनकी पढ़ाई फिर से शुरू हो सके। बच्चों की भक्ति और उनकी परेशानी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद मथुरा के जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और अधिकारियों को परिवार की स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए। इसके बाद एसडीएम छाता और बेसिक शिक्षा अधिकारी की टीम ने गांव पहुंचकर परिवार की आर्थिक स्थिति की जानकारी ली।
जांच में सामने आया कि भरत सिंह पहले नौकरी करते थे, लेकिन आर्थिक परेशानियों के कारण अब छोटी किराना दुकान चलाते हैं। उनकी पत्नी सिलाई का काम करके परिवार की मदद करती हैं। दंपति के चार बच्चे हैं, जिनमें से एक बच्चा नगर पालिका इंटर कॉलेज में पढ़ता है, जबकि तीन बच्चे कोसीकलां के आदर्श विद्या मंदिर में पढ़ाई कर रहे हैं।
प्रशासन की पहल के बाद स्कूल ने बच्चों की फीस माफ कर दी। एक बच्चे की फीस पहले ही माफ हो चुकी थी, जबकि बाकी दो बच्चों की फीस भी प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद माफ कर दी गई। बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म, किताबें और बैग समेत जरूरी शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
इसके अलावा परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर के लिए मंजूरी भी मिली है। योजना के तहत स्वीकृत राशि में से पहली किस्त जारी हो चुकी है और निर्माण कार्य शुरू हो गया है। अधिकारियों ने बच्चों की पढ़ाई पर आगे भी नजर रखने की बात कही है।
चार बच्चों की आस्था और शिक्षा के प्रति लगाव ने लोगों का ध्यान खींचा। उनकी छोटी सी मन्नत ने न सिर्फ प्रशासन को मदद के लिए आगे आने को प्रेरित किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि आर्थिक परेशानियों के बावजूद शिक्षा की उम्मीद को जिंदा रखा जा सकता है।



