*कलेक्टर ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर नरवाई जलाने पर लगाया प्रतिबंध*
रिपोर्टर – एम पी सी जी Sky इंडिया टीवी से एमपी हेड मोहम्मद शमीम अहमद खान की रिपोर्ट
पन्ना कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर जनसामान्य के स्वास्थ्य हित एवं लोक शांति बनाए रखने के दृष्टिगत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर संपूर्ण पन्ना जिले में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। उक्तादेश आगामी 2 माह तक प्रभावशील रहेगा। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास सहित संबंधित एसडीएम, नगरीय निकायों के अधिकारी तथा पुलिस अधिकारीगण आदेश का पालन सुनिश्चित कराएंगे। अब प्रतिबंधात्मक अवधि में फसलों की कटाई में उपयोग किए जाने वाले कंबाईन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग अनिवार्य होगा। नरवाई से भूसा प्राप्त करने के इच्छुक कृषकों की मांग पर स्ट्रा मैनेजमेंट के स्थान पर स्ट्रा रीपर के उपयोग को अनिवार्य किया जा सकता है अर्थात् कंबाईन हार्वेस्टर के साथ कोई भी एक मशीन जरूरी है अन्यथा वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
विदित हो कि जिले के विभिन्न स्थानों पर कतिपय किसानों द्वारा गेहूं फसल कटाई पश्चात शेष नरवाई जला दी जाती है, जिससे खेत में फसलों को लाभ पहहुचाने वाले तत्व भी जल जाते हैं तथा नरवाई में आग लगाने से धुंआ एवं आग की लपटों से आगजनी की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। दूषित वातावरण निर्मित होने के साथ यह स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत हानिकारक है। इससे कई बार कानून व्यवस्था की स्थिति भी निर्मित होती है। इसके अलावा खेत में फसल अवशेष या नरवाई जलाने से मृदा के लाभदायक सूक्ष्म जीव व जैविक कार्बन जलकर नष्ट हो जाता है, जिससे मृदा सख्त व कठोर होकर बंजर हो जाती है। फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कृषक फसल अवशेष अथवा नरवाई का उपयोग आच्छादन व मल्चिंग तथा स्ट्रा रीपर से भूसा बनाकर पशुओं के भोजन या भूसे के विपणन से अतिरिक्त लाभ प्राप्त कर सकते हैं। किसानों द्वारा बगैर जुताई किए हुए रबी फसलों की कटाई के बाद खड़ी नरवाई, पराली व फसल अवशेष इत्यादि में सीधे हैप्पी सीडर अथवा सुपर सीडर से बोनी की जा सकती है। इससे मृदा में जैविक कार्बन की मात्रा में वृद्धि के साथ लागत कम आती है। बेलर, रैकर, चॉपर मशीन का उपयोग कर नरवाई के बंडल बनवाकर इनका उपयोग फैक्ट्रियों में ईंधन तथा आच्छादन के रूप में भी कर सकते हैं। इसके उपरांत आवश्यकतानुसार भूसा बनाने का कार्य किया जा सकता है।
*15 हजार रूपए तक के अर्थदण्ड का है प्रावधान*
किसानों द्वारा नरवाई जलाने तथा आदेश के उल्लघंन पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तथा पर्यावरण विभाग के निर्देशानुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि के रूप में अर्थदण्ड अधिरोपित करने का प्रावधान है, जिसके तहत 2 एकड़ से कम जमीन वाले कृषकों को 2500 रूपए, 2 से 5 एकड़ भूमिधारी कृषकों को 5 हजार रूपए तथा 5 एकड़ से अधिक जमीन वाले किसानों को प्रति घटना 15 हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित करने का प्रावधान है।
