UPI MDR Charge: उमर अब्दुल्ला की सरकार को सलाह, बोले- आम लोगों पर न पड़े चार्ज का बोझ
UPI के नए MDR नियम पर उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया, कहा- व्यक्ति से व्यक्ति के बीच लेन-देन पर नहीं लगेगा कोई चार्ज

# UPI MDR Charge: उमर अब्दुल्ला बोले\- आम लोगों पर न पड़े बोझ, कंपनियों से चार्ज लेने में आपत्ति नहीं
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने UPI के नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नए शुल्क का बोझ आम लोगों पर न पड़े। साथ ही उन्होंने UPI सिस्टम को चलाने और उसके बुनियादी ढांचे को बनाए रखने की लागत का भी जिक्र किया। The Times of India+1
## आम लोगों के UPI ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा चार्ज
उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि **व्यक्ति से व्यक्ति (P2P)** होने वाले UPI लेन-देन पर MDR नहीं लगाया जाएगा। यानी अगर कोई व्यक्ति अपने दोस्त, परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति को UPI के जरिए पैसे भेजता है, तो इस ट्रांजेक्शन पर नया MDR लागू नहीं होगा।
नए नियमों का संबंध मुख्य रूप से **Person-to-Merchant (P2M)** भुगतान से है। 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट UPI लेन-देन पर 0.4 फीसदी MDR लागू किया जाना है। यह शुल्क मर्चेंट से लिया जाएगा, ग्राहक से सीधे नहीं। Reuters+1
## ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर क्या बदलेगा?
नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M ट्रांजेक्शन पर 0.4 फीसदी MDR निर्धारित किया गया है। हालांकि, प्रति ट्रांजेक्शन इसकी अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई ग्राहक किसी पात्र व्यापारी को ₹10,000 का UPI भुगतान करता है, तो निर्धारित दर के हिसाब से MDR ₹40 होगा। यह शुल्क मर्चेंट पर लागू होगा। सरकार ने बैंकों को निर्देश दिया है कि इस लागत को सीधे ग्राहकों पर न डाला जाए। The Indian Express+1
## छोटे कारोबारियों को भी राहत
नए नियमों में छोटे व्यापारियों के लिए भी कुछ छूट रखी गई है। इसके अलावा कुछ जरूरी सेवाओं और क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क संरचना तय की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, रेलवे, टेलीकॉम, ईंधन, बीमा और कुछ अन्य श्रेणियों में निर्धारित फ्लैट शुल्क का प्रावधान है। Indian Express – Gujarati+1
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम की लागत को नियंत्रित तरीके से बांटा जा सके और छोटे व्यापारियों तथा आम ग्राहकों पर इसका सीधा असर सीमित रहे।
## उमर अब्दुल्ला ने UPI के खर्च का भी किया जिक्र
उमर अब्दुल्ला ने UPI को संचालित करने के पीछे होने वाली लागत की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट का बुनियादी ढांचा तैयार करना, उसे चलाना और लगातार अपग्रेड करना खर्चीला काम है।
उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि लोगों को मुफ्त मिलने वाली सेवाओं की कीमत का अक्सर अंदाजा नहीं होता। उनके मुताबिक, UPI जैसी व्यवस्था को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए इसके वित्तीय मॉडल पर भी ध्यान देना जरूरी है। The Times of India
## कंपनियों से शुल्क लेने पर नहीं है आपत्ति
उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि अगर शुल्क उन कंपनियों या कारोबारियों से लिया जाता है जो UPI के जरिए बड़ी मात्रा में भुगतान स्वीकार करते हैं, तो उन्हें इस पर आपत्ति नहीं है।
उनका जोर इस बात पर है कि आम उपभोक्ता के रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं आना चाहिए।
## UPI को लेकर राजनीतिक बहस तेज
MDR के नए नियम को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले की आलोचना की है और इसे वापस लेने की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से कहा गया है कि नया शुल्क ढांचा UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। The Economic Times+1
इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है, जिसमें नए शुल्क को चुनौती दी गई है और इसके आम लोगों पर संभावित प्रभाव का सवाल उठाया गया है। The Times of India
## UPI का इस्तेमाल करने वालों को क्या जानना चाहिए?
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि **हर UPI भुगतान पर चार्ज नहीं लगाया गया है।** व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाला भुगतान मुफ्त रहेगा। वहीं, 15 अक्टूबर से निर्धारित शर्तों के तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतानों पर MDR लागू होगा। Reuters+1
सरकार का कहना है कि इसका सीधा शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। हालांकि, व्यापारी इस लागत को अपने कारोबार में किस तरह संभालते हैं, इसे लेकर बाजार में चर्चा जारी है। कुछ खुदरा कारोबारियों ने लागत बढ़ने की स्थिति में कीमतों या छूट पर असर पड़ने की आशंका जताई है। The Economic Times
कुल मिलाकर, UPI के नए MDR नियम ने डिजिटल पेमेंट की लागत और इसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाने को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। उमर अब्दुल्ला ने भी इसी संदर्भ में आम उपभोक्ताओं को शुल्क के बोझ से बचाने की जरूरत पर जोर दिया है।\
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