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आरती सरीन ने बताया सेना में महिलाओं का बदला सफर

1986 में सेना में कमीशन से लेकर आज नेतृत्व की जिम्मेदारियों तक, आरती सरीन ने साझा किया महिलाओं की तरक्की का सफर

सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर बोलीं आरती सरीन, बताया 1986 से अब तक कितना बदला माहौल

**नई दिल्ली:** आजतक के **सुरक्षा सभा** कार्यक्रम में आयोजित ‘नारी तुम शक्ति हो’ सेशन में वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) और आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विस की पूर्व डीजी **आरती सरीन** ने भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बदलती भूमिका और बढ़ते अवसरों पर विस्तार से बात की। उन्होंने अपने सैन्य करियर के अनुभव साझा करते हुए बताया कि 1986 में जब उन्होंने आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कोर में कमीशन लिया था, तब सेना में महिलाओं के लिए परिस्थितियां आज की तुलना में काफी अलग थीं।

## 1986 में सेना में महिलाओं की स्थिति कैसी थी?

आरती सरीन ने बताया कि जब उन्होंने वर्ष 1986 में आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कोर ज्वाइन किया था, उस समय सेना में महिलाओं की संख्या काफी सीमित थी। महिलाओं के लिए अवसर भी आज की तुलना में कम थे और उन्हें कई स्तरों पर अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में सेना में महिलाओं की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। महिलाओं की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनकी जिम्मेदारियां और भूमिकाएं भी लगातार विस्तृत हुई हैं।

आरती सरीन के मुताबिक, नीतियों में हुए बदलावों ने महिलाओं के लिए नए रास्ते खोले हैं। अब महिला अधिकारी सेना में पहले की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाली भूमिकाएं निभा रही हैं।

## बढ़ा महिलाओं का प्रतिनिधित्व

आरती सरीन ने कहा कि जैसे-जैसे सशस्त्र बलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा, वैसे-वैसे उनके लिए अवसर भी बढ़ते गए। आज महिला अधिकारी कई तरह की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं और अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने बताया कि सेना में महिलाओं के लिए सिर्फ मेडिकल सेवाओं तक सीमित अवसर नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में भी उनकी भागीदारी बढ़ रही है। महिला अधिकारी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाकर अपनी क्षमता साबित कर रही हैं।

उनके मुताबिक, महिलाओं को अवसर मिलने के साथ ही उनके सामने नेतृत्व की नई भूमिकाएं भी खुली हैं।

## नेतृत्व की जिम्मेदारियां मिलने से बढ़ा आत्मविश्वास

आरती सरीन ने कहा कि किसी भी अधिकारी के करियर में नेतृत्व की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है। धीरे-धीरे महिला अधिकारियों को भी कमान और नेतृत्व से जुड़ी जिम्मेदारियां मिलने लगी हैं।

उन्होंने कहा कि जब अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाती है तो उनके भीतर निर्णय लेने की क्षमता और प्रशासनिक कौशल भी विकसित होता है। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली अधिकारी आगे बढ़कर बड़ी जिम्मेदारियां संभाल सकती हैं।

उनके मुताबिक, सेना में किसी अधिकारी की प्रगति उसके प्रदर्शन, क्षमता और जिम्मेदारी निभाने के तरीके पर निर्भर करती है। महिलाओं ने भी इन क्षेत्रों में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।

## नीतियों में बदलाव से महिलाओं को मिले नए अवसर

आरती सरीन ने अपने संबोधन में इस बात पर भी जोर दिया कि समय के साथ सशस्त्र बलों की नीतियों में बदलाव हुए हैं। इन बदलावों ने महिलाओं के लिए करियर के अधिक अवसर उपलब्ध कराए हैं।

उन्होंने कहा कि सेना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना केवल संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाओं को अधिक जिम्मेदारियां और नेतृत्व के अवसर भी मिल रहे हैं।

उनके अनुसार, आज महिला अधिकारी अपनी योग्यता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं और सेना में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

## महिलाओं के लिए बदला सेना का माहौल

आरती सरीन ने 1986 से अब तक के अपने अनुभवों की तुलना करते हुए बताया कि सेना में महिलाओं के लिए माहौल में काफी बदलाव आया है। जिस समय उन्होंने सैन्य सेवा शुरू की थी, उस समय महिलाओं की मौजूदगी सीमित थी, लेकिन अब तस्वीर काफी बदल चुकी है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से आने वाली पीढ़ियों के लिए भी नए अवसर पैदा हुए हैं। महिला अधिकारियों के सफल करियर से दूसरी महिलाओं को भी सशस्त्र बलों में आने और नेतृत्व की भूमिका निभाने की प्रेरणा मिलती है।

## प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का मौका

आरती सरीन ने कहा कि अगर कोई अधिकारी लगातार अच्छा प्रदर्शन करता है तो उसके लिए आगे बढ़ने के अवसर मौजूद रहते हैं। प्रशासनिक क्षमताओं के विकास और नेतृत्व की जिम्मेदारियां मिलने से अधिकारी अपने करियर में आगे बढ़ता है।

उन्होंने महिला अधिकारियों के बढ़ते योगदान को सशस्त्र बलों में हो रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा बताया। उनके मुताबिक, आज महिलाएं सैन्य क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

‘नारी तुम शक्ति हो’ सेशन में आरती सरीन की बातों ने यह दिखाया कि पिछले चार दशकों में भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका किस तरह बदली है। 1986 में सीमित अवसरों से शुरू हुआ यह सफर आज नेतृत्व और बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंच चुका है।

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