
ईरान के खिलाफ अमेरिका का ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’, सहयोगी देशों और कंपनियों को प्रतिबंधों की चेतावनी
अमेरिका ने ईरान के वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ईरान को मिलने वाले आर्थिक संसाधनों और राजस्व के रास्तों को सीमित करना है। अमेरिका ने विभिन्न देशों, वित्तीय संस्थाओं और कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर वे ईरान से संबंधित प्रतिबंधित गतिविधियों में सहयोग जारी रखते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
स्कॉट बेसेंट ने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने उन नेटवर्क, कंपनियों और मध्यस्थों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल ईरान तेल के परिवहन, वित्तीय लेन-देन और प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन आर्थिक माध्यमों को बंद करके ईरानी सरकार तथा उससे संबंधित संस्थाओं की वित्तीय क्षमता को सीमित किया जाएगा। अमेरिकी वित्त मंत्रालय
अमेरिकी वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग अथवा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाली किसी भी संस्था को अमेरिकी डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था से बाहर किया जा सकता है। डॉलर प्रणाली से बाहर होने का मतलब संबंधित बैंक या कंपनी के लिए अंतरराष्ट्रीय लेन-देन, भुगतान और व्यापारिक गतिविधियों में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना हो सकता है।
इस अभियान के तहत अमेरिका ने ईरान से जुड़े लगभग 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इनमें ऐसे नेटवर्क शामिल हैं, जिनका संबंध तेल व्यापार, परमाणु एवं मिसाइल तकनीक की खरीद, साइबर गतिविधियों और ईरानी सरकारी संस्थाओं के वित्तपोषण से है।
ट्रेजरी विभाग ने विशेष रूप से पांच क्षेत्रों में प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया है। इनमें डिजिटल संपत्तियां, उन्नत तकनीक, सोना, विमानन और समुद्री परिवहन शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान इन क्षेत्रों और तीसरे देशों में सक्रिय कंपनियों का उपयोग अपने व्यापारिक और वित्तीय नेटवर्क को चलाने के लिए करता रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति
स्कॉट बेसेंट ने यह भी बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी, विदेश विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें विभिन्न देशों के अधिकारियों के संपर्क में हैं। संबंधित देशों से अपेक्षा की जा रही है कि वे ईरान से जुड़ी उन गतिविधियों पर निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई करें, जिनकी पहचान अमेरिकी एजेंसियों ने की है। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया कि अलग-अलग देशों को कितने समय की मोहलत दी गई है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि संबंधित देश स्वयं कार्रवाई नहीं करते हैं, तो वाशिंगटन अपने अधिकारों के तहत एकतरफा कदम उठा सकता है। इस नीति के कारण ईरान से कारोबार करने वाले अंतरराष्ट्रीय बैंकों, शिपिंग कंपनियों, व्यापारिक संस्थाओं और ऊर्जा कारोबारियों के सामने जोखिम बढ़ सकता है।
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी चेतावनी को खारिज किया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिकी दावों को गंभीरता से न लेने की बात कही और भरोसा जताया कि ईरान के व्यापारिक साझेदार वाशिंगटन के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। ईरान के आर्थिक अधिकारियों ने भी कहा है कि देश प्रतिबंधों का सामना करने के लिए तैयार है। रॉयटर्स
इस पूरे घटनाक्रम से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था, तेल व्यापार, समुद्री परिवहन और पश्चिम एशिया की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।

