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SIR पर 2,000 से ज्यादा नागरिकों ने CJI सूर्यकांत को लिखा खुला पत्र, चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

SIR को लेकर 2,000 से अधिक नागरिकों ने CJI सूर्यकांत को लिखा खुला पत्र, सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की अपील

# SIR पर 2,000 से ज्यादा नागरिकों ने CJI सूर्यकांत को लिखा खुला पत्र, चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

**नई दिल्ली:** निर्वाचन आयोग की ओर से चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर 2,000 से अधिक नागरिकों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों को खुला पत्र लिखा है। पत्र में SIR की वैधता, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े डेटा के प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर न्यायिक हस्तक्षेप की अपील की है।

## SIR पर रोक और स्वतंत्र जांच की मांग

खुले पत्र में नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट से SIR की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और इसकी वैधता एवं प्रक्रियात्मक पारदर्शिता की स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा कराने की मांग की है। इसके साथ ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच और ECINet तकनीकी प्लेटफॉर्म के व्यापक सुरक्षा एवं कानूनी ऑडिट की मांग भी की गई है।

पत्र के अनुसार, हस्ताक्षरकर्ताओं में शिक्षाविद, वकील, पूर्व नौकरशाह, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी शामिल हैं। प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं में पूर्व राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार, अर्थशास्त्री जयति घोष और कमल मल्होत्रा, सेवानिवृत्त जेएनयू प्रोफेसर आदित्य मुखर्जी और मृदुला मुखर्जी, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत और सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज समेत कई नाम शामिल हैं।

## चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद का भी जिक्र

पत्र में चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं का दावा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी।

पत्र में संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा गया है कि बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग में फैसले सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए। हस्ताक्षरकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रशासनिक निर्देश और सॉफ्टवेयर से जुड़े बदलाव अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लागू किए गए। ये पत्र में लगाए गए आरोप हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

## Form 6 में बदलाव को लेकर सवाल

खुले पत्र में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव का भी मुद्दा उठाया गया है। पत्र के मुताबिक, पहली बार मतदाता बनने वाले लोगों से यह बताने को कहा गया कि उनका या उनके माता-पिता का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में था या नहीं।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने दावा किया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज करते हुए इसे अनधिकृत और नियमों के विपरीत बताया था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि आपत्ति के बावजूद यह बदलाव लागू रहा।

## ECINet को लेकर भी उठे सवाल

पत्र में चुनाव आयोग के ECINet प्लेटफॉर्म के जरिए मतदाता डेटा और चुनावी प्रक्रिया के केंद्रीकरण पर भी सवाल उठाए गए हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने Representation of the People Act, 1950 की धारा 13B का हवाला देते हुए कहा है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन की वैधानिक जिम्मेदारी Electoral Registration Officers (EROs) की है।

पत्र में दावा किया गया है कि केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर व्यवस्था के कारण स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका प्रभावित हुई है। गोवा का उदाहरण देते हुए हस्ताक्षरकर्ताओं ने दावा किया कि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद 97 मतदाताओं के नाम बहाल करने की प्रक्रिया सॉफ्टवेयर लॉक के कारण प्रभावित हुई।

## पश्चिम बंगाल का भी दिया गया उदाहरण

खुले पत्र में पश्चिम बंगाल से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि मतदाता सूची में शामिल नामों को हटाने के लिए 16 लाख से अधिक अपीलें दाखिल की गईं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के कुछ हिस्से चुनाव आयोग के सभी संबंधित सदस्यों और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की जानकारी या अनुमति के बिना हुए।

पत्र में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने का भी दावा किया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इसे मताधिकार और उचित प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

## सुप्रीम कोर्ट से क्या-क्या मांग की गई?

2,000 से अधिक नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट से मुख्य रूप से कई मांगें की हैं। इनमें SIR पर तत्काल रोक और इसकी स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा, चुनाव आयोग की प्रशासनिक एवं परिचालन गतिविधियों की जांच, ECINet का स्वतंत्र सुरक्षा एवं कानूनी ऑडिट और मतदाता सूची से तकनीकी गड़बड़ी या सॉफ्टवेयर संबंधी समस्याओं के कारण हटाए गए नामों की समीक्षा शामिल है।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने ECINet की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की है। पत्र में यह भी कहा गया है कि यह जांच की जाए कि केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म तक वैधानिक अधिकारियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की पहुंच थी या नहीं।

पत्र लिखने वाले नागरिकों ने कहा है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची की शुद्धता और प्रक्रिया की पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से पूरे मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर आवश्यक न्यायिक कार्रवाई करने की अपील की है।

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