UP Rajya Sabha Election 2026: 10वीं सीट पर सियासी घमासान, अखिलेश के सामने तीसरी सीट के लिए वोटों का गणित
यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान, 10वीं सीट के लिए बीजेपी-एनडीए और सपा के बीच वोटों का गणित अहम

# UP Rajya Sabha Election 2026: 10वीं सीट पर सियासी घमासान, अखिलेश के सामने तीसरी सीट के लिए वोटों का गणित
**लखनऊ:** उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाला चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अहम परीक्षा बन गया है। चुनाव आयोग ने यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए **16 अक्टूबर 2026** को मतदान कराने का कार्यक्रम घोषित किया है। मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और इसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर और नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है।
मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर **सात सीटों पर बीजेपी-एनडीए और दो सीटों पर समाजवादी पार्टी की स्थिति मजबूत** बताई जा रही है। इसके बाद बचने वाली 10वीं सीट पर मुकाबले का गणित विधायकों के समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर कर सकता है। हालांकि, उम्मीदवारों के नामांकन और अंतिम राजनीतिक समीकरण सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
## 10 सीटों पर किन सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है?
यूपी से राज्यसभा की जिन सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें बीजेपी की आठ सीटें, सपा की एक और बसपा की एक सीट शामिल है। बीजेपी के अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके अलावा दिनेश शर्मा की सीट पहले ही रिक्त हो चुकी है। सपा से राम गोपाल यादव और बसपा से रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
दिनेश शर्मा ने 11 सितंबर को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इसके बाद उन्हें अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया। उनकी रिक्त सीट भी इसी चुनावी चक्र में शामिल है।
## एक सीट के लिए कितने वोट जरूरी?
राज्यसभा चुनाव में जनता सीधे मतदान नहीं करती। राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव विधानसभा के निर्वाचित विधायक करते हैं। यूपी विधानसभा की कुल क्षमता 403 है, लेकिन मौजूदा समय में कुछ सीटें रिक्त हैं। अलग-अलग गणनाओं में प्रभावी संख्या के आधार पर एक सीट के लिए करीब **36-38 प्रथम वरीयता वाले वोट** की जरूरत बताई जा रही है।
Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा विधानसभा संख्या में सपा के पास 101 विधायक और कांग्रेस के पास 2 विधायक हैं। यानी दोनों को मिलाकर 103 विधायक होते हैं। इस गणित से सपा दो सीटों के लिए आवश्यक संख्या जुटा सकती है, जबकि तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी।
## अखिलेश यादव की नजर तीसरी सीट पर
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी के सामने मौजूदा सीट बरकरार रखने के साथ तीसरी सीट के लिए भी समीकरण बनाने की चुनौती है। 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी सपा के पास तीसरी सीट जीतने की स्थिति थी, लेकिन बीजेपी ने आठवें उम्मीदवार के तौर पर संजय सेठ को मैदान में उतारा था। उस चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद सपा के उम्मीदवार आलोक रंजन चुनाव हार गए थे।
इसी पृष्ठभूमि में इस बार सपा अतिरिक्त विधायकों के समर्थन और विपक्षी खेमे के संभावित वोटों पर नजर रख सकती है। हालांकि, किसी भी उम्मीदवार की जीत का अंतिम गणित नामांकन के बाद सामने आने वाले उम्मीदवारों और मतदान के समय विधायकों की वास्तविक संख्या पर निर्भर करेगा।
## बीजेपी-एनडीए के सामने आठवीं सीट की चुनौती
मौजूदा विधानसभा गणित के आधार पर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास सात सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही है। आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। इसी वजह से 10वीं सीट के साथ-साथ आठवीं सीट को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
बीजेपी और सपा दोनों के लिए सहयोगी दलों के विधायक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसके अलावा छोटे दलों और ऐसे विधायकों की भूमिका भी चर्चा में है, जिनका समर्थन किसी एक खेमे के लिए अतिरिक्त सीट का रास्ता खोल सकता है।
## पल्लवी पटेल और महाराजी देवी पर भी नजर
सपा के खेमे में कुछ विधायकों के रुख को लेकर भी राजनीतिक चर्चा है। Aaj Tak की रिपोर्ट में सपा विधायक पल्लवी पटेल और गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी देवी के रुख को महत्वपूर्ण बताया गया है। ऐसे विधायकों का मतदान राज्यसभा चुनाव के अतिरिक्त सीट वाले गणित को प्रभावित कर सकता है।
राज्यसभा चुनाव में वोटों का ट्रांसफर और प्रथम वरीयता के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर दूसरी वरीयता के वोट भी अहम हो सकते हैं। इसलिए पार्टियां मतदान से पहले अपने विधायकों के समर्थन को लेकर रणनीति तैयार करती हैं।
## 2024 की क्रॉस वोटिंग फिर चर्चा में
यूपी में 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान भी क्रॉस वोटिंग ने चुनाव का गणित बदल दिया था। उस समय सपा के तीसरे उम्मीदवार आलोक रंजन को हार का सामना करना पड़ा और बीजेपी के संजय सेठ ने जीत दर्ज की थी। इस बार भी राजनीतिक दल उस चुनाव के अनुभव को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
हालांकि, 2024 के समीकरणों को 2026 में सीधे लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि विधानसभा की मौजूदा संख्या, दलों की स्थिति और संभावित उम्मीदवार अलग हैं।
## बसपा के लिए भी महत्वपूर्ण चुनाव
बसपा के राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर बसपा के सामने अपनी राज्यसभा सीट बचाने की चुनौती है। यदि पार्टी आवश्यक संख्या जुटाने में सफल नहीं होती है तो इस चुनाव के बाद राज्यसभा में उसका प्रतिनिधित्व समाप्त हो सकता है।
यूपी की राजनीति में बसपा की स्थिति और उसके विधायकों की संख्या को देखते हुए राज्यसभा चुनाव में उसके समर्थन या रुख पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।
## 16 अक्टूबर को साफ होगी तस्वीर
राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना **29 सितंबर** को जारी होगी। 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर सामने आएगी। 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना होगी।
इस तरह यूपी की 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव केवल संसद के उच्च सदन में सीटों के बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह चुनाव बीजेपी-एनडीए, सपा और अन्य दलों के बीच मौजूदा विधानसभा गणित, सहयोगी दलों और विधायकों के समर्थन की स्थिति को भी सामने लाएगा। खास तौर पर **10वीं सीट के लिए उम्मीदवार कौन होगा और दोनों खेमे कितने विधायकों का समर्थन जुटा पाते हैं**, इस पर चुनाव की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।



