Duleep Trophy 2026: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने DRS में दिखाया धोनी जैसा भरोसा, बदला रिकी भुई का फैसला
ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव ने सही समय पर लिया रिव्यू, सेमीफाइनल में भी अपने फैसले से चौंकाया था

## Duleep Trophy 2026: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने DRS में दिखाया भरोसा, रिकी भुई के खिलाफ बदला फैसला
**चेन्नई:** ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच चेन्नई में दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला खेला जा रहा है। इस मैच में ईस्ट जोन के उपकप्तान और महज 15 साल के वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर अपने फैसले को लेकर चर्चा में हैं। विकेट के पीछे रिकी भुई के खिलाफ कैच की अपील के बाद वैभव ने रिव्यू लेने का फैसला किया, जो बाद में सही साबित हुआ।
### रिकी भुई के खिलाफ लिया DRS
दलीप ट्रॉफी फाइनल के तीसरे दिन साउथ जोन की पारी के दौरान रिकी भुई के विकेट के पीछे कैच की अपील हुई। मैदानी अंपायर के फैसले के बाद वैभव सूर्यवंशी ने DRS लेने का भरोसा दिखाया।
रिव्यू में तस्वीर बदल गई और फैसला ईस्ट जोन के पक्ष में गया। वैभव के इस फैसले ने एक बार फिर दिखाया कि कम उम्र के बावजूद वह मैदान पर परिस्थितियों को समझकर फैसले लेने का आत्मविश्वास रखते हैं।
### सेमीफाइनल में भी दिखाया था भरोसा
वैभव का DRS को लेकर यह अंदाज फाइनल में पहली बार देखने को नहीं मिला। इससे पहले सेंट्रल जोन के खिलाफ दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में भी उन्होंने अपने फैसले से सभी को प्रभावित किया था।
सेमीफाइनल में मुकेश कुमार की गेंद पर आर्यन जुयाल के खिलाफ कैच की अपील हुई थी। DRS लेने के लिए समय तेजी से निकल रहा था, लेकिन वैभव ने अपने इंस्टिंक्ट पर भरोसा करते हुए रिव्यू लेने का फैसला किया। उनका यह फैसला भी सही साबित हुआ।
### धोनी से की जा रही तुलना
क्रिकेट में DRS का इस्तेमाल करते समय कप्तान या विकेटकीपर का भरोसा और सही समय पर फैसला लेना बेहद महत्वपूर्ण होता है। महेंद्र सिंह धोनी को DRS के मामले में बेहतरीन फैसले लेने वाले खिलाड़ियों में गिना जाता है। उनके कई रिव्यू फैसले क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चित रहे हैं।
इसी वजह से वैभव सूर्यवंशी के DRS फैसलों की तुलना धोनी के अंदाज से की जा रही है। हालांकि वैभव का करियर अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इतनी कम उम्र में मैदान पर उनका आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता चर्चा का विषय बन रही है।
### बल्ले के साथ कप्तानी वाली सोच भी
वैभव सूर्यवंशी अपनी बल्लेबाजी के लिए पहले से ही सुर्खियां बटोर चुके हैं। अब उनके खेल में नेतृत्व क्षमता और मैदान पर तेजी से निर्णय लेने का अंदाज भी नजर आ रहा है।
ईस्ट जोन के उपकप्तान के तौर पर वह सिर्फ बल्लेबाजी पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि मैच की परिस्थितियों को पढ़कर टीम के फैसलों में भी योगदान दे रहे हैं। DRS के इन दो मौकों ने उनके क्रिकेटिंग इंस्टिंक्ट की झलक दिखाई है।
महज 15 साल की उम्र में दलीप ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में खेलना और महत्वपूर्ण मौकों पर आत्मविश्वास के साथ फैसले लेना वैभव के लिए बड़ी उपलब्धि है। आने वाले समय में उनके प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता पर क्रिकेट प्रशंसकों की नजर बनी रहेगी।



