CRPF Women Warriors: 40 साल से देश की सुरक्षा में महिला जवान, 25 सितंबर को होगा सम्मान
CRPF में महिला जवानों की 40 साल की गौरवगाथा, फ्रंटलाइन से लेकर आतंकवाद विरोधी अभियानों तक निभाई अहम भूमिका

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में महिला जवानों की सेवा और योगदान के 40 साल पूरे हो रहे हैं। साल 1986 में CRPF की पहली महिला बटालियन के गठन के साथ शुरू हुआ यह सफर अब कई अहम जिम्मेदारियों तक पहुंच चुका है। महिला कर्मी कानून-व्यवस्था, आतंकवाद विरोधी अभियानों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और अन्य सुरक्षा ड्यूटी में अपनी भूमिका निभा रही हैं।
### 1986 में शुरू हुआ महिला बटालियन का सफर
CRPF के अनुसार, पहली महिला बटालियन 88 (महिला) बटालियन के रूप में 1986 में गठित की गई थी। प्रशिक्षण के बाद मार्च 1987 में इस बटालियन ने मेरठ में कानून-व्यवस्था की ड्यूटी और बाद में श्रीलंका में IPKF मिशन से जुड़े कार्यों में हिस्सा लिया। इसके बाद 1995 में 135 (महिला) बटालियन और 2011 में 213 बटालियन का गठन किया गया। 2014-15, 2015-16 और 2016-17 में तीन और महिला बटालियन जोड़ी गईं।
### RAF और बस्तरिया बटालियन में भी जिम्मेदारी
CRPF में महिलाओं की भूमिका केवल अलग महिला बटालियनों तक सीमित नहीं है। CRPF के मुताबिक, प्रत्येक रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) बटालियन में महिला कर्मियों का घटक मौजूद है। इसके अलावा महिला कर्मियों को बस्तरिया बटालियन में भी तैनात किया जाता है।
महिला जवान जम्मू-कश्मीर, अयोध्या, मणिपुर, असम और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों समेत देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय ड्यूटी कर रही हैं।
### संसद हमले में कमलेश कुमारी का बलिदान
CRPF की महिला जवानों के योगदान में 13 दिसंबर 2001 का संसद आतंकी हमला भी एक महत्वपूर्ण अध्याय है। CRPF की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, कांस्टेबल कमलेश कुमारी 2001 में संसद पर हुए फिदायीन हमले के दौरान शहीद हुई थीं। उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।
इसके अलावा CRPF की महिला कर्मियों ने श्रीलंका और जम्मू-कश्मीर समेत विभिन्न ऑपरेशनल क्षेत्रों में भी साहस और जिम्मेदारी का प्रदर्शन किया है। CRPF के रिकॉर्ड में कांस्टेबल बिंदु कुमरे और अन्य महिला कर्मियों की वीरता का भी उल्लेख है।
### चार दशक में बदली भूमिका
1986 में पहली महिला बटालियन के गठन से लेकर आज तक CRPF में महिला कर्मियों की भूमिका लगातार विस्तृत हुई है। अब वे केवल महिला-केंद्रित कानून-व्यवस्था ड्यूटी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न ऑपरेशनल और सुरक्षा जिम्मेदारियों में भी तैनात हैं।
CRPF की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, महिला कर्मियों को देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय ड्यूटी दी जा रही है। बल के इतिहास में 1986 को पहली महिला बटालियन के गठन के वर्ष के तौर पर दर्ज किया गया है।
### 25 सितंबर को होगा विशेष सम्मान समारोह
CRPF में महिला कर्मियों की चार दशक लंबी सेवा को सम्मान देने के लिए 25 सितंबर 2026 को विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम में सेवारत और पूर्व महिला कर्मियों को उनके योगदान और सेवाओं के लिए सम्मानित किया जाएगा।
चार दशक के इस सफर में CRPF की महिला जवानों ने कानून-व्यवस्था से लेकर कठिन ऑपरेशनल परिस्थितियों तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं। पहली महिला बटालियन से शुरू हुई यह यात्रा अब बल के विभिन्न क्षेत्रों और अभियानों में महिलाओं की भागीदारी तक पहुंच चुकी है।



