मुंबई मेट्रो 7A में डिजाइन की बड़ी गलती, एयरपोर्ट के पास 2.5 मीटर ज्यादा ऊंचा बना वायाडक्ट; करोड़ों का झटका संभव
मुंबई मेट्रो लाइन 7A के एयरपोर्ट फनल जोन में बने वायाडक्ट की ऊंचाई तय सुरक्षा सीमा से करीब 2.5 मीटर ज्यादा हो गई है. MMRDA ने AAI से ऊंचाई में छूट मांगी है, लेकिन निर्माण 2025 से रुका हुआ है.

मुंबई मेट्रो 7A में डिजाइन की बड़ी गलती, एयरपोर्ट के पास 2.5 मीटर ज्यादा ऊंचा बना वायाडक्ट
मुंबई: मुंबई मेट्रो लाइन 7A के निर्माण में सामने आई एक डिजाइन संबंधी गलती अब मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी MMRDA के लिए बड़ा आर्थिक झटका बन सकती है। इस गलती की वजह से एयरपोर्ट के नजदीक तैयार किए गए मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर की ऊंचाई तय विमानन सुरक्षा सीमा से ज्यादा हो गई है। ऐसे में इस हिस्से को दोबारा बनाने की नौबत आ सकती है।
मामला मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़े अहम इलाके का है। मुंबई मेट्रो लाइन 7A का यह हिस्सा एयरपोर्ट के एयर फनल जोन में आता है। एयर फनल जोन वह संवेदनशील क्षेत्र होता है, जहां विमानों के सुरक्षित टेक-ऑफ और लैंडिंग को ध्यान में रखते हुए आसपास के निर्माण की ऊंचाई पर कड़े नियम लागू होते हैं।
तय सुरक्षा सीमा से 2.5 मीटर ज्यादा ऊंचा बना इंफ्रास्ट्रक्चर
MMRDA के मुताबिक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी AAI की ओर से परियोजना के लिए ऊंचाई से जुड़े सुरक्षा मानदंड निर्धारित किए गए थे। लेकिन डिजाइन में हुई गलती के चलते तैयार किया गया इंफ्रास्ट्रक्चर विमानन अधिकारियों की तय सुरक्षा सीमा से करीब 2.5 मीटर ज्यादा ऊंचा हो गया।
इससे मेट्रो परियोजना के इस हिस्से को लेकर सुरक्षा और तकनीकी स्तर पर समस्या खड़ी हो गई है। खास बात यह है कि इस डिजाइन संबंधी गलती का पता निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद चला।
अब MMRDA के सामने इस समस्या का समाधान निकालने की चुनौती है। यदि मौजूदा ढांचे को तय ऊंचाई के अनुरूप स्वीकार नहीं किया जाता है, तो उसे बदलने या दोबारा तैयार करने की जरूरत पड़ सकती है। इससे परियोजना की लागत बढ़ने की आशंका है और सरकारी एजेंसी पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
2025 से रुका हुआ है इस हिस्से का निर्माण
मुंबई मेट्रो 7A के इस हिस्से का निर्माण 2025 से ही रुका हुआ है। एयरपोर्ट क्षेत्र में सुरक्षा मानकों से जुड़ी समस्या सामने आने के बाद इस हिस्से पर आगे का काम नहीं हो सका है।
MMRDA ने इस मामले को सुलझाने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से ऊंचाई में छूट देने का अनुरोध किया है। अथॉरिटी से यह अनुमति मिलने पर मौजूदा संरचना को बनाए रखने का रास्ता साफ हो सकता है और परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि, एयरपोर्ट के एयर फनल जोन में निर्माण होने के कारण ऊंचाई से जुड़े सुरक्षा नियम बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में छूट का अनुरोध स्वीकार होगा या नहीं, यह संबंधित विमानन सुरक्षा मानकों और तकनीकी आकलन पर निर्भर करेगा।
दोबारा निर्माण हुआ तो बढ़ेगा आर्थिक बोझ
अगर मौजूदा वायाडक्ट या संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर को तय सीमा के अनुरूप दोबारा बनाना पड़ा, तो MMRDA को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। पहले से तैयार संरचना में बदलाव या उसके पुनर्निर्माण से निर्माण लागत के साथ-साथ समय भी बढ़ सकता है।
परियोजना में देरी का असर मेट्रो लाइन 7A के संचालन की समयसीमा पर भी पड़ सकता है। हालांकि, इस हिस्से को लेकर अंतिम समाधान AAI की अनुमति और संबंधित तकनीकी निर्णयों के बाद ही स्पष्ट होगा।
एयरपोर्ट क्षेत्र में सुरक्षा सबसे अहम
मेट्रो जैसी बड़ी शहरी परिवहन परियोजनाओं के निर्माण में ऊंचाई, डिजाइन और स्थान से जुड़े मानकों का पालन जरूरी होता है। खासकर एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों में किसी भी स्थायी संरचना की ऊंचाई विमान संचालन को ध्यान में रखकर तय की जाती है।
मुंबई मेट्रो 7A का यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे एयरपोर्ट के एयर फनल जोन से जुड़ा हुआ है। एक ओर MMRDA परियोजना को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर विमानन सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना समाधान निकालना जरूरी है।
फिलहाल इस मामले में MMRDA की नजर AAI के फैसले पर है। यदि ऊंचाई में छूट मिलती है तो मौजूदा संरचना को लेकर आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। वहीं, अगर छूट नहीं मिलती है, तो तय सुरक्षा सीमा के अनुरूप ढांचे में बदलाव या पुनर्निर्माण करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में मुंबई मेट्रो 7A की लागत और समय दोनों पर असर पड़ने की संभावना है।


